कार में E20 के बाद घर की रसोई में LPG सिलेंडर की भी जगह लेगा इथेनॉल? सरकार बना रही नया प्लान, नफा-नुकसान समझिए

कार में E20 के बाद घर की रसोई में LPG सिलेंडर की भी जगह लेगा इथेनॉल? सरकार बना रही नया प्लान, नफा-नुकसान समझिए

पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट का विवाद शांत नहीं हो रहा है. गाड़ियों की माइलेज गिरने से लेकर इंजन में खराबी की शिकायतों के बाद से सरकार के फैसले पर लोग नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब खबर आ रही है कि जल्द ही इथेनॉल आपकी रसोई तक पहुंच सकता है.

E20 पेट्रोल से लोग नाराज है. लेकिन उनकी नाराजगी के बावजूद अपने फैसले पर अड़ी हुई है. ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की दलील देते हुए सरकार ने E20 को अनिवार्य कर दिया है. अब ये इथेनॉल आपकी गाड़ी से होते हुए रसोई गैस तक पहुंचने की तैयारी कर रही है.  

किचन में पहुंचने वाला है इथेनॉल ?  

सरकार इथेनॉल को खाना पकाने के मुख्य ईंधन के तौर पर लाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय फ्रेमवर्क लाने की तैयारी कर रही है. अगर ऐसा हो जाता है, तो LPG पर सरकार की निर्भरता कम होती. भारत LPG के लिए आयात पर निर्भर है. कुल एलपीजी (LPG) खपत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है. हर साल 28 से 30 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी की खपत होती है, जिसमें से 18 से 20 मिलियन मीट्रिक टन कतर, कुवैत, सऊदी अरब जैसे मिडिल ईस्ट देशों से इंपोर्ट किया जाता है.  सरकार LPG पर निर्भरता कम करने और आयात बिल में बड़ी बचत करने के लिए रसोई में एलपीजी की भागीदार कर इसे इथेनॉल से रिप्लेस करने की तैयारी में है.  

तो क्या इथेनॉल गैस पर बनेगा खाना?  

इकोनॉमिक्स टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में अधिकारी का नाम ना छापने की सत्र पर लिखा है कि सरकार रसोई गैस में क्लीन फ्यूल पॉलिसी पर विचार कर रही है, जिसमें LPG के साथ-साथ इथेनॉल को भी शामिल करने की तैयारी की जा रही है.  रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2026 तक ये पॉलिसी और फ्रेमवर्क तैयार हो जाएगा.  इस पॉलिसी का मकसद  इथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर बोझ को कम करना है.  

क्या और कितना होगा फायदा ?  

E20 पेट्रोल लॉन्च करने के बाद सरकार ने दावा किया कि विदेशी मुद्रा में भारी बचत हुई, कच्चे तेल का आयात कम हुआ. पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक साल 2014-15 से लेकर मई 2026 तक, पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण की वजह से भारत ने 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक विदेशी मुद्रा की बचत की है. इस दौरान कच्चे तेल के आयात में करीब 310 लाख मीट्रिक टन कमी आई है.  पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग के बाद किचन में इसके इस्तेमाल पर जोर देकर सरकार LPG आयात पर निर्भरता कम करना चाहती है.    

क्यों सरकार दे रही है इथेनॉल पर जोर, नफा-नुकसान समझिए

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट ने अपनी रिपोर्ट ‘इंडियाज क्लीन कुकिंग शिफ्ट: स्केलिंग नॉन-फॉसिल फ्यूल सॉल्यूशंस’ में दावा किया है कि  भारत ई-कुकिंग और बायोगैस का इस्तेमाल बढ़ाकर साल 2050 तक LPG सब्सिडी में कुल मिलाकर 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की सेविंग कर सकता है. ऐसे में सरकार इस ग्रीन गैस को बढ़ावा देने की तैयारी में है.  इसके इस्तेमाल से लोगों के पास वैकल्पिक स्वच्छ ईधन का विकल्प होगा.  हालांकि ये कहना जल्दीबाजी होगी कि इथनॉल पूरी तरह से LPG गैस की जगह ले लेगा. शुरुआती चरण में इसे वैकल्पिक ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी  सफलता इसके दाम, इसकी सुरक्षा और उपभोक्ताओं की ओर से इसकी स्वीकृति पर निर्भर करेगी. 

भारत के पास पर्याप्त इथेनॉल 

गन्ने, चावल, अनाज आदि से तैयार होने वाला इथेनॉल भारत की ताकत बन सकता है. भारत के पास पर्याप्त इथेनॉल सप्लाई है. भारत के पास 700 करोड़ लीटर इथेनॉल का सरप्लस है. ऐसे में सरकार रसोई गैस में इसके इस्तेमाल को विकल्प के तौर पर देख रही है.  इसे बढ़ावा देने के लिए  सब्सिडी स्कीम भी शुरू कर सकती है. CareEdge Ratings ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत की इथेनॉल प्रोडक्शन क्षमता सालाना 20 बिलियन लीटर से ज्यादा हो गई है और मौजूदा वित्तीय वर्ष में इसमें 4 बिलियन लीटर का और इजाफा हो सकता है. ऐसे में सरकार इथेनॉल को बढ़ावा देकर इसके इस्तेमाल को प्रोस्ताहित और एलपीजी गैस पर निर्भरता को कम करना चाहती है. 

Bureau Report

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*