’15 करोड़ लेकर पार्टी छोड़ने वालों पर क्या फूलों की बारिश करें?’ बागी सांसदों को गाली देने के आरोपों पर संजय राउत का पलटवार

'15 करोड़ लेकर पार्टी छोड़ने वालों पर क्या फूलों की बारिश करें?' बागी सांसदों को गाली देने के आरोपों पर संजय राउत का पलटवार

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बागी सांसदों के खिलाफ इस्तेमाल की गई ‘गाली’ का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल छोड़ने वाले नेताओं के लिए उन्होंने जो शब्द इस्तेमाल किए, वे मराठी राजनीतिक और सामाजिक संवाद में सामान्य तौर पर बोले जाते हैं और उनका संदर्भ समझना जरूरी है. हालांकि ये कोई पहला मौका नहीं है जब संजय राउत ने इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया हो. इसके पहले साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने पीएम मोदी की तुलना औरंगजेब से करते हुए कहा था कि दोनों का जन्मस्थान एक जगह है तभी दोनों की सोच भी एक जैसी है. 

पीएम मोदी ने संजय राउत के इस बयान के बाद कहा था कि ये 104वां अवसर है जब उन्होंने पीएम मोदी को अपशब्द कहे हैं. एक मीडिया बातचीत के दौरान राउत ने कहा कि उन्हें यह अच्छी तरह मालूम है कि किस मंच पर कैसी भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद जैसी संवैधानिक संस्था के भीतर उन्होंने कभी ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया है. उनके इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है. जानिए पूरा मामला, आरोप-प्रत्यारोप और इस विवाद पर संजय राउत की सफाई.

‘सामने वाला जो समझे, वही भाषा बोलनी पड़ती है’

संजय राउत ने कहा कि राजनीति में कई बार ऐसी परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं, जहां लोगों की नाराजगी और भावनाओं को सीधे शब्दों में व्यक्त करना पड़ता है. उनके मुताबिक, बातचीत का तरीका अक्सर इस बात पर निर्भर करता है कि सामने वाला व्यक्ति किस तरह की भाषा और संदेश को समझता है. उन्होंने कहा कि उन्हें यह पता है कि सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है, लेकिन राजनीतिक घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते समय लोग अपनी भावनाएं भी व्यक्त करते हैं.

ऐसे नेताओं पर क्या फूल बरसाएंः संजय राउत

राउत ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने व्यक्तिगत लाभ के लिए राजनीतिक निष्ठा बदल ली. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति कथित तौर पर करोड़ों रुपये लेकर अपनी पार्टी छोड़ देता है, तो उसके प्रति सम्मान या प्रशंसा कैसे दिखाई जा सकती है. उन्होंने कहा, ‘अगर कोई व्यक्ति 15 करोड़ रुपये लेकर पार्टी छोड़ देता है, तो उसके बारे में क्या कहा जाए? क्या ऐसे लोगों पर फूलों की बारिश की जानी चाहिए?’

महाराष्ट्र की राजनीति में जारी है आरोप-प्रत्यारोप

महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन के बाद से राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज रही है. उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लंबे समय से जारी है. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर राजनीतिक सिद्धांतों से समझौता करने और सत्ता के लिए फैसले लेने के आरोप लगाते रहे हैं. संजय राउत का यह बयान भी ऐसे समय आया है जब राज्य की राजनीति में दल-बदल, राजनीतिक वफादारी और जनादेश के मुद्दों पर बहस फिर से तेज हो गई है.

Bureau Report

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