पश्चिम बंगाल के बाद ‘दल-बदल की हवा’ अब महाराष्ट्र पहुंच गई है. इस बार लपेटे में आ रहे हैं उद्धव ठाकरे. बीते कुछ दिनों से महाराष्ट्र में अटकलें लग रही हैं ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत उद्धव गुट के 7 सांसद बागी हो सकते हैं. खतरे को भांपते हुए उद्धव ने मातोश्री में अपने सभी 9 सांसदों की बैठक बुलाई, जिसमें सिर्फ 4 पहुंचे. दावा है कि उद्धव ने इस बैठक में भावुक होते हुए कहा कि जिसे जाना है, वो जाए. आज भले मेरा समय नहीं है, लेकिन कल जरूर होगा. बाला साहेब ठाकरे की शिवसेना छोड़ने पर उन्हें बाद में पछतावा जरूर होगा. इधर हर गुट अपने-अपने दावे कर रहा है.
सियासी सरगर्मी के बीच शिवसेना (उद्धव गुट) नेता संजय राउत ने कहा कि सभी सांसद बैठक में शामिल हुए थे. जो लोग दूर थे, वे ऑनलाइन माध्यम से जुड़े. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भी ऑनलाइन बैठकों को लेकर निर्देश दिए हैं. राउत ने कहा कि क्या आपने मुझे कभी लोकसभा अध्यक्ष या ऐसे लोगों से मिलने जाते देखा है? जो लोग संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन नहीं करते, उनसे मैं नहीं मिलूंगा.
राउत ने स्पष्ट किया कि सांसदों की बैठक में वह पूरे समय मौजूद थे और बैठक के दौरान सांसदों ने सीधे उद्धव ठाकरे से संवाद किया. राउत ने साफ किया कि उद्धव ठाकरे ने कभी भी ‘जिसे जाना है, वह चला जाए’ जैसा कोई बयान नहीं दिया. यह खबर पूरी तरह गलत है.
उन्होंने कहा कि भाजपा और उसके नेताओं के पास अब कोई काम नहीं बचा है. मोदी, अमित शाह और फडणवीस के नेतृत्व वाली भाजपा की विश्वसनीयता क्या बची है? उन्होंने आरोप लगाया कि वे पैसे देकर पार्टियां तोड़ रहे हैं. यही उनकी राजनीति है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग दिल्ली के ‘घरगड़ी’ (सेवक) बनकर काम कर रहे हैं और भाजपा लगातार दल-बदल की राजनीति कर रही है. सांसदों के पार्टी छोड़ने की अटकलों पर राउत ने कहा कि बैठक में सांसदों ने अपनी मां, बच्चों, साई बाबा और तुलजा भवानी की शपथ लेकर कहा कि वे पार्टी नहीं छोड़ेंगे.
‘ऑपरेशन टाइगर’ के सवाल पर राउत ने कहा कि ऑपरेशन अस्पताल में होता है. यहां सिर्फ ऑपरेशन की चर्चा चल रही है. इसे फोड़ा-फोड़, खरीद-फरोख्त और लोगों को खरीदने की राजनीति कहते हैं. उन्होंने कहा कि एनसीपी (शरद पवार) में तृणमूल कांग्रेस के सांसद शामिल हुए हैं, लेकिन शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के बारे में जो खबरें चलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह गलत हैं. वहीं उद्धव गुट के नेता अनिल देसाई ने भी सभी आरोप खारिज करते हुए कहा कि हम सब एकजुट हैं.
उद्धव गुट के इन 6 सांसदों के NDA में शामिल होने की अटकलें!
- संजय देशमुख – यवतमाल-वाशिम
- नरेश पाटिल अष्टीकर – हिंगोली
- संजय जाधव – परभणी
- राजाभाऊ वाजे – नासिक
- भाऊसाहेब वाकचौरे – शिर्डी
- संजय दीना पाटिल – मुंबई (उत्तर-पूर्व)
इधर, शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता संजय निरूपम ने कहा कि उबाठा (UBT) नाम की पार्टी अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है. उबाठा के नेतृत्व पर उनके विधायकों-सांसदों का विश्वास नहीं रहा. 2029 आते-आते पार्टी पूरी तरह खत्म हो जाएगी. रोज उबाठा छोड़कर लोग बाहर निकल रहे हैं. जहां तक बात उनके सांसदों की है, हमारा उससे कोई लेना-देना नहीं है. उनकी पार्टी का यह अंदरूनी विषय है.
शिंदे गुट के MLC कृपाल तुमाने ने दावा किया कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत उद्धव गुट के 7 सांसदों के साथ हमारी बातचीत आखिरी दौर में पहुंच गई है. उन्होंने चुटकी वाले अंदाज में कहा कि जैसे ऑपरेशन के लिए अस्पताल जाने पर पहले जांच होती है और रिपोर्ट आती है, वैसे ही अब बस डॉक्टर के साथ ऑपरेशन की तारीख तय होनी बाकी है. उसी दिन ऑपरेशन होगा. यह मॉनसून सत्र से पहले होगा. हमारे लिए सारी जानकारी बताना ठीक नहीं है, लेकिन यह लगभग तय है कि वे हमारे साथ जुड़ेंगे. यह बातचीत एक महीने से चल रही है, लेकिन आज यह आखिरी दौर में है.
महाराष्ट्र के मंत्री आशीष जायसवाल ने कहा कि शिवसेना UBT में क्या हो रहा है, इस पर टिप्पणी करना मुझे सही नहीं लगता. अगर उन्हें लगता है कि बाला साहेब की विरासत एकनाथ शिंदे के पास है और वे अपने चुनाव क्षेत्र और राजनीतिक भविष्य के लिए कोई फैसला लेते हैं, तो उसके बाद ही इस पर बात करना सही होगा. दल-बदल विरोधी कानून के इतिहास और नियमों को ध्यान में रखते हुए वे क्या करते हैं और उनकी संख्या कितनी है, यह उनका फैसला है.
Bureau Report
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