डॉलर के मुकाबले तेजी से नीचे नहीं ग‍िरेगा रुपया! RBI ने उठाया बड़ा कदम, बैंकों से मांगी यह जानकारी

डॉलर के मुकाबले तेजी से नीचे नहीं ग‍िरेगा रुपया! RBI ने उठाया बड़ा कदम, बैंकों से मांगी यह जानकारी

रिजर्व बैंक ऑफ इंड‍िया (RBI) ने बैंकों से विदेशी मुद्रा (Forex Deals) से जुड़े क्लाइंट ट्रांजेक्शन और पोजीशन की ड‍िटेल्‍ड जानकारी मांगी है. आरबीआई (RBI) की तरफ से यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि यह जानकारी म‍िल सके क‍ि क्‍या कोई बड़े लेवल पर भारतीय रुपये के खिलाफ सट्टेबाजी (बेट्स) कर रहा है. रुपया प‍िछले छह महीने के दौरान डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हुआ है. आरबीआई (RBI) बाजार की अस्थिरता को बेहतर तरीके से कंट्रोल करना चाह‍ता है.

प‍िछले छह महीने के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 88 रुपये से नीचे गिरकर 92 रुपये तक पहुंच गया था. एक द‍िन पहले शुक्रवार को ही यह 91.74 पर बंद हुआ. रुपये पर दबाव के अलग-अलग कारण हैं. बड़े कॉरपोरेट्स आने वाले आयात के लिए डॉलर की खरीद कर रहे हैं. ऑफशोर नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) और फॉरवर्ड मार्केट में आर्ब‍िट्राज डील्स हो रही हैं, बैंक अपनी लिमिट के अंदर ट्रेडिंग पोजीशन बढ़ा रहे हैं.

इन कारणों से कमजोर हो रहा रुपया

इसके अलावा जियोपॉलिटिकल टेंशन जैसे ईरान-इजरायल अमेर‍िका की जंग, क्रूड ऑयल की महंगाई, करंट अकाउंट डेफिसिट और विदेशी पोर्टफोलियो इनफ्लो की कमी भी रुपये के टूटने की वजह बना है. प‍िछले द‍िनों भारत और अमेर‍िका के बीच हुई ट्रेड डील से कुछ हद तक राहत म‍िली थी. लेक‍िन मिडिल-ईस्ट संघर्ष से एक बार फ‍िर से दबाव बढ़ गया.

बैंकों को क्या जानकारी देनी होगी?

र‍िजर्व बैंक (RBI) की तरफ से बैंकों को निर्देश दिया गया है क‍ि वे स्पॉट, फॉरवर्ड और ऑफशोर NDF मार्केट में क्लाइंट ट्रांजेक्शन की व‍िस्‍तृत जानकारी दें. खासकर 10 मिलियन डॉलर से बड़े डील में क्लाइंट का नाम और डॉलर खरीदने या बेचने का मकसद बताना जरूरी होगा. इसके साथ ही बैंकों को अपनी ओपन पोजीशन और इंटर-बैंक मार्केट में ग्रॉस बाय-सेल पोजीशन भी रिपोर्ट करनी होंगी.

आरबीआई को कैसे मदद म‍िलेगी?

इस तरह की जानकारी से आरबीआई (RBI) को रुपये की अस्थिरता को समझने और फैसले लेने में मदद करेगा. इससे केंद्रीय बैंक मार्केट में वोलेटिलिटी को कंट्रोल करने के ल‍िए बेहतर तरीके से प्‍लान‍िंग कर सकेगा. एक सीनियर बैंकर ने बताया क‍ि जब आरबीआई (RBI) इस तरह का डेटा मांगता है तो कई बैंक इसे सट्टेबाजी कम करने का इशारा मान लेते हैं. हालांकि कोई फोन या स्‍पष्‍ट निर्देश नहीं आया है. 

आरबीआई (RBI) की तरफ से रुपये की कमजोरी को किसी खास लेवल पर ड‍िफेंड नहीं क‍िया जा रहा. स्पॉट मार्केट में ल‍िक्‍व‍िड‍िटी टाइट होने से आरबीआई (RBI) ने फॉरवर्ड मार्केट में बाय–सेल स्वैप्स के जरिये इंटरफेयर क‍िया है. इस डेटा कलेक्शन के जर‍िये आरबीआई (RBI) और तेज एक्शन ले सकेगा. यद‍ि जियोपॉलिटिकल टेंशन आने वाले समय में भी जारी रही और इनफ्लो कमजोर रहा तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है. 

Bureau Report

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