Thug Life Review: कमल हासन ने अब मणि रत्नम संग बनाई ‘इंडियन 2’, दादी और नानी के कन्फ्यूजन जैसी पूरी फिल्म

Thug Life Review: कमल हासन ने अब मणि रत्नम संग बनाई ‘इंडियन 2’, दादी और नानी के कन्फ्यूजन जैसी पूरी फिल्म

अभी कुछ दिन पहले फिल्म ‘मालिक’ का ट्रेलर रिलीज हुआ। ट्रेलर में एक साइड प्रोफाइल क्लोजअप राजकुमार राव का ठीक वैसा ही है, जैसा फिल्म ‘एनिमल’ में रणबीर कपूर का रहा है। हो सकता है वह गरीब फिल्म निर्माताओं के रणबीर कपूर ही बनना चाह रहे हों, लेकिन ये मणि रत्नम जैसे निर्देशक को क्या हुआ? फिल्म ‘ठग लाइफ’ के एक सीन में कमल हासन को छोटी सी कुल्हाड़ी लेकर लड़ते हुए जैसे दिखाया जाता है, दिमाग में बजने लगता है, ‘के अर्जन वेल्ली ए…’! कमल हासन की मेगा बजट फिल्म ‘ठग लाइफ’ तमिल सिनेमा के दो दिग्गजों का मिलन है। ‘नायकन’के बाद मणि रत्नम और कमल हासन फिर साथ आए हैं। चेन्नई में मिलने पर कमल हासन ने बताया था कि जवानी के दोनों में दोनों ने स्कूटर स्टैंड पर गद्दियों पर पसरे हुए सिनेमा के तमाम सपने एक साथ देखे थे, ये उनमें से एक है! क्या वाकई?

सीधे मुकाबले से हटते ही बना अंदेशा

फिल्म ‘ठग लाइफ’ इस साल की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक रही है। माना जा रहा था कि ये हिंदी फिल्म ‘हाउसफुल 5’ को कड़ी टक्कर देगी। लेकिन, फिल्म की रिलीज शुक्रवार की बजाय गुरुवार को तय होते ही पहला संकेत ये आया कि शायद सीधे मुकाबले के लिए ‘ठग लाइफ’ की टीम तैयार नहीं है। तैयार इस फिल्म की कहानी भी नहीं है कि इस पर मणि रत्नम जैसा निर्देशक फिल्म बनाए। क्या क्या नहीं बनाया हैं उन्होंने तमिल और हिंदी सिनेमा में। बेजॉय नांबियार जैसे निर्देशक अब भी उनका असिस्टेंट बनकर ही तर जाते हैं। लेकिन, ‘रोजा’, ‘बॉम्बे’ और ‘दिल से’ बनाने वाले निर्देशक की फिल्म है, ‘ठग लाइफ’। दिल मानने को तैयार नहीं होता। दिल्ली की कहानी पूरे देश में यूं आसानी से घूमती रहती है कि बस पूछो मत। न कहीं कोई टाइम लैप, न ही कहीं कोई सिर पैर। गोवा और दिल्ली के बीच की दूरी फिल्म के कलाकार यूं तय करते हैं, मानो किसी टाइम पोर्टल से होकर गुजर जाते हों।

फिल्म की पटकथा बनी सबसे कमजोर कड़ी

फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी है इसकी कहानी, इसकी पटकथा और इसके संवाद। साल 1994 में शुरू होने वाली फिल्म में युवा कमल हासन भी दिखते हैं। कहानी दिल्ली के माफियाओं की है। दो गिरोहों में समझौते की सी बात चल रही है। लेकिन, इनमें से एक गिरोह पुलिस से मिला हुआ है। गोलीबारी होती है। कमल हासन का किरदार कुछ कुछ ‘नायकन’ जैसा ही है, नाम उसको मिला है शक्तिवेल। वह अखबार बेचने वाले हॉकर के बच्चे को ढाल बनाकर भागने की कोशिश करता है। ये बच्चा बड़ा होकर उसका उत्तराधिकारी भी बनता है। लेकिन, छोटे भाई और बड़े भाई की अनबन के बीच बड़ा हो चुका ये बच्चा शतरंज का मोहरा बन जाता है। इंटरवल तक फिल्म ठीक ठाक चलती जाती है, लेकिन इंटरवल के बाद यूं लगता है कि जैसे फिल्म को मणि रत्नम ने अपने सहायकों के भरोसे छोड़ दिया और फिल्म आसमान से धरती पर इतनी जोर से गिरती है कि उनके और कमल हासन दोनों के फैंस के दिलों में बड़ा सा ‘क्रेटर’ बन जाता है।

