उत्तर प्रदेश का जिला प्रयागराज स्थित परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा (NMMS) 2026 का परिणाम 28 फरवरी को घोषित कर दिया गया. इस परीक्षा में उत्तर प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त और स्थानीय निकायों के स्कूलों में कक्षा आठ में अध्ययनरत छात्रों को छात्रवृत्ति के लिए चयनित किया जाता है. इस वर्ष राज्य में निर्धारित 15,143 सीटों के मुकाबले 14,925 मेधावी छात्र-छात्राओं का चयन हुआ है. हालांकि तमाम प्रयासों के बावजूद 218 सीटें खाली रह गईं.
जानें किस कक्षा के बच्चों को मिलेगी छात्रवृत्ति
इस परीक्षा में चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी. चयनित छात्रों को प्रति माह एक हजार रुपये यानी सालाना 12 हजार रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी. इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के होनहार बच्चों को पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है.
13 जिलों ने हासिल की शत-प्रतिशत सफलता
इस बार उत्तर प्रदेश के 13 जिलों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने निर्धारित कोटे के अनुसार शत-प्रतिशत सफलता हासिल की है. इन जिलों के सभी आवंटित सीटों पर छात्रों का चयन हो गया है। शत-प्रतिशत सफलता प्राप्त करने वाले जिलों में बहराइच (172), बलिया (251), बलरामपुर (118), चंदौली (204), देवरिया (235), गाजीपुर (184), कौशांबी (105), कुशीनगर (254), लखीमपुर खीरी (318), मऊ (147), मिर्जापुर (233), सोनभद्र (159) और वाराणसी (269) शामिल हैं। इन जिलों के छात्रों ने अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सभी सीटों पर कब्जा जमाया.
हर जिले के लिए तय होता है अलग कोटा
राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा में प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग सीटों का कोटा निर्धारित किया जाता है. उसी के अनुसार छात्रों का चयन किया जाता है. कई जिलों में निर्धारित सीटों के मुकाबले पर्याप्त छात्र चयनित नहीं हो सके, जिसके कारण राज्य स्तर पर 218 सीटें खाली रह गईं.
ड्रॉपआउट रोकने के लिए शुरू हुई योजना
केंद्र सरकार ने वर्ष 2008 में राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति योजना की शुरुआत की थी. इस योजना का मुख्य उद्देश्य आठवीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या को कम करना और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मेधावी छात्रों को पढ़ाई जारी रखने के लिए वित्तीय सहायता देना है.इस योजना के जरिए हर साल हजारों छात्रों को आर्थिक मदद मिलती है, जिससे वे अपनी पढ़ाई बिना किसी आर्थिक बाधा के जारी रख पाते हैं.
Bureau Report
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