जब तक बोस बंगाल के गवर्नर रहे, ममता सरकार के साथ उनकी नहीं बनी. हमेशा दोनों एक दूसरे पर बरसते रहे लेकिन सीवी आनंद बोस के इस्तीफे के बाद दोनों मिले तो मुस्कुरा रहे थे. ममता खुद बोस से मिलने गईं, उन्हें विद्वान और महत्वपूर्ण माना. आगे ममता ने आरोप लगाया कि राज्य और राज्य के लोगों को बांटने की कोशिश की जा रही है. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले गवर्नर बदलने के फैसले पर सवाल उठाते हुए ममता ने पूछा कि कुछ गड़बड़ या संदेहपूर्ण नहीं था तो मौजूदा गवर्नर को बदला क्यों गया?
वैसे, हाल में कई राज्यों के गवर्नर बदले गए हैं लेकिन बोस का इस्तीफा उसी समय आ गया. उन्होंने बताया है कि इस्तीफा पूरी तरह सोच-समझकर दिया है. वजह अभी नहीं, सही समय पर सार्वजनिक होंगे. इसके बाद कई तरह की बातें होने लगीं. ममता ने चौंकाने वाला घटनाक्रम बताते हुए इसके पीछे केंद्र से ‘प्रेशर’ का दावा किया.
अब तमिलनाडु के पूर्व राज्यपाल आर एन रवि ने बोस की जगह ली है. बोस 2022 से गवर्नर के पद पर थे और ममता सरकार के साथ टेंशन और सहयोग दोनों रहा. अब नए गवर्नर रवि ऐसे हैं जो राज्य की गैर-भाजपा सरकार के साथ अपने आक्रामक तेवर के लिए जाने जाते हैं.
बंगाल को बांटना कौन चाहता है?
हां, ममता ने चुनाव से ठीक पहले इस घटनाक्रम के पीछे ‘भाजपा का एजेंडा’ होने का संदेह जताया है. ममता ने आरोप लगाया कि राज्य के लोगों को बांटने की कोशिश की जा रही है. SIR के खिलाफ अपने धरने के आखिरी दिन बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘बंगाल को बांटने, यहां के लोगों को बांटने का खेल बंद होना चाहिए… जैन, बौद्ध, आदिवासी, मुस्लिम, ईसाई, सिख सभी, सभी धर्मों, वर्गों, पंथों को इस बारे में सोचना चाहिए. अगर कुछ गड़बड़ नहीं था तो उन्होंने एक महीने पहले गवर्नर को क्यों बदला?’
धरना खत्म करने के बाद ममता बोस से मिलने गईं. सोशल मीडिया पोस्ट में ममता ने लिखा, ‘धर्मतला में पांच दिन का धरना खत्म होने के बाद मैंने पश्चिम बंगाल के पूर्व गवर्नर सी वी आनंद बोस से निजी तौर पर मिलने के लिए कुछ समय निकाला.’ उन्होंने आगे कहा, ‘डॉ. बोस एक विद्वान हैं. उनके कार्यकाल के दौरान मुझे हमारे राज्य और लोगों की भलाई और तरक्की से जुड़े मामलों पर मिलकर काम करने का मौका मिला. मैंने हमेशा ऐसे संवाद को अहमियत दी है.’
ममता ने बोस की भविष्य की भूमिका के लिए शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा, ‘मैं डॉ. बोस को उनके भविष्य के सभी कार्यों के लिए शुभकामनाएं देती हूं. मुझे भरोसा है कि अपने ज्ञान और अनुभव से वह आने वाले दिनों में जो भी जिम्मेदारी लेंगे, उसे पूरा करेंगे.’
उत्तर बंगाल की चर्चा क्यों?
ममता बनर्जी भाजपा पर बंगाल को बांटने की कोशिश का आरोप लगाती रहती हैं. वैसे, आधिकारिक तौर पर इस पर कुछ नहीं कहा गया है. यह राजनीतिक रूप से विवादास्पद मुद्दा है. जब भी हाल के वर्षों में टीएमसी की तरफ से ऐसे आरोप लगे, भाजपा के दिलीप घोष जैसे नेताओं के बयान आए कि उत्तर बंगाल या किसी अन्य क्षेत्र को बांटने का कोई मुद्दा ही नहीं है. हां, कुछ नेताओं के बयान जरूर मीडिया में आ चुके हैं जिसमें उन्होंने कहा है कि उत्तर बंगाल में पिछड़ापन बहुत है और विकास कम हुआ है.
उत्तर बंगाल में भाजपा की स्थिति
इस तरह के दावे के पीछे एक वजह है. सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार जैसे क्षेत्रों में भाजपा का बेस मजबूत है. पार्टी को नॉर्थ बंगाल क्षेत्र से लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनावों में अच्छी सफलता मिली है.
Bureau Report
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