निर्जला एकादशी का व्रत सबसे महत्वपूर्ण एकादशी व्रत है. क्योंकि यह व्रत करने से साल की सभी 24 एकादशी व्रत करने का फल मिलता है. यह व्रत ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को रखा जाता है. इस साल यह व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 24 जून 2026 की शाम 06:12 बजे एकादशी प्रारंभ होगी और 25 जून 2026 की रात 08:09 बजे समाप्त होगी.
निर्जला एकादशी व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना गया है क्योंकि इस व्रत में अन्न-जल ग्रहण नहीं किया जाता है. यह व्रत रखने के नियमों को लेकर यदि आपको भी कन्फ्यूजन है तो उन्हें दूर कर लें.
निर्जला एकादशी के व्रत में शाम को पानी पी सकते हैं?
नहीं, धर्म-शास्त्रों के अनुसार निर्जला एकादशी के व्रत में अन्न-जल ग्रहण नहीं किया जाता है. लिहाजा इसमें पूरे दिन या शाम को भी पानी नहीं पिया जाता है. व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद ही होता है. तभी पानी पीकर और भगवान का प्रसाद तुलसी दल खाकर व्रत का पारण करना चाहिए.
निर्जला एकादशी व्रत में शाम को क्या खाना चाहिए?
निर्जला एकादशी व्रत में कुछ खाया नहीं जाता है. हां, बीमार व्यक्ति या गर्भवती महिलाएं फलाहार ले सकती हैं. वहीं सामान्य लोग शाम को भी कुछ नहीं खा सकते हैं. हां, अन्य एकादशी व्रत में फल, दूध, मखाने की खीर, आलू, साबुदाना खिचड़ी, कुट्टु के आटे से बने पूरी आदि खा सकते हैं.
निर्जला एकादशी व्रत का पारण कब करें?
निर्जला एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि को 26 जून 2926, शुक्रवार की सुबह 06:01 बजे से 08:39 बजे तक किया जा सकेगा.
निर्जला एकादशी का व्रत कितने घंटे का होता है?
निर्जला एकादशी व्रत 24 घंटे से ज्यादा का होता है. यह दशमी तिथि की रात से ही प्रारंभ हो जाता है. शाम ढलने के कुछ देर तक सात्विक भोजन कर लें, इसके बाद कुछ खाएं-पिएं नहीं. अगले दिन एकादशी को निर्जला रहें और उसके अगले दिन सूर्योदय के बाद ही स्नान के बाद पारण करें.
Bureau Report
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