लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को केंद्र सरकार ने खत्म करने का फैसला किया है. गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हुई उनकी हिरासत को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया है. इसके साथ ही उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है. सरकार का कहना है कि ये कदम लद्दाख में शांति और स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है.
गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि सरकार लद्दाख में भरोसे और संवाद का माहौल बनाना चाहती है. इसके लिए सभी पक्षों के साथ रचनात्मक बातचीत जरूरी है. मंत्रालय का मानना है कि बातचीत और सहयोग के जरिए क्षेत्र से जुड़े मुद्दों का समाधान निकाला जा सकता है. इसी सोच के तहत वांगचुक की हिरासत समाप्त करने का फैसला लिया गया है.
लद्दाख की सुरक्षा और विकास है पहली प्राथमिकता
सरकार ने ये भी दोहराया कि लद्दाख की सुरक्षा और विकास उनकी प्राथमिकता है. मंत्रालय के मुताबिक क्षेत्र की समस्याओं पर चर्चा के लिए पहले से ही एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है. इसके अलावा बाकी मंचों के माध्यम से भी संवाद जारी रहेगा. सरकार को उम्मीद है कि इन प्रयासों से लद्दाख के मुद्दों पर सकारात्मक समाधान निकल सकेगा.
दरअसल ये पूरा मामला पिछले साल सितंबर में लेह में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा हुआ है. उस समय बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे थे और कई जगह तनाव की स्थिति बन गई थी. इन प्रदर्शनों के बाद प्रशासन ने स्थिति को कंट्रोल करने के लिए सख्त कदम उठाए. उसी दौरान वांगचुक को हिरासत में लिया गया था.
नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत किया गया था गिरफ्तार
इसके बाद उन्हें नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत गिरफ्तार कर राजस्थान की जोधपुर जेल भेज दिया गया था. सरकार का कहना था कि यह कदम सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया था. अब हिरासत खत्म होने के बाद माना जा रहा है कि लद्दाख से जुड़े राजनीतिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर चर्चा फिर से तेज हो सकती है.
Bureau Report
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