India-Pak Conflict Analysis: ‘भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बीच अगले 72 घंटे अहम’, रक्षा विशेषज्ञ ने ऐसा क्यों कहा

India-Pak Conflict Analysis: 'भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बीच अगले 72 घंटे अहम', रक्षा विशेषज्ञ ने ऐसा क्यों कहा

भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव तीन दिन से जारी है। पाकिस्तान ने गुरुवार को करीब 400 ड्रोन दागे थे। हालांकि, भारत ने सारे ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया। इस बीच, यह सवाल उठता है कि ड्रोन हमलों को किस तरह देखा जाना चाहिए? क्या ये हालात वाकई जंग के ही हैं? और भारत की क्षमता और तैयारी कितनी मजबूत है? 

यह जानने के लिए लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राजेंद्र रामराव निंभोरकर से बातचीत की। ले. ज. निंभोरकर थलसेना के वही अफसर हैं, जो 2016 में उड़ी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक के समय कोर कमांडर थे। तब वे दो लाख सैनिकों का नेतृत्व कर रहे थे। 270 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा की सुरक्षा का जिम्मा उनके पास था। 

ऑपरेशन सिंदूर के बारे में क्या कहेंगे?
ले.ज. निम्भोरकर: इसका सबसे बेहतर पक्ष यह है कि इस ऑपरेशन का नाम एकदम सटीक रहा। उड़ी और पुलवामा पर हमले के बाद हमारे देश ने सबक सिखाने के लिए कोई न कोई कदम उठाया। इस बार भी हमने 15 दिन के अंदर जवाब दिया। हमने आर्थिक, सैन्य या रिहाइशी ठिकानों पर नहीं, सिर्फ आतंकी ठिकानों पर हमला किया। हमने जो शस्त्र प्रणालियां इस्तेमाल कीं, वो एकदम सटीक थीं। हमने विश्व को बता दिया कि हम जो कहते हैं, वो करके दिखाते हैं। इसलिए यह ऑपरेशन सफल रहा। इससे हमारे देश का विश्व में नाम और आत्मसम्मान बढ़ेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि आतंकियों के आकाओं को यह संदेश गया है कि भारत अब चुप बैठने वाला नहीं है।

सेना ने ऑपरेशन सिंदूर को खास रणनीति से अंजाम दिया
हमने शत प्रतिशत यश प्राप्त किया है। उड़ी में उन्हें पता ही नहीं चला कि हमने क्या किया है। हमने पहले सिंधु जल संधि के बारे में बात की। पाकिस्तान को लगा कि हम बात करना चाहते हैं। हमने उसे चकमा दिया। बालाकोट के समय भी हमने चकमा देते हुए विमानों का इस्तेमाल किया। इस बार हमने कहा कि हम मॉक ड्रिल करेंगे। पाकिस्तान ने सोचा था कि मॉक ड्रिल तक तो कुछ नहीं होगा। हमने उसी रात को ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दे दिया। इसी रणनीति से ऑपरेशन कामयाब होते हैं। हमने अपना काम पूरा किया। 

पाकिस्तान लगातार उकसावे वाली हरकतें कर रहा है। इसे कैसे देखते हैं?  
ले.ज. निम्भोरकर: पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलें इस्तेमाल कर करीब 400 ड्रोन दागे हैं। दोनों तरह से भारी गोलाबारी हो रही है। हम कुपवाड़ा, तंगधार, उड़ी, पुंछ, नौशेरा जैसे इलाकों से जवाब दे रहे हैं। हमने पाकिस्तान की चौकियों और राशन आपूर्ति वाली जगहों को नष्ट किया है। इससे उन्हें मुश्किलें होंगी। हमने रिहाइशी इलाकों को निशाना नहीं बनाया। उन्हें अधिकतम नुकसान पहुंचा है। पाकिस्तान ने एक नापाक हरकत की है। उन्होंने पुंछ के गुरुद्वारे पर गोले बरसाए। भारत ने कभी ऐसा नहीं किया। हालांकि, इससे हमारा मनोबल नहीं गिरने वाला। हमारे पास सक्षम प्रणाली है। वहीं, पंजाब, राजस्थान में हमारे रिहाइशी इलाकों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का पाकिस्तान प्रयास कर रहा है, लेकिन उसकी कोशिशें नाकाम रही हैं। हमने भी उसी तरह जवाब दिए तो पाकिस्तान काफी मुश्किल में आ जाएगा। हमने गुरुवार को ऐसा जवाब दिया भी है। 

