‘टैरिफ को जादुई छड़ी मानते हैं ट्रंप’: अमेरिकी राष्ट्रपति पर बरसे थरूर, बोले- उनके बयान-फैसले से भारत में रोष

'टैरिफ को जादुई छड़ी मानते हैं ट्रंप': अमेरिकी राष्ट्रपति पर बरसे थरूर, बोले- उनके बयान-फैसले से भारत में रोष

कांग्रेस सांसद और पूर्व विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने अमेरिका की नीतियों पर कई अहम मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एच-1बी वीजा शुल्क वृद्धि, अमेरिका की तरफ से भारत पर लगाए गए टैरिफ, पाकिस्तान-अमेरिका रिश्ते और पाकिस्तान-सऊदी अरब रक्षा समझौते पर विस्तार से अपनी बात रखी है।

‘टैरिफ को जादू की छड़ी मानते हैं ट्रंप’
एएनआई से बातचीत के दौरान शशि थरूर ने अमेरिका की तरफ से भारत पर लगाए गए टैरिफ को न्यायहीन करार दिया। उन्होंने कहा कि ट्रंप मानते हैं कि टैरिफ उनकी समस्याओं का समाधान हैं। ‘ट्रंप का मानना है कि कई चीजें जो पहले अमेरिका में बनती थीं, अब बाहर से आयात हो रही हैं। वह चाहते हैं कि आयात महंगा हो, ताकि अमेरिकी कंपनियां अपने देश में उत्पादन करें और अमेरिकी मजदूरों को रोजगार दें। दूसरा कारण यह है कि ट्रंप मानते हैं कि टैरिफ से उनकी सरकार को हर महीने अरबों डॉलर का राजस्व मिलेगा, जिससे अमेरिका का भारी घाटा कम होगा।’ थरूर ने कहा कि इस फैसले से भारत में गुस्सा बढ़ा है और ट्रंप व उनके सलाहकारों के बयान बेहद आपत्तिजनक हैं।

अमेरिका के साथ समझौते की उम्मीद भी जताई
शशि थरूर ने आगे यह भी कहा कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अमेरिका गए हैं और वहां बातचीत चल रही है। ‘अगर पहले 25% टैरिफ को 15-19% या अधिकतम 20% तक लाया जा सके, तो कारोबार फिर सामान्य हो सकता है। लेकिन दूसरा 25% राजनीतिक मामला है और इसे सुलझाना मंत्री के अधिकार क्षेत्र में नहीं है।’ उन्होंने माना कि यह भारत के लिए फिलहाल झटका है, लेकिन लंबे समय में भारत-अमेरिका संबंध संतुलित हो जाएंगे।

एच-1बी वीजा का शुल्क पर थरूर की तीखी प्रतिक्रिया
शशि थरूर ने कहा कि अमेरिका में एच-1बी वीजा का शुल्क 1 लाख डॉलर करने का फैसला घरेलू राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने कहा, ‘डोनाल्ड ट्रंप को लगता है कि एच-1बी वीजा के कारण अमेरिकी कंपनियां कम वेतन पर भारतीयों को नौकरी देती हैं, जिससे अमेरिकी नागरिकों को नुकसान होता है। इसी वजह से यह शुल्क इतना बढ़ा दिया गया है कि कंपनियों के लिए लो-एंड नौकरियां देना मुश्किल हो जाए। इससे सिर्फ वे लोग जाएंगे जो बेहद जरूरी और अपरिहार्य हैं।’ थरूर ने इसे अव्यावहारिक बताया और कहा कि कई अमेरिकी कंपनियां अब सीधा आउटसोर्सिंग का रास्ता चुनेंगी, जिससे नौकरियां अमेरिका के बजाय भारत या अन्य देशों में जाएंगी।

अमेरिका-पाकिस्तान नजदीकी पर नाराजगी
वहीं अमेरिका और पाकिस्तान की नजदीकी पर शशि थरूर ने कहा कि भारत को यह याद रखना चाहिए कि पाकिस्तान अमेरिका का पुराना सहयोगी रहा है। ‘हम भूल गए थे कि पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्ते कितने गहरे हैं। आईएसआई की स्थापना भी अमेरिकी मदद से हुई थी। कई पाकिस्तानी अफसर अमेरिका में ट्रेनिंग ले चुके हैं। आतंकवादी जो पाकिस्तान भारत के खिलाफ भेजता है, वे अमेरिका को नहीं बल्कि पाकिस्तान सरकार और सेना को भी निशाना बनाते हैं। इसलिए अमेरिका का पाकिस्तान से रिश्ता, भारत से अलग है।’ उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह स्थिति खराब दिखती है, लेकिन यह पुराना इतिहास है और इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

भारत-पाकिस्तान संघर्ष और अमेरिका की भूमिका
इस दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर भी प्रतिक्रिया दी जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रोकने में भूमिका निभाई। ‘हमने किसी से मध्यस्थता नहीं मांगी। हमारा संदेश साफ था, वे रुकेंगे तो हम भी रुकेंगे। लेकिन अगर वॉशिंगटन ने इस्लामाबाद को समझाया कि हमला न करें, तो इसके लिए हमें आभार जताना चाहिए।’ उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत किसी तीसरे देश की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता।

पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौते पर प्रतिक्रिया
पाकिस्तान और सऊदी अरब के रक्षा समझौते को लेकर शसि थरूर ने कहा कि यह नया नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रही व्यवस्था का औपचारिक रूप है। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान लंबे समय से खुद को मुस्लिम दुनिया की सुरक्षा शक्ति के रूप में प्रस्तुत करता आया है। हमें अधिक प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए। लेकिन यह बात चिंताजनक है कि समझौते में कहा गया है कि एक देश पर हमला, दोनों पर हमला माना जाएगा।’ उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय कूटनीतिज्ञ इस मामले पर सऊदी अरब से बातचीत कर रहे होंगे। ‘हमें यह भी समझना चाहिए कि दुनिया की हर नीति भारत को ध्यान में रखकर नहीं बनाई जाती। न ट्रंप की हर नीति सिर्फ भारत के लिए होती है और न ही सऊदी की। हमें व्यापक दृष्टिकोण रखना चाहिए।’

Bureau Report

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*