माता-पिता के लिए गुड न्यूज! प्राइवेट स्कूलों की मनमानी बंद, अब कहीं से भी खरीद सकते हैं किताबें और यूनिफॉर्म

माता-पिता के लिए गुड न्यूज! प्राइवेट स्कूलों की मनमानी बंद, अब कहीं से भी खरीद सकते हैं किताबें और यूनिफॉर्म

अप्रैल की शुरुआत के साथ नई कक्षाओं के लिए एडमिशन और नया सेशन भी शुरू हो जाती हैं. नई कक्षा में जाने पर स्टूडेंट्स को किताबें और यूनिफॉर्म को खरीदना पड़ता है. ऐसे में सबसे ज्यादा जेब पर जोर डालने वाला नियम ये हो जाता है कि स्कूल से ही किताबों को खरीदना होगा. स्कूल के अलावा कहीं और से यूनिफॉर्म नहीं खरीद सकते हैं. ऐसे ही तमाम चीजों को खरीदने का जोर देने वाले प्राइवेट स्कूलों की दुकानों को बंद करने का आदेश जारी हो गया है. दरअसल, 1 अप्रैल, बुधवार को दिल्ली सरकार का बड़ा आदेश ये रहा कि माता-पिता अपनी मर्जी से किसी भी दुकान से स्कूल की किताबें और यूनिफॉर्म को खरीद सकते हैं. प्राइवेट स्कूल की दुकानों से ही खरीदना है, ऐसी मनमानी पर रोक लगाने वाला आदेश जारी किया गया है. माता-पिता के लिए ये राहत भरा ऐलान किया गया है. स्टूडेंट्स अपनी मर्जी से किताबें और यूनिफॉर्म खरीद सकते हैं. 

मान्यता प्राप्त स्कूलों के लिए आदेश

दिल्ली सरकार ने प्राइवेट अनएडेड मान्यता प्राप्त स्कूलों के लिए एक अहम निर्देश जारी किया है. किसी भी विक्रेता से स्कूल के स्टूडेंट्स या उनके माता-पिता किताबें, स्टेशनरी या यूनिफॉर्म आदि खरीद सकते हैं और इसे स्कूल से ही खरीदने के लिए स्कूल प्रशासन मजबूर नहीं कर सकता है. शिक्षा निदेशालय द्वारा प्राइवेट स्कूलों को ये आदेश इस वजह से दिया गया है कि पेरेंट्स अपनी सुविधा और बजट के अनुसार स्कूल संबंधित खरीदारी कर सकें.

शिक्षा निदेशालय के क्या-क्या निर्देश?

स्कूल अपने यहां से ही किताबें-यूनिफॉर्म खरीदने जैसे आदेश लागू नहीं कर सकते है. स्कूलों को किताब-यूनिफॉर्म आदि चीजों की रेट लिस्ट अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर देनी चाहिए जिससे सभी इसे आसानी से देख सकें और अपनी जेब के अनुसार जहां उन्हें कीमत सही लगे वहां से खरीद सके. किताबें और सिलेबस CBSE, ICSE, State Board या शिक्षा अधिकारियों के निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार होना चाहिए. ऐसे में किसी भी दुकान से माता-पिता के लिए किताबों को लेना आसान हो सके.

क्यों जरूरी था ये आदेश?

दरअसल, कुछ माता-पिता और संगठनों की ओर से कई बार शिकायतें की जा चुकी है कि कुछ स्कूलों में मनमानी चलती है. स्कूल द्वारा दो गुणा रेट या अधिक कीमतों में किताबें, नोटबुक, यूनिफॉर्म, बेल्ट, बैग, टाई को बेचा जाता है और स्कूल या सिर्फ नामित दुकानों से ही खरीदना है, इसे लेकर मजबूर करते हैं. ऐसे में माता-पिता पर ज्यादा आर्थिक दबाव पड़ता था. हालांकि, इस आदेश के बाद दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों द्वारा अपनी ही दुकान या किसी नामित दुकान से सामानों को खरीदने का जोर नहीं दिया जा सकेगा.

Bureau Report

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