इतनी तगड़ी जासूसी कि ईरान की लीडरशिप को संभलने का भी मौका नहीं मिला. ड्रोन से लिया गया हमले का एक वीडियो साफ बताता है कि कैसे सूरज की रोशनी में इजरायल और अमेरिका ने मिलकर एकसाथ पूरा कैंपस उड़ा दिया. आखिर इतना सटीक निशाना कैसे लगा? क्या ईरान में ही इजरायल के एजेंट मौजूद थे? कुछ समय पहले पता चला था कि मोसाद के एजेंट ईरान की सिक्योरिटी में टॉप लेवल पर बैठे थे. अब एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हर एक्टिविटीज पर इजरायल की नजर थी. नेतन्याहू की टीम तेहरान के हर ट्रैफिक कैमरे को तेल अवीव से हैक कर चुकी थी. इतना ही नहीं, मोबाइल फोन का नेटवर्क भी इजरायल की टीम देख रही थी. हर डेटा मिल रहा, हर कमांडो का पता मालूम था. अमेरिका के एक जासूस ने ग्राउंड से सिग्नल दिया तब ऑपरेशन शुरू हुआ.
लंदन के अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने कई मौजूदा और पुराने इजरायली इंटेलिजेंस अधिकारियों और ऑपरेशन से जुड़े लोगों के हवाले से बताया है कि इजरायल ने सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या से पहले उनकी एक्टिविटीज और सिक्योरिटी डीटेल पर नजर रखने के लिए तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को हैक कर लिया था. मोबाइल फोन नेटवर्क में सेंध लगा ली थी और यह काम कई सालों से चल रहा था. नीचे वीडियो देखिए कैसे इजरायल ने एक साथ पूरा हेडक्वॉर्टर उड़ा दिया क्योंकि नेतन्याहू को पता था कि खामेनेई उस समय कई टॉप अफसरों के साथ मीटिंग कर रहे हैं.
तेल अवीव शेयर हो रही थी तेहरान की फुटेज
रिपोर्ट में जासूसी के बारे में जानकारी रखने वाले दो अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि तेहरान के लगभग सभी ट्रैफिक कैमरे सालों से हैक थे और सारी फुटेज एन्क्रिप्ट (गुप्त तरीके) करके तेल अवीव और दक्षिणी इजरायल के सर्वर पर भेजी जाती थी. एक टॉप सूत्र ने बताया कि एक कैमरा एंगल यह पता लगाने में सफल हो गया कि बॉडीगार्ड अपनी पर्सनल कार कहां पार्क करते हैं और पाश्चर स्ट्रीट (तेहरान में जहां ज्यादातर टॉप सरकारी संस्थान हैं) के पास कंपाउंड के अंदर के रूटीन के बारे में भी पता चल गया.
हर कमांडो का ए़ड्रेस पता था
खामेनेई के सिक्योरिटी गार्ड के सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए जटिल एल्गोरिदम का इस्तेमाल हुआ. सुरक्षाकर्मियों के पते, ड्यूटी के घंटे, काम पर जाने के रास्ते की जानकारी जुटाने के साथ यह भी पता कर लिया गया कि X कमांडो को किस अधिकारी या टॉप लीडर की सुरक्षा में नियुक्त किया गया है.
फोन टावर भी खराब किया
रिपोर्ट में बताया गया कि इजरायल ने पाश्चर स्ट्रीट के पास लगभग एक दर्जन मोबाइल फोन टावरों के पार्ट्स भी खराब कर दिए, जिससे फोन कॉल करने पर बिजी मिल रहा था. इसका असर यह हुआ कि खामेनेई की सुरक्षा टीम के लोगों को भी संभावित खतरे की चेतावनी नहीं मिल पाई.
यरूशलम की तरह तेहरान की हर गली से परिचित थे इजरायली
एक इजरायली इंटेलिजेंस अधिकारी ने अखबार को बताया कि हमले से बहुत पहले हम तेहरान को वैसे ही जानते थे जैसे यरुशलम को जानते हैं. उन्होंने इजरायल की सिग्नल इंटेलिजेंस यूनिट 8200, मोसाद के भर्ती किए ह्यूमन सोर्स और मिलिट्री इंटेलिजेंस के एनालिसिस से डेटा कलेक्शन के जरिए बनी एक गहरी ‘इंटेलिजेंस पिक्चर’ के बारे में बताया. (नीचे देखिए अमेरिका ने ईरान पर हमला करने के लिए किस-किस शिप, जेट और हथियार का इस्तेमाल किया.)
इजरायल ने एक सोशल नेटवर्क एनालिसिस भी की थी. यह एक मैथमेटिकल तरीका था जिसके तहत अरबों डेटा पॉइंट्स को छानकर बड़े फैसले लेने वाले सेंटर्स और नए टारगेट्स की पहचान की गई. इजरायली इंटेलिजेंस ने सिग्नल इंटेलिजेंस पर भरोसा किया, जिसमें हैक किए गए ट्रैफिक कैमरे और मोबाइल फोन नेटवर्क में सेंध लगाना शामिल था ताकि यह कन्फर्म किया जा सके कि खामेनेई और सीनियर अधिकारी हमले की सुबह कंपाउंड में मौजूद हैं.
रिपोर्ट के अनुसार कन्फर्मेशन देने के लिए अमेरिकियों के पास एक अतिरिक्त ह्यूमन सोर्स भी था यानी अमेरिका का एजेंट जिसने तेहरान में रहते हुए कन्फर्म किया और हमले का ग्रीन सिग्नल दिया.
Bureau Report
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