मुंबई: ‘कांटा लगा’ फेम अभिनेत्री शेफाली जरीवाला की अचानक कार्डियक अरेस्ट से मौत ने एक बार फिर सभी को झकझोर कर रख दिया है। शेफाली न सिर्फ युवा थीं, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति सजग और फिटनेस को लेकर जागरूक भी मानी जाती थीं। ऐसे में एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि आख़िर देश में युवा और फिट लोगों को अचानक हार्ट अटैक क्यों हो रहा है?
पिछले कुछ वर्षों में यह एक खतरनाक ट्रेंड बन गया है 25 से 45 वर्ष की आयु के स्वस्थ और सक्रिय युवा अचानक दिल का दौरा पड़ने से जान गंवा रहे हैं। जिम करने वाले, दौड़ने वाले, या सोशल मीडिया पर फिटनेस आइकन के रूप में देखे जाने वाले लोग भी अब इस खतरे के दायरे में आ गए हैं।
क्यों हो रहा है ऐसा?
विशेषज्ञ बताते हैं कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:
पोस्ट-कोविड जटिलताएं — जिन्हें अब तक गंभीरता से नहीं लिया गया
कोरोना वैक्सीन लगने के बाद हार्ट अटैक के मामलों में बड़ा इजाफा देखा जा रहा है।
अत्यधिक मानसिक तनाव
ओवर-एक्सरसाइज या बिना मेडिकल गाइडेंस के वर्कआउट
एनर्जी ड्रिंक्स, स्टेरॉयड और डाइट सप्लिमेंट्स का दुरुपयोग
नींद की कमी, अनियमित जीवनशैली
सरकार की चुप्पी चिंता का विषय
इतनी मौतों के बावजूद, सरकार की ओर से इस पर कोई ठोस जन-जागरूकता अभियान, फिटनेस इंडस्ट्री पर निगरानी, या जांच की कोई बड़ी पहल देखने को नहीं मिली है। न ही स्कूल-कॉलेज या वर्कप्लेस में हार्ट स्क्रीनिंग को अनिवार्य करने की कोई नीति सामने आई है।
आम जनता यह सवाल पूछ रही है कि जब यह खतरा इतना व्यापक हो चुका है, तो सरकार की भूमिका केवल ‘संवेदना व्यक्त’ करने तक ही सीमित क्यों है? क्या हमें किसी बड़ी स्वास्थ्य आपदा का इंतजार है?
जरूरत है ठोस कदमों की
सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों को चाहिए कि:
कार्डियक हेल्थ पर राष्ट्रीय स्तर का डेटा और रिसर्च जुटाया जाए
फिटनेस सेंटरों की सख्त निगरानी हो
डाइट सप्लिमेंट्स और स्टेरॉयड की बिक्री पर नियंत्रण लगाया जाए
युवाओं के लिए फ्री हार्ट हेल्थ चेकअप कैम्पेन शुरू किया जाए
शेफाली जरीवाला की मौत एक चेतावनी है – जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह सिर्फ एक सेलिब्रिटी की खबर नहीं, बल्कि हर उस नौजवान के लिए खतरे की घंटी है, जो खुद को पूरी तरह फिट मानता है।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार और समाज इस चेतावनी को गंभीरता से लेंगे?
Bureau Report
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