Explainer: इजरायल-ईरान जंग के बीच भारत को राहत, ब‍िना पेनाल्‍टी खरीद सकेंगे रूसी तेल; अब अमेर‍िका क्‍यों दे रहा छूट?

Explainer: इजरायल-ईरान जंग के बीच भारत को राहत, ब‍िना पेनाल्‍टी खरीद सकेंगे रूसी तेल; अब अमेर‍िका क्‍यों दे रहा छूट?

ईरान पर अमेर‍िका और इजरायल की तरफ से क‍िये गए हमले के बाद म‍िड‍िल ईस्‍ट में हालात सामान्‍य नहीं हैं. इस जंग ने इंटरनेशनल मार्केट में हलचल पैदा कर दी है, ज‍िससे ऑयल मार्केट बुरी तरह प्रभाव‍ित हुआ है. होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज फंसे हुए हैं, इसका सीधा असर तेल की सप्लाई पर पड़ रहा है. इस बीच अमेरिका ने भारत को बड़ी राहत दी है. ट्रंप प्रशासन की तरफ से भारत को 30 दिन की अस्थायी छूट (waiver) दी गई है. इससे भारत ब‍िना क‍िसी पेनाल्‍टी के रूस से क्रूड ऑयल ले सकता है. बताया जा रहा है यह छूट ऐसे तेल टैंकरों पर लागू होगी, जो पहले से समुद्र में फंसे हुए हैं.

इतना बड़ा क्‍यों है होर्मुज स्‍ट्रीट का संकट?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे अहम तेल रूट है, यहां से ग्‍लोबल सप्‍लाई का करीब 20-25% तेल रोजाना गुजरता है. यह जगह महज 21 नॉटिकल मील चौड़ी है. ईरान के हमलों और र‍िस्‍क से जहाजों का आना-जाना लगभग रुक गया है. भारत अपनी जरूरत के 90% क्रूड ऑयल का आयात करता है, ज‍िसमें से 40-50% मिडिल ईस्ट से आता है. इसके बाद भारत के तेल आयात पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. ईरान के इस कदम से ग्‍लोबल एनर्जी की सप्‍लाई पर असर पड़ा है, इससे ब्रेंट क्रूड के दाम एक हफ्ते में 16.4% उछलकर 90 डॉलर के पार पहुंच गए.

ट्रंप प्रशासन से म‍िली 30 दिन की छूट क्या है?

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने 5 मार्च 2026 से 4 अप्रैल 2026 तक के लि‍ए एक महीने का waiver जारी क‍िया है. यह छूट केवल ऐसे रूसी क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट पर लागू है जो क‍ि 5 मार्च से पहले जहाजों पर लोड हो चुके थे और अब समुद्र में फंसे हैं. भारतीय रिफाइनर्स की तरफ से इन्‍हें खरीदकर भारत के पोर्ट पर उतारा जा सकता है. नई डील पर यह छूट लागू नहीं होगी. अमेरिका का तर्क है क‍ि इससे रूस को ज्यादा फायदा नहीं म‍िलेगा, बल्कि ग्‍लोबल ऑयल सप्‍लाई बनाए रखने में मदद म‍िलेगी.

भारत को क‍ितना फायदा?

भारत पहले ही रूसी तेल का बड़ा खरीदार रहा है. रूस और यूक्रेन की जंग के बाद भारत ने रूस से क्रूड ऑयल को सस्‍ती दर पर खरीदा. लेकिन प‍िछले द‍िनों अमेरिकी दबाव और सैंक्शंस के बाद रूसी ऑयल की खरीद कम हो गई. जनवरी में इसका आंकड़ा 21% तक गिर गया और फरवरी में यह और ग‍िरकर 30% हो गया. अब अमेर‍िका की तरफ से म‍िलने वाली छूट से भारत को तुरंत 15 मिलियन बैरल तेल आसानी से म‍िल जाएगा. इसके अलावा समुद्र में फंसे 145 मिलियन बैरल रूसी तेल का भी एक्‍सेस म‍िल जाएगा. इससे भारत रोजाना एक मिलियन बैरल प्रत‍िद‍िन से बढ़ाकर डेढ़ से दो मिलियन बैरल तक का आयात कर सकेगा. इससे घरेलू बाजार में परेशानी नहीं होगी और स्टॉक भी सुरक्षित रहेगा.

भारत की एनर्जी स‍िक्‍योर‍िटी कितनी मजबूत?

भारत के पास क्रूड ऑयल का 25 दिन का स्टॉक, पेट्रोल-डीजल का 25 दिन का और स्ट्रैटेजिक रिजर्व से कुल 8 हफ्ते का बफर है. सरकार का फोकस एक्‍सपोर्ट की बजाय घरेलू जरूरत पर है. मिडिल ईस्ट पर भारत की निर्भरता बनी हुई है. ब्रेंट क्रूड के दाम 90 डॉलर प्रत‍ि बैरल के पार जाने से देश का आयात बिल बढ़ेगा. हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से सालाना 13-14 अरब डॉलर का अत‍िर‍िक्‍त खर्च होता है. जानकारों का कहना है क‍ि यह राहत अस्थायी है, लंबे समय में भारत को वैकल्पिक सोर्स ढूंढने होंगे.

ट्रंप का एनर्जी एजेंडा और इंडो-यूएस र‍िलेशन

ट्रंप प्रशासन अमेरिकी तेल-गैस प्रोडक्‍शन बढ़ाने पर फोकस कर रहा है. भारत को ‘एसेंशियल पार्टनर’ बताते हुए उम्मीद जताई गई कि भारत पहले से ज्‍यादा अमेरिकी तेल खरीदेगा. पहले ट्रंप की तरफ से रूसी तेल खरीद पर 25% का पेनल्टी टैरिफ लगाया गया, जो फरवरी में हट गया. इस छूट के बाद भारत-अमेरिका ट्रेड डील और एनर्जी सिक्योरिटी के बीच बैलेंस बनाता है. भारत एनर्जी स‍िक्‍योर‍िटी को तवज्‍जो दे रहा है. अमेर‍िका की तरफ से उठाया गया यह कदम भारत के लि‍ए बड़ी राहत लेकर आया है. यद‍ि यह जंग लंबी चली तो तेल दुन‍ियाभर में तेल संकट गहरा सकता है.

Bureau Report

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*