S-400 के इस्तेमाल की बात कही जा रही है, कुछ अपुष्ट खबरों में AWACS का जिक्र किया जा रहा है?
ले.ज. निम्भोरकर: कहा जा रहा है कि पाकिस्तान के AWACS (एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम, जो लंबी दूरी के रडार सर्विलांस और एयर डिफेंस कंट्रोल और कमांड के काम आता है) को नुकसान पहुंचा है। अभी इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन अगर यह बात सच निकलती है तो समझ लीजिए कि पाकिस्तान को बड़ा नुकसान होगा। AWACS कई सारी गतिविधियों को नियंत्रित करता है। अगर ये नष्ट हो गया तो उनकी आधी शक्ति खत्म हो जाएगी। पाकिस्तान ने तुर्की और चीन से सस्ते ड्रोन खरीदे हैं। उस पर S-400 से मिसाइलें नहीं दागी जा सकतीं। मक्खी को हथौड़े से नहीं मारा जाता। आर्थिक रूप से भी देखें तो करोड़ों की S-400 की मिसाइलें एक-दो लाख रुपये के ड्रोन मार गिराने के लिए नहीं इस्तेमाल हो सकतीं। हमारे पास रैपिड फायर करने वाली तोपें हैं, जैसे एल-70 गन। हमें S-400 के इस्तेमाल की फिलहाल जरूरत नहीं है। अगर AWACS को मारना होगा तो S-400 का इस्तेमाल होगा। S-400 का निशाना अचूक होता है। हमारे लिए यह गर्व की बात है कि अमेरिका के दबाव के बावजूद हमने यह प्रणाली खरीदी है।

पहलगाम में ऐसा क्या हुआ कि हमला हो गया?
ले.ज. निम्भोरकर: बायसरन घाटी के पास सबसे नजदीक चौकियां 40 से 45 मिनट की दूरी पर हैं। आतंकियों ने यह जगह इसलिए चुनी क्योंकि बायसरन के उत्तर-पश्चिम की तरफ एक ऊंचा जंगल है। त्राल भी ज्यादा दूर नहीं है। जहां से आतंकियों को मदद मिलती है। बिना स्थानीय मदद के इस हमले को अंजाम नहीं दिया जा सकता था। त्राल-पुलवामा से मदद मिली होगी। इसके बाद इस इलाके की रेकी की गई होगी। आतंकियों की मदद की गई, उन्हें वापस निकाला गया। हर जगह तो पुलिस भी नहीं जा सकती। दुर्भाग्य की बात है कि बाद में यह पता चला कि सरकार की तरफ से यहां पर्यटन की अनुमति नहीं थी। यह खुफिया तंत्र की भी विफलता रही। 2010 के बाद से अब तक हमने कई हमले रोके भी हैं। खुफिया तंत्र ने अच्छा काम भी किया है। 

जब मैं वहां तैनात था, तब उसी समय बुरहान वानी आतंकी बन चुका था। वह त्राल में रहता था। हमने उसके पिता को बुलाया। वो सरकारी नौकरी में थे। उनका कहना था कि बुरहान जो कर रहा है, वह ठीक है। हमने जब कहा कि ऐसे तो वह मारा जाएगा तो उन्होंने कहा कि आप मार दो, मेरे पास दूसरा बेटा भी है। वहां के कुछ लड़के-लड़कियां के लिए मुजाहिद तो जैसे आदर्श ही हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद हालात बदले भी हैं। हालांकि, ऐसा लगता है कि चुनाव होने के बाद असैन्य हाथों में नियंत्रण देने में जल्दबाजी हो गई। 

