Movie Review: जाट
कलाकार: सनी देओल , रेजिना कसांड्रा , रणदीप हुड्डा , विनीत कुमार सिंह , संयमी खेर , राम्या कृष्णन , जगपति बाबू , बबलू पृथ्वीराज , उपेंद्र लिमये और जरीना वहाब आदि
लेखक: गोपीचंद मलिनेनी , साई माधव बुर्रा और सौरभ गुप्ता
निर्देशक: गोपीचंद मलिनेनी
निर्माता: नवीन येरनेनी , यलंमचिली रवि शंकर , टी जी विश्व प्रसाद और उमेश कुमार बंसल
स्टूडियोज: मैत्री मूवी मेकर्स, पीपल मीडिया फैक्ट्री, जी स्टूडियोज
रिलीज: 10 अप्रैल 2025
रेटिंग: 2.5/5
सनी देओल की फिल्म हो, और मुंबई में भी उसका प्रेस शो न हो तो फिल्म कारोबार पर नजर रखने वालों का चौंकना लाजिमी है। जो लोग फिल्म के बीती रात प्रीमियर का न्यौता पाए, उनसे भी विनती की गई कि रिव्यू सुबह सुबह मत लिख दीजिएगा। लोगों को लगा कि फिल्म वाकई बहुत खराब बनी होगी, लेकिन एक्शन फिल्मों के शौकीन लोगों के लिए खुशखबरी ये है कि ये फिल्म ‘सिकंदर’ जितनी बुरी नहीं है। हां, ‘जवान’ जितनी अच्छी भी नहीं है क्योंकि सनी देओल के पास न दीपिका पादुकोण हैं और न ही नयनतारा। इन दोनों के बीच डोलती फिल्म है ‘जाट’। मूल आत्मा शाहरुख खान की फिल्म ‘जवान’ की है। वर्दी की शान पर फिदा रहा एक अफसर सादे कपड़ों में भ्रष्टाचार मिटाने निकला है। हाथ में जो आता है, उसे ही हथियार बना लेता है। इज्जत गंवाने वाली युवतियों को वह बहन बनाता है। धरती के लिए गिड़गिड़ाती बुजुर्ग महिला को मां बनाता है। और, वादा करता है कि संभवामि युगे युगे…!
निर्देशक ने स्कूल में नहीं पढ़ी नागरिक शास्त्र
फिल्म के निर्देशक गोपीचंद मलिनेनी ने अगर अपनी पढ़ाई 12वीं में ही छोड़ न दी होती तो सनी देओल की फिल्म ‘जाट’ भी शाहरुख खान की ‘जवान’ जैसी सुपरहिट फिल्म बन सकती थी। गोपीचंद ने शायद सातवीं, आठवीं में भी नागरिक शास्त्र ठीक से नहीं पढ़ा। भारत में अभी संघीय व्यवस्था उस तरह लागू नहीं है जैसी कि अमेरिका में हैं। अपने राष्ट्रपति को अब भी किसी राज्य में कुछ करवाना हो तो केंद्रीय गृह मंत्रालय के जरिये ही करवाना होता है। और, सीबीआई की भी अपनी सीमाएं है। वह ईडी नहीं है कि जहां चाहे वहां छापा मार दे। फिल्म ‘जाट’ की कहानी उस दौर की लगती है जब मनमोहन देसाई की फिल्मों में तीन हीरो एक दुखिया को ‘डायरेक्ट’ अपना खून दे दिया करते थे और क्लाइमेक्स अपना नाम ले लेकर गाना भी गा देते थे, लेकिन मजाल कि दर्शकों को इससे कोई शिकायत हो। उन दिनों भारत की साक्षरता दर करीब 35 प्रतिशत थी जो अब ग्रामीण इलाकों तक में ये दर 75 प्रतिशत के करीब पहुंच चुकी है। आंध्र प्रदेश के दो दर्जन तटीय गांवों में लंका से आए और प्रभाकरण जैसे दिखते एक उग्रवादी के लेफ्टिनेंट रहे आतंकी ने स्थानीय नागरिकता हासिल कर गदर काट रखा है। पुलिस उसके चंगुल में हैं। नेताओं का उस पर आशीर्वाद है। और, ये सब वह कर रहा है एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को मदद पहुंचाने के लिए। न कोई न्यूज चैनल इसे देख पा रहा है और सोशल मीडिया पर डाला गया वीडियो भी सीधे उन्हीं को दिखता है जिनके खिलाफ ये बना है!
