Haryana Civic Polls Result: BJP की जीत…सैनी का वर्चस्व व मंत्रियों की बढ़ी साख, बड़ौली की कुर्सी पर खतरा टला

Haryana Civic Polls Result: BJP की जीत...सैनी का वर्चस्व व मंत्रियों की बढ़ी साख, बड़ौली की कुर्सी पर खतरा टला

विधानसभा चुनाव के पांच महीने के बाद हुए निकाय चुनाव में एकतरफा जीत से भाजपा की हरियाणा में जड़ें और मजबूत हो गई हैं। भाजपा माइक्रो मैनेजमेंट, आक्रामक प्रचार शैली, प्रदेश व केंद्र में अपनी सरकार होने को भुनाकर और बागियों से किनारा करके निकाय चुनाव में बाजी मार गई। 

इस जीत ने जहां मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का वर्चस्व और मंत्रियों की साख बढ़ाई है। साथ ही, प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली की कुर्सी पर खतरा कम किया है। भाजपा ने विधानसभा की तर्ज पर पूरा निकाय चुनाव लड़ा। 

हर मंत्री को जिम्मेदारी सौंपी। विधानसभा चुनाव हारे उम्मीदवारों की भी ड्यूटियां लगाई। इसका फायदा पार्टी को मिला। सबसे अहम भूमिका सीएम नायब सिंह सैनी की रही, जिन्होंने चुनाव की कमान खुद संभाल रखी थी। 

गुटबाजी न हो, इसके लिए मतभेद वाले नेताओं को एक निकाय की जिम्मेदारी सौंपी। वहीं, विधानसभा चुनाव में हारे उम्मीदवारों का अनुभव बेकार न जाए और उनका मनोबल ऊंचा बना रहे, इसके लिए उन्हें भी निकाय में प्रबंधन और चुनाव समिति की जिम्मेदारी सौंपी गई। 

उधर, संगठन के स्तर पर भी लगातार बैठकें और समीक्षा होती रही, जिससे सभी कार्यकर्ता सक्रिय रहे। पांच स्तर पर चुनाव प्रबंधन किया गया। संगठन की टीम ने हर घर तक पहुंचने का प्रयास किया। वार्ड स्तर पर भी छोटी टीमें बनाई गईं जो छोटे-छोटे समूहों में लोगों से बात करती रही।

अलग प्रबंधन था मेयर चुनाव के लिए
मेयर चुनाव के लिए अलग प्रबंधन था। जिला स्तर के शीर्ष नेताओं को इसका जिम्मा दिया गया। विधानसभा चुनाव में बगावत करने वालों से दूरी बनाए रखी ताकि दूसरे नेता नाराज न हों। इस बार किसी ने बगावत की हिम्मत नहीं की। 

सैनी ने 38 में से 30 से ज्यादा निकायों में किया प्रचार 
सीएम सैनी ने निकाय चुनाव में भाजपा की तरफ से प्रचार की कमान संभाल रखी थी। उन्होंने 21 फरवरी से प्रचार शुरू किया था और 28 फरवरी तक 38 में से 30 निकायों में जाकर रोड शो, रैलियां और जनसभा को संबोधित किया। हर निकाय में खुद को उस क्षेत्र का कभी बेटा, कभी विधायक तो कभी भाई के तौर पर पेश किया और विकास की गारंटी ली। इससे भी जनता के बीच भाजपा के पक्ष में माहौल बना। 

प्रदेश अध्यक्ष को भी मिली संजीवनी 
निकाय चुनाव से पहले जब प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली पर सामूहिक दुष्कर्म के गंभीर आरोप लगे तो इससे उनकी कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा था। मगर इसी बीच निकाय चुनाव की घोषणा कर दी गई। पार्टी उनकी कुर्सी पर निकाय चुनाव के बाद फैसला लेने वाली थी। मगर इस जीत ने उनका भी कद बढ़ा दिया है। उनके नेतृत्व में ही संगठन ने रणनीति तय की। चुनाव से पहले उनके नेतृत्व ने पार्टी ने करीब 45 लाख सदस्य भी बनाए थे, जिसका लाभ भी चुनाव में मिला है। ऐसे में अब उनकी कुर्सी पर से खतरा टला है। 

पार्टी का ट्रिपल इंजन का नारा काम कर गया 
भाजपा ने चुनाव में ट्रिपल इंजन का नारा दिया था, जो काम कर गया। दरअसल अब लोग समझ चुके हैं कि स्थानीय स्तर पर समस्या का समाधान तभी होगा, जब राज्य और निकाय में एक ही पार्टी की सरकार हो। अलग-अलग दलों की सत्ता होने से लोग पिसते रहेंगे। प्रदेश में सरकार होने का फायदा मिला।

Bureau Report

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