ग्रहण काल और उसके सूतक को बेहद अशुभ माना गया है, इतना कि इस दौरान कुछ भी खाना-पीना वर्जित होता है. हिंदू धर्म में मान्यता है कि ग्रहण के प्रभाव से खाने-पीने की चीजें विषाक्त या खराब हो जाती हैं. ऐसे में दूध, दही, पीने का पानी और अन्य पके हुए भोजन को दुष्प्रभाव से बचाने के लिए उसमें तुलसी की पत्तियां डाल दी जाती हैं.
तुलसी बेहद पवित्र होती है और इसमें चमत्कारिक औषधीय गुण होते हैं, जिसके कारण तुलसी की पत्तियां कई दिन तक खराब नहीं होती हैं. जानिए 3 मार्च को लग रहे चंद्र ग्रहण का सूतक काल कितने बजे से शुरू हो रहा है और सूतक शुरू होने से पहले क्या जरूरी काम कर लेने चाहिए.
ग्रहण का सूतक शुरू होने से पहले कर लें ये काम
चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले लगता है, लिहाजा 3 मार्च को चंद्र ग्रहण का सूतक सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर लग जाएगा. ऐसे में जो लोग सवा 6 बजे के बाद जागते हैं, वे जब तक सोकर उठेंगे, सूतक काल शुरू हो चुका होगा. ऐसे में कल ग्रहण के दौरान दिक्कत ना हो और ग्रहण के दुष्प्रभाव से भी बचा जा सके, इसके लिए आज ही कुछ इंतजाम कर लें.
– चूंकि सूतक और ग्रहण काल में तुलसी को स्पर्श नहीं किया जाता है इसलिए उससे पहले ही तुलसी के पत्तियां तोड़कर, अच्छे से धो लें और फिर उन्हें भोजन, पानी, दूध-दही आदि में डाल दें. रात में भी तुलसी को स्पर्श नहीं करना चाहिए, इसलिए शाम तक यह काम कर लें. ताकि सूतक काल में पानी पीना हो तो पिया जा सके. वरना बिना तुलसी डला हुआ पानी ग्रहण के दौरान नहीं पिया जा सकता. ये गलती शरीर और मन पर बुरा असर डाल सकती है.
– यदि घर में कोई बीमार व्यक्ति है, बुजुर्ग हैं, बच्चे हैं या गर्भवती महिला है तो ग्रहण के सूतक से पहले ही उनके लिए कुछ भोजन बनाकर रख लें और उसमें तुलसी के पत्ते डाल दें. क्योंकि ग्रहण का सूतक लगने के बाद भोजन बनाना वर्जित होता है.
– ग्रहण के दौरान गलती से भी तुलसी को ना छुएं. ये गलती मां लक्ष्मी को नाराज करती है और घर में कंगाली लाती है.
– सूतक शुरू होने से पहले घर में रखे हुए तुलसी के पौधे पर गंगाजल छिड़के और उसके चारों ओर गेरू रंग का लेप लगाएं.
– सूतक और चंद्र ग्रहण काल के दौरान तुलसी के पास बैठकर मंत्र जप करें या ध्यान करें. इससे ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचाव होता है. सकारात्मकता मिलती है.
ग्रहण के बाद जरूर करें ये काम
– ग्रहण के बाद स्नान करें और उसके बाद तुलसी पर गंगाजल छिड़कें. शाम का संध्या वंदन करें, घी का दीपक जलाएं.
– जिन पके हुए भोजन में तुलसी दल ना डाला गया हो उन्हें अलग कर दें, उनका सेवन ना करें.
– स्नान के बाद ही भोजन बनाएं और फिर उसका सेवन करें.
– ग्रहण के बाद दान जरूर करें.
Bureau Report
Leave a Reply