क्या है US की गोल्डन डोम योजना: जिसके लिए 14.5 लाख करोड़ खर्चने को तैयार ट्रंप; किस खतरे से सुरक्षा की तैयारी?

क्या है US की गोल्डन डोम योजना: जिसके लिए 14.5 लाख करोड़ खर्चने को तैयार ट्रंप; किस खतरे से सुरक्षा की तैयारी?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसी साल मार्च में अमेरिकी संसद में दिए अपने भाषण में इस्राइल के आयरन डोम सुरक्षा कवच की तर्ज पर ही अपने देश में एक गोल्डन डोम बनाने का प्रस्ताव रखा था। मंगलवार को उन्होंने इस सिस्टम की तैनाती को लेकर मंजूरी भी दे दी। ट्रंप ने कहा, ‘हम गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस शील्ड के बारे में ऐतिहासिक घोषणा कर रहे हैं। यह कुछ ऐसा है जो हम चाहते हैं। रोनाल्ड रीगन (40वें अमेरिकी राष्ट्रपति) इसे कई साल पहले ही चाहते थे, लेकिन उनके पास तकनीक नहीं थी।’ यह योजना अमेरिका की पहली ऐसी प्रणाली होगी जिसमें अंतरिक्ष में हथियार तैनात किए जाएंगे।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर ट्रंप ने जिस गोल्डन डोम के निर्माण को मंजूरी दी है, वह है क्या? अमेरिका को अब इसकी जरूरत क्यों है? उसे किस तरह के हमलों और हथियारों से खतरा महसूस हुआ है? इसके अलावा अमेरिका का यह गोल्डन डोम इस्राइल के आयरन डोम से कितना अलग होगा? आइये जानते हैं…

पहले जानें- ट्रंप ने गोल्डन डोम को लेकर क्या बताया?
गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस शील्ड से जुड़ी घोषणा को लेकर व्हाइट हाउस की तरफ से जारी एक वीडियो संदेश में ट्रंप ने कहा, ‘यह कुछ ऐसा है जो हमारे पास होगा। हम इसे उच्चतम स्तर पर रखने जा रहे हैं।’

ट्रंप प्रशासन के मुताबिक डोम की लागत 175 बिलियन डॉलर (लगभग 14.5 लाख करोड़ रुपये) आएगी। 

अमेरिका को अचानक क्यों याद आई इस्राइल जैसी रक्षा व्यवस्था बनाने की याद?
ऐसा नहीं है कि अमेरिका के पास अब तक किसी भी तरह के हमले के लिए कोई रक्षा कवच नहीं है। अमेरिका ने अपने आसपास पूर्वी तट और अटलांटिक महासागर में किसी खतरे से निपटने के लिए यूएस फ्लीट फोर्स कमान की तैनाती की है। वहीं, जमीनी क्षेत्रों में अमेरिका ने दूसरे देशों से लगती अपनी सीमाओं ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में अलग-अलग जगहों पर सैन्य, नौसैन्य और वायुसेना के लिए बेस कैंप भी बनाए हैं। इससे अमेरिकी सेना पूरी दुनिया में किसी भी क्षेत्र में कुछ घंटों के अंदर ही हमले करने और किसी खतरे से खुद का बचाव करने में सक्षम है। हालांकि, यह टुकड़ियां पूरा हवाई क्षेत्र कवर नहीं करतीं। यानी कई ऐसे क्षेत्र भी हैं, जो कि अमेरिकी सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए ब्लाइंड स्पॉट हैं। ऐसे में दुश्मन इन क्षेत्रों की पहचान कर के या आसानी से रडार की पकड़ में न आने वाले हथियारों के जरिए उसे निशाना बना सकता है। 

अमेरिका के पास फिलहाल ऐसी कोई सुरक्षा प्रणाली नहीं है, जिसके जरिए वह आधुनिक समय की हाइपरसोनिक मिसाइलों, ड्रोन हमलों की बाढ़ का सामना कर सके। अमेरिका के पास फिलहाल हवाई हमलों से रक्षा के लिए कुछ मिसाइल डिफेंस सिस्टम जरूर हैं। इनमें पेट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम, नाइकी हरक्यूलीज सिस्टम और टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम प्रमुख हैं। इसके अलावा अमेरिका ने कुछ बैलिस्टिक मिसाइलों को भी अपनी सुरक्षा के लिए देश और बाहर समुद्री क्षेत्रों में तैनात किया है। हालांकि, यह पूरी व्यवस्था अब तक काफी बिखरी हुई मानी जाती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी क्षमता होने के बावजूद अगर अमेरिका पर हमलों की बाढ़ आती है तो यह सुरक्षा प्रणाली टूट सकती है। ऐसे में अमेरिका को सुरक्षा कवच के तौर पर एक केंद्रीकृत प्रणाली की जरूरत है।

अमेरिका की मौजूदा हवाई सुरक्षा व्यवस्थाओं को इस्राइल के आयरन डोम सिस्टम की टक्कर का नहीं माना जाता। दरअसल, आयरन डोम सिस्टम एक एकीकृत रक्षा प्रणाली है, जो हवाई हमलों को एक साथ रोकने में सक्षम है। यह सिस्टम एक साथ पूरे इस्राइल की सुरक्षा के लिए लगाया गया है। इसकी वजह से ही हमास और हिज्बुल्ला की तरफ से किए गए बड़े मिसाइल और ड्रोन हमलों को इस्राइल नाकाम कर चुका है।     

