अच्छी खबर: गुजरात में पांच वर्षों में शेरों की संख्या 674 से बढ़कर 891 हुई, अब 11 जिलों में फैले एशियाई शेर

अच्छी खबर: गुजरात में पांच वर्षों में शेरों की संख्या 674 से बढ़कर 891 हुई, अब 11 जिलों में फैले एशियाई शेर

गुजरात में एशियाई शेरों की संख्या में बीते पांच वर्षों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मई 2024 में कराए गए ताजा शेर जनगणना के अनुसार, अब राज्य में शेरों की संख्या 891 हो गई है, जो कि 2020 में 674 थी। यानी शेरों की संख्या में 217 का इजाफा हुआ है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब शेर सिर्फ गिर के जंगलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे सौराष्ट्र क्षेत्र के 11 जिलों में फैले हुए हैं, जिनमें जंगलों के अलावा तटीय और गैर-जंगल इलाके भी शामिल हैं।

जनगणना के आंकड़ों की झलक

  • कुल शेर: 891
  • 2020 में शेरों की संख्या: 674
  • वृद्धि: 217
  • नर शेर: 196
  • मादा शेर: 330
  • युवा शेर: 140
  • शावक: 225

अब गिर से बाहर भी बसे शेर
गुजरात के वन विभाग के प्रमुख चीफ कंजर्वेटर जयपाल सिंह ने बताया कि गिर नेशनल पार्क और वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में 384 शेर पाए गए, जबकि 507 शेर पार्क के बाहर के इलाकों में गिने गए। इसका मतलब है कि अब शेरों की संख्या गिर के बाहर तेजी से बढ़ रही है।

शेरों को अब सौराष्ट्र के इन 11 जिलों में देखा गया

  1. जूनागढ़
  2. गिर सोमनाथ
  3. भावनगर
  4. राजकोट
  5. मोरबी
  6. सुरेंद्रनगर
  7. देवभूमि द्वारका
  8. जामनगर
  9. अमरेली
  10. पोरबंदर
  11. बोटाद

इन संरक्षित क्षेत्रों में भी दिखे शेर
गिर के अलावा, शेर इन संरक्षित क्षेत्रों और जंगलों में भी देखे गए।

  • पानिया सैंक्चुरी
  • मितियाला सैंक्चुरी
  • गिरनार रिजर्व
  • बारडा सैंक्चुरी (यहां 17 शेर गिने गए, पोरबंदर से 15 किमी दूर)

इसके अलावा कुछ शेर तटीय क्षेत्रों और खुले मैदानी इलाकों में भी देखे गए। भावनगर जिले में एक झुंड (प्राइड) में सबसे ज्यादा 17 शेर पाए गए।

कैसे हुई यह जनगणना?
यह 16वीं एशियाई शेर जनगणना थी। इसे 10 से 13 मई के बीच किया गया। इसका क्षेत्रफल 35,000 वर्ग किलोमीटर था, जिसमें 11 जिलों के 58 तालुका कवर किए गए। इसमें करीब 3,000 स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया- जिनमें वन विभाग के अधिकारी, जोनल इंचार्ज, गिनतीकर्ता और निरीक्षक शामिल थे।

नया तरीका: ‘डायरेक्ट बीट वेरिफिकेशन’
इस बार जनगणना एक नई और अधिक सटीक पद्धति से की गई जिसे कहा जाता है। ‘प्रत्यक्ष बीट सत्यापन’ इसमें हर शेर के देखे जाने का समय, दिशा, लिंग, उम्र, शारीरिक निशान, और जीपीएस लोकेशन रिकॉर्ड की गई। इसके साथ ही हाई-टेक तकनीकों का इस्तेमाल हुआ जैसे- कैमरा ट्रैप्स, हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे, रेडियो कॉलर – इस तरीके से लगभग 100% सटीकता और शून्य गलती का दावा किया गया है।

जनसंख्या बढ़ने के क्या मायने हैं?
यह अच्छी खबर है कि एशियाई शेरों की संख्या में इजाफा हो रहा है, क्योंकि ये दुनिया में केवल गुजरात के गिर क्षेत्र में ही पाए जाते हैं। शेरों का नए इलाकों में फैलना उनके लिए सुरक्षित जगहों की जरूरत को दिखाता है। वन विभाग को अब उन नए क्षेत्रों में भी शेरों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के उपाय करने होंगे। वहीं शेरों की बढ़ती संख्या से यह भी साबित होता है कि वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से शेरों की सुरक्षा में बड़ी सफलता मिली है। लेकिन साथ ही, अब चुनौती यह है कि बढ़ती आबादी को देखते हुए उनके लिए नई सुरक्षित जगहों, खाद्य स्रोतों, और प्राकृतिक आवास की व्यवस्था की जाए ताकि शेरों और इंसानों के बीच किसी भी तरह का संघर्ष न हो।

Bureau Report

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*