भीलवाड़ा के बिजौलिया थाना क्षेत्र के सीता कुंड महादेव जंगल में पत्थरों के नीचे दबाए गए और मुंह में पत्थर डालकर फेवीक्विक से चिपकाए गए नवजात शिशु के मामले में पुलिस ने चार दिन की गहन जांच के बाद बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने भैंसरोड़गढ़ निवासी एक महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। यह घटना न केवल मासूम के साथ अमानवीयता का उदाहरण है, बल्कि सामाजिक दबाव और रिश्तों की जटिल सच्चाई को भी उजागर करती है। फिलहाल शिशु का इलाज जिला चिकित्सालय की गहन चिकित्सा इकाई में जारी है।
ग्रामीणों की सतर्कता से बची मासूम की जान
जानकारी के मुताबिक, 23 सितंबर की दोपहर ग्रामीणों को जंगल में पत्थरों के नीचे दबा एक नवजात मिला। उसके मुंह में पत्थर ठूंसे गए थे और उन्हें फेवीक्विक से चिपका दिया गया था ताकि रोने की आवाज बाहर न जा सके। ग्रामीणों की तत्परता और पुलिस को दी गई सूचना से बच्चे की जान बच पाई। बाल कल्याण समिति ने नवजात का नाम ‘तेजस’ रखा है!
पुलिस की तत्परता से मिली सफलता
आसूचना अधिकारी सुरेश कुमार मीणा की जानकारी और मांडलगढ़ एएसआई रामलाल के नेतृत्व में गठित टीम ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की। जांच में सामने आया कि आरोपी महिला कुछ समय से बूंदी जिले के बसोली थाना क्षेत्र में रह रही थी, जहां उसकी बेटी ने डिलीवरी की थी।
अवैध रिश्ते का परिणाम निकला बच्चा
पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया कि नवजात अवैध रिश्ते का परिणाम है। युवती के अपने ही रिश्ते में भाई (मामा का बेटा) से संबंध बने और वह गर्भवती हो गई। जब पांच माह बाद यह बात माता-पिता को पता चली तो परिवार ने बदनामी के डर से घर छोड़ दिया और बूंदी जिले में मजदूरी करने लगा।
गर्भ गिराने की कोशिशें असफल रहीं और आखिरकार बच्चा पैदा हुआ। लेकिन परिवार ने उसे बोझ और बदनामी का कारण मानते हुए जान से मारने की योजना बनाई। जन्म के 19 दिन बाद शिशु को जंगल में ले जाकर उसके मुंह में पत्थर और फेवीक्विक डालकर पत्थरों के नीचे दबा दिया गया।
पुलिस जांच जारी
पुलिस ने युवती और उसके पिता दोनों को हिरासत में लिया है। डीएनए जांच की तैयारी की जा रही है ताकि पूरे मामले की पुष्टि हो सके। पुलिस का कहना है कि घटना की पूरी परतें धीरे-धीरे सामने आ रही हैं और जल्द ही आधिकारिक खुलासा कर दिया जाएगा।
Bureau Report
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