इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य को एक बड़ी कानूनी राहत दी है. उपाध्याय समुदाय और चारों शंकराचार्यों को लेकर की गई उनकी कथित विवादास्पद टिप्पणी मामले में स्वामी रामभद्राचार्य के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग वाली याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है.जस्टिस चंद्र धारी सिंह और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की पीठ ने यह फैसला अधिवक्ता रमेश उपाध्याय द्वारा दाखिल क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया.
क्या था पूरा मामला?
याची का दावा- अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने याचिका दाखिल कर कहा था कि वह उपाध्याय समुदाय से संबंध रखते हैं. याचिका में आरोप लगाया गया था कि स्वामी रामभद्राचार्य ने उपाध्याय समुदाय को नीच/हीन बताया और चारों शंकराचार्यों को फर्जी कहा, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इससे उन्हें और पूरे समुदाय को गंभीर मानसिक पीड़ा और अपमान झेलना पड़ा.
पुलिस पर प्रभाव का आरोप
याची के अनुसार, उन्होंने 8 अक्टूबर 2025 को वाराणसी पुलिस से एफआईआर दर्ज करने की शिकायत की थी, लेकिन रामभद्राचार्य के प्रभाव के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई.
राज्य सरकार और हाईकोर्ट का रुख
सरकारी वकील का विरोध: राज्य सरकार के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याची ने संबंधित थाने में संपर्क नहीं किया और ना ही मजिस्ट्रेट के समक्ष बीएनएस (BNSS) की धारा 175(3) के तहत आवेदन दिया. वे सीधे हाईकोर्ट आ गए.
हाईकोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने कहा कि एफआईआर दर्ज न होने की स्थिति में सीधे अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट आने के बजाय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया (मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन) का पालन किया जाना चाहिए. प्रक्रिया को बाइपास कर सीधे हाईकोर्ट आना योग्यताहीन (Devoid of merit) है.
आगे का विकल्प
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए याची को नियमानुसार मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करने और उसके बाद उचित कानूनी रास्ता अपनाने की छूट दी है.
Bureau Report
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