मिडिल ईस्ट की जंग ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज है. सप्लाई चेन बाधित होने की वजह से दुनिया के तमाम देशों में तेल और गैस की किल्लत हो रही है. भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश की हालात खराब हो चुकी है. पाकिस्तान में तेल की कमी के चलते स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं. बांग्लादेश में पेट्रोल-डीजल की ब्रिकी सीमित कर दी गई है. भारत तक भी इस युद्ध की लपटें पहुंचने लगी है. कच्चे तेल की आसमान छूती कीमत से तेल कंपनियों का बहीखाता बिगड़ रहा है. सरकार ने फिलहाल तेल की बढ़ती कीमत के असर से आम जनता को बचाकर रखा है, लेकिन भारत सरकार और तेल कंपनियां जब इस दबाव को झेल नहीं पाएंगी और हाथ खड़े कर देंगी तो इसका असर आम जनता पर पहुंचेगा. मिडिल ईस्ट की जंग से भारत खुद को कैसे बचाएगा ? क्या है भारत सरकार की तैयारी ? भारत के पास कितने दिन का तेल और गैस है ? भारत में कब तक तेल की कीमतों को बढ़ने से रोका जा सकता है ? समझने की कोशिश करते हैं.
पाकिस्तान-बांग्लादेश में तेल पर हाहाकार
तेल की कीमत में लगातार हो रही बढ़ोतरी के चलते भारत के पड़ोसी देशों में भयंकर स्थिति बन गई है.पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम में 55 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है,पेट्रोल 336 और डीजल 321 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है. तेल संकट की वजह से पाकिस्तान में सरकारी दफ्तर बंद कर दिए ए हैं, वहां वर्क फ्रॉम होम कर दिया गया है. दो हफ्ते के लिए स्कूल बंद करने का ऐलान किया गया है. सरकारी कर्मचारियों की सैलरी रोक दी गई है. बांग्लादेश में सरकार ने तेल पर पाबंदी लगा दी है. बांग्लादेश सरकार ने फ्यूल की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए राशनिंग सिस्टम लागू किया है, जिसके मुताबिक वाहनों को सीमित मात्रा में ही फ्यूल दिया जा रहा है.
मिडिल ईस्ट जंग से क्रूड ऑयल संकट क्यों पैदा हुआ ?
मिडिल ईस्ट तेल और गैस का प्रमुख उत्पादक और सप्लायर हैं. भारत अपनी गैस जरूरत का 80 फीसदी मिडिल ईस्ट से आयात करता है. सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत जैसे देशों से भारत LPG आयात करता है. वहीं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जहां से दुनिया के तेल का 20 फीसदी और भारत के तेल आयात का 50 फीसदी गुजरता है, वो रास्ता युद्ध की चपेट में आ गया है. जिस रास्ते से पहले रोजाना 137 जहाज गुजरते थे, वहां से अब 2 से 3 जहाज गुजर रहे हैं. ऐसे में ग्लोबल सप्लाई चेन टूटना और कीमतों में आग लगना तय था. कच्चे तेल की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, हालांकि 10 मार्च को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद तेल की कीमत गिरकर 89 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई. दरअसल ट्रंप ने भरोसा दिलाया कि ईरान की जंग जल्द खत्म होगी. जिसके बाद तेल में थोड़ी गिरावट देखने को मिली है.
तेल और गैस संकट का भारत पर असर ?
भारत तेल और गैस दोनों के लिए आयात पर निर्भर है. ऐसे में मिडिल ईस्ट की जंग का असर भारत पर पड़ रहा है. तेल की बढ़ती कीमत को सरकार ने फिलहाल रोक रखा है, लेकिन गैस सिलेंडर के रेट बढ़ा दिए गए हैं. शनिवार को ही इंडियन ऑयल ने रसोई गैस सिलेंडर के दाम में 60 रुपये और कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम में 115 रुपये बढ़ा दिए है. ऊर्जा संकट और एलपीजी की आपूर्ति पर दबाव को देखते हुए सरकार ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी प्रोडक्शन बढ़ाने को कहा है. साथ ही साथ एलपीजी की जमाखोरी रोकने के लिए बुकिंग के नियम बदलकर इसे 21 से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है. भारत दुनिया भर के 41 देशों से तेल आयात करता है. अगर भारत के स्ट्रैटेजिक रिजर्व की बात करें तो ये लगभग 50 दिन के करीब है.
भारत के पास क्या है बैकअप प्लान ?
भारत की मुश्किल तेल की उपलब्धता से ज्यादा इसकी बढ़ती कीमत है. भारत ने रूसी तेल से आयात को बढ़ा दिया है, लेकिन अब उसे पहले की तरह रूसी तेल पर डिस्काउंट नहीं मिल रहा है. अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते समंदर में फंसे रूसी टैंकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं, जो अगले एक से दो हफ्ते में पहुंच जाएंगे. रूसी तेल से भारत अपने जरूरतों को पूरा करने की कोशिश कर रहा है.भारत के कुल आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी बढ़कर 43 फीसदी हो गई. सिर्फ रूस ही नहीं बल्कि भारत अन्य वैकल्पिक स्रोतों की ओर भी देख रहा है. ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, नार्वे, अल्जीरिया और कनाडा जैसे देशों से गैस खरीद की बातचीत चल रही है. भारत अभी 195 MMSCMD गैस इंपोर्ट करता है, जिसमें से सिर्फ 60 MMSCMD गैस कतर से सप्लाई होती है. चूंकि कतर जंग की चपेट में है, ऐसे में भारत वैकल्पिक सोर्स की ओर बढ़ रहा है.
भारत कैसे निपटेगा इस संकट से
भारत ने बीते कुछ वर्षों से अपनी रणनीति बहुत समझदारी से तय कर रखी है. वो तेल या गैस के लिए किसी एक-दो देशों पर निर्भर नहीं है. 41 से ज्यादा देशों से तेल खरीदता है. आयात का विविधीकरण के अलावा भारत अपनी मजबूत कूटनीति से तेल और गैस सप्लाई के संकट को दूर करने की कोशिश कर रहा है. भारत लगातार IEA, OPEC और IEF जैसे संगठनों के साथ तालमेल बिठा रहा है. भारत के पास तेल का प्रमाणित भंडार 423.1 मिलियन मीट्रिक टन और प्राकृतिक गैस का प्रमाणित भंडार 595.4 बिलियन क्यूबिक मीटर है, जो संकट की घड़ी में बैकअप प्लान तैयार करने की मोहलत देता है. मिडिल ईस्ट देशों और होर्मुज रूट के अलावा दूसरे रास्तों से तेल की सप्लाई जारी रखने की तैयारी की जा रही है.
Bureau Report
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