नेपाल की राजनीति में इस समय झापा-5, वो ज्वालामुखी बन चुका है, जो कभी भी फट सकता है. एक तरफ नेपाल के कद्दावर नेता और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली हैं, जिनका इस सीट पर दशकों से राज रहा है, तो दूसरी तरफ काठमांडू के पूर्व मेयर और युवाओं की धड़कन बालेन शाह हैं. सड़कों पर न तो पोस्टर हैं और न ही होर्डिंग्स, लेकिन दमक शहर की शांत गलियों के पीछे एक ऐसी सियासी सुनामी चल रही है जिसने ओली जैसे दिग्गज को भी घर-घर जाकर वोट मांगने पर मजबूर कर दिया है.
1.63 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर लड़ाई सिर्फ दो चेहरों की नहीं, बल्कि पुराने पैटर्न और ‘जेन जी’ की नई सोच के बीच है. अब सवाल ये उठता है कि क्या बालेन शाह मधेसी मूल के पहले प्रधानमंत्री बनने की ओर कदम बढ़ाएंगे, या ओली का संगठन एक बार फिर अभेद्य साबित होगा. आइए, इस खास खबर में झापा-5 के समीकरण के बारे में डिटेल से समझते हैं.
बालेन शाह के आने से बढ़ गई है चुनौती
ओली झापा-5 से लंबे समय से जुड़े हैं. 1991 से लगातार चुनाव जीतते रहे हैं और 2008 के चुनाव को छोड़ दें तो छह बार सांसद रह चुके हैं. उनकी साख और पैठ मजबूत रही है, लेकिन पिछले साल सितंबर में जेन जी आंदोलन और बालेन शाह के इस क्षेत्र में आने से उनकी चुनौती बढ़ गई है. युवा वोटर अब बदलाव चाहते हैं और बालेन शाह उनकी पसंद बन चुके हैं.
दमक के गलियों में पूछताछ करने पर लोगों के अलग-अलग मत सामने आते हैं. 60 साल के तिलक केसी कहते हैं कि वे हमेशा ओली को वोट देते रहे, लेकिन इस बार बालेन शाह को मौका देंगे. उनका कहना है कि ओली ने विकास के काम जरूर किए, लेकिन बच्चों पर गोली चलाने जैसे घटनाओं ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया.
टक्कर की होगी लड़ाई
वहीं 37 साल के विनोद काफ्ले का मानना है कि झापा-5 में लड़ाई पूरी तरह एकतरफा नहीं है. उन्होंने कहा कि ओली ने शहर और गांवों में पक्की सड़कों का जाल बिछाया है और उनका संगठन बहुत मजबूत है, इसलिए मुकाबला कठिन रहेगा.
पूर्व में इस सीट पर ओली केवल एक बार हारे हैं. प्रचंड की पार्टी के उम्मीदवार रहे विश्वदीप लिंग्देन का कहना है कि बालेन शाह युवा मतदाताओं में बहुत लोकप्रिय हैं और ओली के लिए चुनौती बड़ी है. हालांकि, स्थानीय पत्रकारों की राय है कि बालेन के कुछ विवादों ने उनकी छवि पर सवाल खड़े किए हैं, लेकिन जनता अभी भी उन्हें समर्थन दे रही है.
बदल गया है प्रचार का तरीका
झापा-5 में चुनाव प्रचार का तरीका भी इस बार बदल गया है. ओली पहले चुनावों में इस क्षेत्र को ज्यादा समय नहीं देते थे, लेकिन अब उन्होंने पूरी ताकत झापा-5 पर लगा दी है. वे मतदाताओं के घर-घर जा रहे हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे हैं. दूसरी ओर बालेन शाह पूरे नेपाल में कैंपेन कर रहे हैं और हर जगह युवा मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.
यह क्षेत्र करीब 1.63 लाख मतदाताओं वाला है और पिछले चुनाव में ओली को 52,319 वोट मिले थे. अब समीकरण बदल चुके हैं क्योंकि बालेन शाह का प्रभाव सोशल मीडिया और युवा वर्ग में तेजी से बढ़ रहा है. चुनावी माहौल में पुराने पैटर्न अब काम नहीं कर रहे, और युवा समाधान की उम्मीद बालेन शाह से लगा रहे हैं.
मधेशी उम्मीदवारों को मिलेगा जीतने का मौका
बालेन शाह मधेशी माता-पिता के बेटे हैं और अगर वे प्रधानमंत्री बने तो नेपाल के पहले मधेशी मूल के व्यक्ति होंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि झापा-5 में उनकी सफलता यह दिखाएगी कि अब पहाड़ी क्षेत्रों में भी मधेशी उम्मीदवारों को जीतने का मौका मिल सकता है. चुनाव नतीजे चाहे जो भी हों, झापा-5 इस बार नेपाल के राजनीतिक इतिहास में जरूरी साबित होगा.
Bureau Report
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