अब जानें- क्या है गोल्डन डोम, जिसकी दुनिया में फिर छिड़ी चर्चा?
डोनाल्ड ट्रंप ने संसद में दिए अपने भाषण में अमेरिका के 40वें राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के नाम का जिक्र किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1983 में अमेरिका में कूटनीतिक रक्षा पहल (स्ट्रैटेजिक डिफेंस इनीशिएटिव) का एलान किया गया था। इसे मुख्य तौर पर रूस से आने वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों से सुरक्षा के लिए तैयार किया जाना था। हालांकि, अमेरिका इस प्रोजेक्ट को लागू करने में सफल नहीं हो पाया। 

अब करीब 42 साल बाद डोनाल्ड ट्रंप ने फिर ऐसे ही सिस्टम को तैयार करने पहल की है।

दरअसल, सैटेलाइट्स रडार और इंटरसेप्टर्स के जरिए मिसाइलों या दूसरे हवाई खतरों की लोकेशन की जानकारी अलग-अलग बिंदुओं पर भेजती है। ऐसे में अमेरिका की तरफ आने वाले किसी भी खतरे को सबसे पहले देश से दूर ही अमेरिकी सैन्य बेस या नौसैन्य पोत के करीब ही खत्म करने की कोशिश की जाती है। यहां से जरूरी मिसाइलों या लड़ाकू विमानों के जरिए हवाई खतरों को नष्ट किया जाता है।

यहीं से गोल्डन डोम सिस्टम का अगला काम यहीं से शुरू होता है। दरअसल, इस्राइल के सिस्टम का ही उदाहरण ले लें तो इस सिस्टम में तीन हिस्से होते हैं। पहला- रडार, दूसरा- कमांड पोस्ट और तीसरा- लॉन्चर। 

  • रडार के जरिए डोम सिस्टम यह तय करता है कि आसमान में दिख रही चीज कितना बड़ा खतरा है, इसकी क्या गति है और इसे खत्म करने के लिए किस गति की और कितनी ताकत की जरूरत होगी। 
  • यह पूरी जानकारी गोल्डन डोम के दूसरे हिस्से के तौर पर काम कर रहे कमांड पोस्ट को लगातार मिलती है, जो कि खतरे को भांपकर लॉन्चर को सिग्नल देता है और यह लॉन्चर यूनिट इंटरसेप्टर मिसाइलों के जरिए हमला करता है और खतरे को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर देता है।  
  • लॉन्चर दो तरह के होते हैं- स्टेश्नरी और मोबाइल। स्टेश्नरी एक ही जगह पर फिटेड सिस्टम होता है और मोबाइल को एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाया जाता है। मिसाइलें हवा में सीधे ऊपर की तरफ छोड़ी जाती हैं। उसके बाद ये अपने निशाने को ढूंढते हुए दिशा बदल लेती है। ये मिसाइलें हीट या मोशन सेंसिंग होती हैं और हवा में ही खतरों को नष्ट कर देती है। वहीं कमांड पोस्ट से इस पूरी प्रकिया पर नजर रखी जाती है।
  • रिपोर्ट्स की मानें तो अमेरिका अपने गोल्डन डोम सिस्टम के लिए कई तरह की मिसाइलों को रखने की योजना बना रहा है। यह मिसाइलें जरूरत के हिसाब से छोटे या लंबे रेंज की मिसाइलों को खत्म कर देंगी। इतना ही नहीं हाइपरसोनिक गति से आने वाली मिसाइलों के लिए अलग तरह के हथियार और फ्लेयर तैयार किए जा सकते हैं।
  • बताया जाता है कि फिलहाल अमेरिका गोल्डन डोम में पहले से मौजूद मिसाइल रक्षा प्रणालियों को एकीकृत कर इस्तेमाल करेगा। जैसे कि पैट्रियट डिफेंस सिस्टम और उन्नत रडार। हालांकि, समय के साथ गोल्डन डोम की क्षमता को बढ़ाने का काम किया जाएगा। 

इस्राइल के मुकाबले काफी अलग होगा अमेरिका का गोल्डन डोम
इस्राइल का आयरन डोम सिस्टम छोटे से देश की रक्षा के लिए बना है। वहीं अमेरिका क्षेत्रफल में इस्राइल से 430 गुना और जनसंख्या में 35 गुना बड़ा है। यानी अमेरिका में इस्राइल जैसे डिफेंस सिस्टम को तैनात करना बड़ी चुनौती होगी। 

इस्राइल ने अमेरिका के सहयोग से राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम को ध्यान में रखते हुए आयरन डोम को रॉकेट हमलों का मुकाबला करने के लिए विकसित किया है। इस्राइल साल 2011 से इस प्रणाली का इस्तेमाल कर रहा है। इस्राइल की सेना और सरकार दावा करती है कि आयरन डोम दुनिया का सबसे विकसित एयर डिफेंस सिस्टम है और इसका सक्सेस रेट 90 प्रतिशत से भी ज्यादा है।

Bureau Report

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