असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ आरोप लगाने के चलते एफआईआर झेल रहे कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने इसे राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता का केस करार दिया. कोर्ट ने कहा कि इस केस में आरोप-प्रत्यारोप राजनीति से प्रेरित हैं. पवन खेड़ा को हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी नहीं है. कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि पवन खेड़ा ने अपनी पार्टी को राजनीतिक फायदा पहुंचाने के लिए यह बयान दिया, वहीं मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी ऐसे बयान दिए जो संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं हैं.
HC के फैसले पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में गोहाटी हाई कोर्ट के फैसले पर भी सवाल खड़े किए. जस्टिस एके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदुरकर ने कहा कि हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद सभी तथ्यों का सही तरह से मूल्यांकन नहीं किया. आरोप साबित करने का बोझ पवन खेड़ा पर डाल दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्टिकल 21 के तहत मिला व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार आप में एक बेहद महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार है. सिर्फ पुख्ता वजह होने पर ही इसे छीना जा सकता है. ऐसे किसी मामले में नहीं, जहां राजनीतिक पहलू साफ नजर आ रहे हों.
पवन खेड़ा को इन शर्तों का पालन करना होगा
सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को जमानत देते समय कुछ शर्त भी लगाई है. कोर्ट ने पवन खेड़ा से कहा कि वो जांच में सहयोग करें. जब जरूरत हो, तब पूछताछ के लिए पुलिस के सामने हाजिर हों. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि पवन खेड़ा जांच / ट्रायल के दौरान सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे. वो बिना कोर्ट की अनुमति के देश छोड़कर नहीं जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को भी इस बात की छूट दी है कि अगर वह जरूर समझे तो जमानत के लिए दूसरी शर्तें भी लगा सकता है.
पवन खेड़ा पर आरोप
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि असम की मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा के पास अलग-अलग देशों के कई पासपोर्ट हैं. खेड़ा ने उनके पास विदेशों में संपत्ति होने का भी आरोप लगाया था. इसके चलते असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ झूठे आरोप लगाने, मानहानि करने ,धोखाधड़ी, जालसाजी के आरोप में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी. गोहाटी हाई कोर्ट से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
Bureau Report
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