यूपी के ये 6 प्रत्याशी नहीं लड़ पाएंगे चुनाव, तीन साल तक की रोक, जानिए क्यों आयोग ने दिया बड़ा झटका?

यूपी के ये 6 प्रत्याशी नहीं लड़ पाएंगे चुनाव, तीन साल तक की रोक, जानिए क्यों आयोग ने दिया बड़ा झटका?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2022 में चुनाव लड़ने वाले छह प्रत्याशी तीन साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. इन प्रत्याशियों पर चुनाव आयोग ने बड़ा एक्शन लिया है. बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग ने यूपी के 6 प्रत्याशियों को अयोग्य घोषित कर दिया है. साथ ही तीन साल तक उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है.

जानिए क्यों हुआ ये बड़ा एक्शन?
जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2022 में चुनाव लड़ने वाले छह प्रत्याशियों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने चुनाव व्यय का लेखा-जोखा जिला निर्वाचन अधिकारी को जमा नहीं किया था. जिसकी वजह से उन्हें तीन साल के लिए अयोग्य घोषित किया गया है. इस अवधि में ये प्रत्याशी लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा या विधान परिषद का कोई भी चुनाव नहीं लड़ सकते हैं.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दी जानकारी
इस मामले में मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 78 के तहत चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के अंदर प्रत्याशी को अपने चुनाव व्यय का पूरा ब्योरा, वाउचर सहित जमा करना अनिवार्य होता है. इन छह प्रत्याशियों ने न तो समय पर लेखा दाखिल किया और न ही आयोग के नोटिस के बाद कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण या कारण बताया. जिसकी वजह से आयोग ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया है.

कौन-कौन हुआ अयोग्य घोषित?
जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के बिसौली (अनुसूचित जाति) विधानसभा क्षेत्र से प्रज्ञा यशोदा, बदायूं के बिसौली क्षेत्र से ही सुरेंद्र, बदायूं के दातागंज विधानसभा क्षेत्र से ओमवीर, बदायूं के शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र से ममता देवी को अयोग्य घोषित किया गया है. इसके अलावा संभल जिले से अनिल कुमार और लखनऊ से मुन्ना लाल के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई गई है. ये छह प्रत्याशी निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे थे. 

पारदर्शिता और नियमों के पालन पर जोर
इस बड़ी कार्रवाई से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों के पालन पर फोकस किया गया है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने साफ कह दिया है कि व्यय लेखा न जमा करने वाले प्रत्याशियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नियमित रूप से की जाती है, ताकि चुनावी प्रक्रिया में विश्वसनीयता बनी रहे और काले धन के दुरुपयोग को रोका जा सके.

Bureau Report

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