मौजूदा हालात कहां जाकर थमेंगे? 
ले.ज. निम्भोरकर: जब तक पाकिस्तान का उकसावा ड्रोन तक सीमित है, तब तक चिंता करने की बात नहीं है। सोचना तब होगा, जब पाकिस्तान का कोई लड़ाकू विमान हमारी सीमा में आए या उसके सैनिक घुस आएं। उसे जंग का एलान माना जाएगा। तब हम जवाब देंगे और हमें जवाब देना आता है। मैं समझता हूं कि अगले दो-तीन दिन बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें जो होगा, उससे आगे की स्थिति तय होगी। अगले 72 घंटे महत्वपूर्ण हैं। 

जनता तो चाहती है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भी अब भारत के पास आ जाए। 
ले.ज. निम्भोरकर: हमारे सशस्त्र बल जनता के सशस्त्र बल हैं। जब जनता चाहेगी, तब पीओके हमारे पास आएगा, लेकिन हर एक्शन के लिए कुछ न कुछ निवेश करना पड़ेगा। कितना निवेश हम कर सकते हैं और कितने नुकसान का आकलन हम कर सकते हैं, यह हम पर निर्भर हैं। हम इसके बदले में क्या कीमत चुका सकते हैं, यह हमें तय करना होगा। इसके पीछे परिपक्व सोच की जरूरत है। 

बलूचिस्तान के हालात को किस तरह देखते हैं?
ले.ज. निम्भोरकर: पाकिस्तान में पंजाब का प्रभुत्व है और उसका पंजाब का सूबा अपनी राय दूसरे सूबों पर थोंपना चाहता है। दूसरे सूबे में लोगों के मानवाधिकार का हनन होता है। अब बलूच आर्मी सक्रिय है। उन्हें लग रहा है कि यह अच्छा मौका है। कहा जा रहा है कि एक तिहाई बलूचिस्तान अब उनके नियंत्रण में है। खैबर पख्तूनख्वाह में गुरिल्ला युद्ध चल रहा है। आतंकी एक तरह से बाघ की सवारी कर रहे हैं, वे न नीचे उतर सकते हैं, न उससे आगे जा सकते हैं। 

दोनों देशों की सैन्य क्षमता को किस तरह देखते हैं?
ले.ज. निम्भोरकर: पाकिस्तान के पास उसके उपकरण और हथियारों के कलपुर्जों की कमी है। पाकिस्तान के पास गोला-बारूद भी कम है। यह उसकी कमजोरी है। इधर, भारत की बात करें तो 2016 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के प्रयासों के बाद आज ऐसे हालात हैं कि हम किसी भी परिस्थिति का सामना कर सकते हैं। हम काफी सक्षम हैं, हमारी कोई कमजोरी नहीं है। 

पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर के बारे में क्या कहेंगे?
ले.ज. निम्भोरकर: परवेज मुशर्रफ की जोखिम उठाने की क्षमता ऐसी थी कि नाकामी की 80 फीसदी आशंका होने पर भी वे कदम उठा लेते थे। आसिम मुनीर की बात करें तो उनके पास सोच का अभाव है। वे कट्टरपंथी हैं। उनके पास जोखिम लेने की क्षमता नहीं है। उनके पास सोचने की शक्ति ज्यादा नहीं है। वे अपने मुल्क को विनाश की तरफ ही ले जा सकते हैं। 

कौन हैं लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राजेंद्र रामराव निंभोरकर
साल 2016 में उड़ी के सैन्य शिविर पर आतंकी हमला हुआ। कुछ दिन बाद भारत ने अपने वीर जवानों की बदौलत पाकिस्तान को करारा जवाब दे दिया। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हमारे जवान जमीन के रास्ते घुसे और कार्रवाई को अंजाम देकर बिना किसी खरोंच के लौट आए। सितंबर 2016 की यह सर्जिकल स्ट्राइक देश की सेना के साहस और शौर्य की कभी न भूलने वाली कहानी बन गए। इस सर्जिकल स्ट्राइक के नायक थे लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राजेंद्र रामराव निंभोरकर। वे 15वीं पंजाब रेजिमेंट का हिस्सा थे। वे परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किए जा चुके हैं। कारगिल की जंग के दौरान वे राजौरी में तैनात थे। जब वे कश्मीर में बतौर मेजर पदस्थ थे, तब उन्होंने 22 आतंकियों का सफाया किया था। 

Bureau Report

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