नई दिल्ली, 20 मार्च 2026: केंद्र सरकार के Digital Personal Data Protection (DPDP) Act, 2023 को लेकर देश में कानूनी और सार्वजनिक बहस तेज हो गई है। पत्रकारों, पारदर्शिता कार्यकर्ताओं और कुछ संगठनों ने इस कानून के कुछ प्रावधानों को सुप्रीम Court में चुनौती दी है। Reuters के अनुसार, इस मामले से जुड़ी चार याचिकाओं पर 23 मार्च 2026 को सुनवाई तय है।
याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति यह है कि इस कानून के जरिए Right to Information (RTI) Act में ऐसा बदलाव किया गया है, जिससे “personal information” के खुलासे पर व्यापक रोक लग सकती है। आलोचकों का कहना है कि इससे उन सूचनाओं तक पहुंच मुश्किल हो सकती है, जो पहले बड़े जनहित में मांगी और प्राप्त की जाती थीं।
इस मुद्दे को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि पत्रकार संगठनों और पारदर्शिता से जुड़े समूहों का मानना है कि यह बदलाव जवाबदेही और पारदर्शिता को प्रभावित कर सकता है। कुछ याचिकाओं में यह भी कहा गया है that DPDP Act और उससे जुड़े 2025 Rules में पत्रकारिता के लिए स्पष्ट सुरक्षा या अपवाद का अभाव है, जिससे खोजी पत्रकारिता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
वहीं, सरकार का पक्ष यह है कि यह कानून नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लाया गया है। सरकार ने पहले भी कहा है कि गोपनीयता की रक्षा और पारदर्शिता के बीच संतुलन बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।
फिलहाल मामला न्यायिक विचाराधीन है, इसलिए इस पर अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई और आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी। अभी के लिए यह विवाद गोपनीयता बनाम पारदर्शिता की बहस के केंद्र में आ गया है, जिस पर मीडिया, नागरिक समाज और कानूनी विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है।
Reported by Ramesh Saini
Bureau Report
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