नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 आज से लागू हो गया है. नया फाइनेंशियल ईयर शुरू होने के साथ ही सैलरीड क्लास की इन-हैंड सैलरी पर असर पड़ने वाला है. ओल्ड टैक्स रिजीम सिलेक्ट करने वालों को कई फायदे मिल सकते हैं. हालांकि सरकार ने टैक्स स्लैब में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है. बजट 2026 में न्यू और ओल्ड रिजीम में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है. लेकिन कई छूट और और कुछ पर्क्स पर टैक्स बढ़ गया है. नए लेबर कोड के नियम से भी सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव हो रहा है. आइए आसान भाषा में डिटेल में समझते हैं कि आपकी सैलरी पर क्या-क्या असर पड़ेगा?
बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल खर्च पर राहत
बच्चों के एजुकेशन अलाउंस (Education Allowance) में बढ़ा इजाफा किया गया है. पहले यह एक बच्चे के लिए 100 रुपये महीना होता था. लेकिन अब यह बढ़कर 3,000 रुपये हो गया है. इसी तरह हॉस्टल अलाउंस को 300 रुपये महीना से बढ़ाकर 9,000 रुपये कर दिया गया है. अगर आपके दो बच्चे हैं तो इस छूट से आपको अच्छी टैक्स बचत हो सकती है. इस छूट से ओल्ड टैक्स रिजीम वालों की टैक्सेबल इनकम कम हो जाएगी.
HRA पर इन शहरों में क्लेम कर सकेंगे 50% किराया
पहले एचआरए (HRA) की 50% छूट केवल चार बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में मिलती थी. अब इन शहरों को बढ़ाकर आठ कर दिया गया है. यह छूट अब अहमदाबाद, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे में रहने वालों को भी मिलेगी. इन शहरों में बेसिक सैलरी का 50% तक HRA क्लेम कर सकेंगे. बाकी शहरों में पहले की तरह 40% ही रहेगा. इससे भी ओल्ड टैक्स रिजीम वालों को फायदा मिलेगा और उनकी टैक्सेबल सैलरी कम हो जाएगी.
मील कार्ड और खाने-पीने पर ज्यादा छूट
कंपनी की तरफ से यदि आपको फ्री खाना या नॉन-अल्कोहलिक ड्रिंक दी जाती है तो अब यह छूट भी बढ़ गई है. पहले हर मील पर महज 50 रुपये टैक्स फ्री थे. लेकिन अब यह बढ़कर 200 रुपये हो गया है. इस छूट को भी ओल्ड टैक्स रिजीम में शामिल किया गया है. यदि आप महीने में 22 दिन काम करते हैं तो साल भर में इस छूट से करीब एक लाख रुपये तक की टैक्स सेविंग हो सकती है.
गिफ्ट कार्ड और कूपन पर ज्यादा छूट
कंपनी की तरफ से दिये जाने वाले गिफ्ट कार्ड, गिफ्ट सर्टिफिकेट या कूपन पर भी छूट बढ़ गई है. नए नियम के तहत ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत 15,000 रुपये तक की राशि टैक्स फ्री रहेगी. पहले यह लिमिट कम थी. त्योहारों या खास मौकों पर कंपनी की तरफ से जो गिफ्ट दिये जाते हैं, उस पर अब ज्यादा फायदा हो सकता है.
कंपनी से सस्ता या बिना ब्याज लोन पर अब टैक्स
यदि आपकी कंपनी आपको बिना ब्याज या मार्केट रेट से कम दर पर लोन देती है तो अब उस पर टैक्स लगेगा. टैक्स की कैलकुलेशन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के लेंडिंग रेट और असल ब्याज दर के अंतर पर होगी. लेकिन इसमें कुछ अपवाद भी हैं, 2 लाख रुपये से कम का लोन और मेडिकल इमरजेंसी के लिए लिया गया लोन टैक्स फ्री रहेगा. पहले छोटे लोन की लिमिट महज 20 हजार रुपये थी, जो कि अब बढ़कर 2 लाख रुपये हो गई है.
कंपनी कार यूज करने पर ज्यादा टैक्स
नए इनकम टैक्स एक्ट के तहत कुछ चीजें महंगी भी हो रही हैं. यदि कंपनी आपको ऑफिस वर्क और पर्सनल यूज दोनों के लिए कार देती है तो उस पर टैक्स बढ़ गया है. 1.6 लीटर इंजन तक की कार पर 8,000 रुपये महीने टैक्सेबल होगा. इससे बड़ी कार पर 10,000 रुपये महीने का टैक्स लगेगा. यह नियम ओल्ड और न्यू टैक्स रिजीम दोनों सिलेक्ट करने वालों पर लागू किया जाएगा. सीए आशीष मिश्रा ने बताया कि यदि आपकी कंपनी 1.8 लीटर इंजन वाली SUV मिक्स यूज के लिए देती है तो टैक्सेबल वैल्यू 2,400 रुपये से बढ़कर 7,000 रुपये महीने हो जाएगी.
शेयर ट्रेडिंग और बायबैक पर नया टैक्स
इक्विटी डेरिवेटिव्स (F&O) ट्रेड करने वालों के लिए सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) बढ़ाया गया है. फ्यूचर्स पर STT 0.02% से बढ़कर 0.05% हो गया. ऑप्शंस पर यह 0.1% से बढ़कर 0.15% हो गया. इसके साथ ही शेयर बायबैक से मिली राशि अब कैपिटल गेन टैक्स के रूप में टैक्सेबल होगी.
कम हो सकती है इन-हैंड सैलरी
टैक्स के अलावा नया लेबर कोड सैलरी पर भी असर डाल रहा है. सरकार के चार नए लेबर कोड में ‘वेजेस’ सेक्शन के तहत कंपनियों को अब सैलरी का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक वेज के रूप में देना जरूरी है. बेसिक सैलरी बढ़ने से पीएफ (PF) कॉन्ट्रीब्यूशन बढ़ जाएगा. इसका नतीजा यह होगा कि इनहैंड सैलरी कम हो सकती है.
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