कमल हासन ने दिया सबसे बड़ा धोखा

दुख इस बात को यादकर और बढ़ जाता है कि साल 1981 में 5 जून को ही कमल हासन की पहली हिंदी फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ रिलीज हुई थी और तब से आज तक उनके चाहने वाले उनकी अच्छी फिल्मों के इंतजार में रहते ही रहे हैं। कमल हासन की ‘सदमा’ आज भी हिंदी फिल्म दर्शकों की पसंदीदा फिल्मों की सूची में सबसे ऊपर की फिल्मों मे शुमार होती है। लेकिन, ‘ठग लाइफ’ देखने वाले खुद को ठगा सा जरूर महसूस करेंगे। ये आईफोन की ऑनलाइन खरीद में साबुन की बट्टी डिलीवर हो जाने जैसा मामला है। कमल हासन का किरदार शक्तिवेल यहां जवानी, प्रौढ़ावस्था, बुजुर्गियत और फिर करीब करीब संन्यास की अवस्था तक में दिखता है। दूसरे नंबर वाला शक्तिवेल कमाल का है। लोग उसका कमाल देखने के इंतजार में ही रह गए इंटरवल के बाद। फिल्म में सबसे ज्यादा निराश कमल हासन ने ही किया है। यूं लगता है कि शंकर के बाद अब उन्होंने मणि रत्नम के साथ ‘इंडियन 2’ बना ली है।

नानी को दादी कैसे बना सकते हैं हिंदी में?

साउथ सिनेमा के हिंदी डब संस्करणों में ऐसी गलतियां होती नहीं है लेकिन, समझ आता कि ‘ठग लाइफ’ की हिंदी डबिंग वाकई सहायकों के ही हवाले रही है। पहले तो लगता है कि शक्तिवेल की बेटी का अपने बेटे का ‘पोता’ कहकर अपने पिता से मिलना चूकवश हो सकता है। लेकिन फिल्म खत्म होने से ठीक पहले शक्तिवेल भी जब अपनी पत्नी को इस बच्चे की दादी कहकर संबोधित करता है तो समझ आता है कि ये गलती नहीं लापरवाही है। कॉन्टीन्यूटी की गलतियां इस फिल्म में झौआ भर भरके हैं। मेकअप में कमल हासन खुद ही निपुण हैं और बताते हैं कि इसका ज्ञान उन्होंने हॉलीवुड जाकर हासिल किया है, लेकिन मौत के चंगुल से बच निकले शक्तिवेल का मेकअप अच्छा नहीं है। रवि के चंद्रन ने अपने कैमरे का कमाल खूब दिखाया है। मणि रत्नम ब्रांड वाले कुछ सीन भी अच्छे रचे हैं। ए श्रीकर प्रसाद चाहते तो फिल्म की लंबाई थोड़ी छोटी कर सकते थे। 

तृषा कृष्णन का काम अव्वल नंबर

‘ठग लाइफ’ में कमल हासन के बाद सबसे बढ़िया काम तृषा कृष्णन ने किया है। मुंबई के डांस बार से बचाई गई इंद्राणी के किरदार में वह खूब खिली हैं। फिल्म में कमल हासन के गोद लिए बेटे का किरदार सिलम्बरासन ने अच्छा निभाया है। उनकी पत्नी जीवा बनी अभिरामी ने भी बढ़िया काम किया है। चंद्रा बनी ऐश्वर्य लक्ष्मी छोटे रोल में भी प्रभावित करने में सफल रहीं। अली फजल का काम भी उतना ही है। मारधाड़ के सीन के दौरान ‘साहो’ श्रद्धा कपूर अपनी लट कान पर करती दिखी थीं। वैसे ही अली फजल भी यहां अपनी जुल्फें संवारने के चक्कर में अपना असर खो देते हैं। महेश मांजरेकर का काम प्रभावी है, अगर उनके किरदार सदानंद और शक्तिवेल की दुश्मनी पर ही ये फिल्म डटी रहती तो इसका असर कुछ और ही होता। फिल्म तकनीकी रूप से बहुत बढ़िया है। अरसे बाद ए आर रहमान के गाने भी फिल्म देखते समय अच्छे लगे, लेकिन फिल्म का बीज ही इतना कमजोर है कि बस क्या कहा जाए..

Bureau Report

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