इंटरवल से पहले सिर्फ ‘सॉरी बोल’
फिल्म ‘जाट’ की कहानी 50 साल पुराने भारत में गढ़ी गई लगती है। नए भारत का इससे कोई लेना देना नहीं सिवाय इसके कि आंध्र प्रदेश के गांव से चला एक कोरियर 24 घंटे में दिल्ली पहुंच जाता है। स्पीड पोस्ट अब भी इस देश में पहुंचने में तीन-चार दिन लगाती है। हां, राष्ट्रपति के सामने जो पैकेट पहुंचा है उसमें एक बच्ची की चिट्ठी है, जो मदद मांग रही है। राष्ट्रपति के आदेश पर मौके पर जांच करने जब तक सीबीआई अफसर पहुंचे, उस बीच अयोध्या से लौट रही ट्रेन में सफर कर रहा एक ढाई किलो के हाथ वाला जाट बदमाशों की सिर्फ इसलिए धुलाई करता रहता है कि उन्होंने उसकी इडली की प्लेट गिराकर ‘सॉरी’ नहीं बोला। आधी पिक्चर इस ‘सॉरी बोल’ पुराण में गुजर जाती है। इंटरवल के बाद निर्देशक को याद आता है कि फिल्म में एक कहानी भी होनी चाहिए, एक डांस आइटम भी होना चाहिए और जाट जातिसूचक न लगे तो हीरो की एक फ्लैशबैक स्टोरी भी होनी चाहिए। बस फिल्म यहीं लड़खड़ा जाती है। ‘बेबी जॉन’ का कोई गाना आपको याद आ रहा हो तो याद रखिए कि उस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्ट थमन एस ने ही ‘जाट’ का भी म्यूजिक दिया है, नहीं याद आ रहा तो कोई बात नहीं, याद इस फिल्म का भी कोई गाना आपको नहीं रहने वाला।
इसलिए फिल्म पर लगा बी ग्रेड का ठप्पा
‘पुष्पा’ फ्रेंचाइजी बनाने वाली कंपनी मैत्री मूवी मेकर्स ने जो सोचकर इस फिल्म में पैसा लगाया होगा, उस सोच के हिसाब से वह मुनाफा कमा चुके ही होंगे। फिल्म के ओटीटी राइट्स नेटफ्लिक्स खरीद चुका है। बाकी सैटेलाइट और म्यूजिक राइट्स वगैरह जी स्टूडियोज ने इसमें अपनी पत्ती लगाकर खरीद लिए हैं। फंसेंगे इसमें पीपल मीडिया फैक्ट्री वाले क्योंकि ‘पीपल’ अगर ये फिल्म देखने उतनी तादाद में नहीं आए, जितनी तादाद में इसके शोज रखे गए हैं तो मुश्किल होगी। सनी देओल की ये पहली फिल्म है जो एक साथ साढ़े तीन हजार से ऊपर स्क्रीन्स में रिलीज हुई है। कोई सौ करोड़ रुपये में बनी इस फिल्म की ओपनिंग अगर 20 करोड़ के ऊपर हो गई तो ही इसकी नैया पार लगेगी, लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा। इसमें थोड़ा योगदान उर्वशी रौतेला का भी रहेगा, जिनके आइटम सॉन्ग ने एक अच्छी खासी ए लिस्टर फिल्म को बी ग्रेड जैसी मूवी बना दिया। सनी देओल जैसे अच्छे खासे ब्रांड का बेड़ा गर्क करना इसी को कहते हैं। उर्वशी रौतेला पर फिल्माया गया ये आइटम नंबर फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी है।
सनी देओल, स्लो मोशन और एक्शन दर एक्शन
67 साल के हो चुके सनी देओल को बार बार स्लो मोशन में दिखाना फिल्म निर्देशक की मजबूरी है या वाकई सनी देओल एक बार में सौ कदम सीधे नहीं चल सकते, ये गोपीचंद मलिनेनी ही बता सकते हैं। लेकिन, अगर पूरी फिल्म से स्लो मोशन के शॉट्स निकाल दिए जाएं तो ये फिल्म 90 मिनट की बढ़िया एक्शन फिल्म बन सकती है। कुल मिलाकर इसमें चार एक्शन डायरेक्टर है। साउथ वाले राम लक्ष्मण हैं, पीटर हाइन भी हैं और सबने मिलकर आपस में फिल्म के कोई दो दर्जन एक्शन सीक्वेंस में से छह-छह बांट लिए दिखते हैं। अब इस फिल्म में कहानी बस इन सारे एक्शन सीन्स को जोड़ने के लिए चाहिए और ये कहानी चूंकि शीर्षासन की तरह खुलती चलती है लिहाजा दर्शकों के मन में तनाव बढ़ते रहना लाजिमी है। दर्शक सनी देओल की एंट्री आदि पर तालियां बजाएंगे या नहीं तो इसका इंताम निर्देशक ने खुद कर रखा है। ऐसे सीन्स के लिए कहीं उपेंद्र लिमये तमाशा सजाते हैं तो कहीं हीरो के आने से आती बहार से डरे सहमे पुलिस वाले। उनके किरदार की बैकस्टोरी बहुत हास्यापद है। पंजाब से साउथ घूमने निकले किसान को साउथ में लोगों के हाथों से छिनती जमीन देखकर आया गुस्सा ज्यादा तार्किक कहानी होती।
रेजिना कसांड्रा के रंग रूप का जमा रंग
फिल्म में सनी देओल के बाद सबसे शानदार काम जिस कलाकार ने किया है, वह हैं रेजिना कसांड्रा। वह डॉन वाले शाहरुख खान की जंगली बिल्ली जैसी हैं। राणातुंगा की पत्नी बनी हैं। खास मौकों पर शायद तमिल में ही अपने संवाद बोलती हैं, इनका अनुवाद भी परदे पर सब टाइटल्स के तौर पर नहीं आता। इतनी बला की खूबसूरत महिला का किरदार खराब करने में भी फिल्म बनाने वालों ने कोर कसर नहीं छोड़ी। वह अपने घर में घुसी महिला पुलिस कर्मियों को अपने पति के गुंडों से बलात्कार कराती है! और, पति उसका तमिल है लेकिन हिंदी फर्राटेदार बोलता है। कहीं कोई साउथ इफेक्ट नहीं। देवर विनीत कुमार सिंह बने हैं। मेन विलेन के बेस्ट साइड किक का उनका किरदार पूरी फिल्म में कोई खास असर छोड़ता नहीं है। उनके किरदार की वैल्यू थाने में लटकी 30 लाशों में बस एक गिनती और है। जगपति बाबू, मुरली शर्मा, बबलू पृथ्वीराज, मुश्ताक शेख और राम्या कृष्णन जैसे नाम भी यहां बस गिनती बढाने के लिए ही हैं। हां, रणदीप हुड्डा भी हैं, क्यों हैं? सनी देओल के कहने पर..! पता है ना?
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