दिल्ली में नाला सफाई के दावों की खुली पोल, बुराड़ी में पहली बारिश से पहले ही खतरे की घंटी

दिल्ली में नाला सफाई के दावों की खुली पोल, बुराड़ी में पहली बारिश से पहले ही खतरे की घंटी

राजधानी दिल्ली में मानसून की दस्तक से पहले प्रशासन के बड़े-बड़े दावों की पोल खुलती नजर आ रही है. उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी इलाके का अहम ‘लाइफ लाइन’ नाला सफाई के अभाव में एक खतरनाक दलदल में तब्दील हो चुका है. स्थिति इतनी डरावनी है कि इस गंदे नाले के ऊपर जमी गाद पर छोटे-छोटे बच्चे खेलते हुए नजर आ रहे हैं, जो किसी भी पल एक बड़े हादसे का कारण बन सकता है.

दिल्ली में हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई को लेकर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन वादों से कोसों दूर है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण है उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी इलाके का लाइफ लाइन नाला। यह नाला दिल्ली सरकार के फ्लड विभाग (Flood Department) के अंतर्गत आता है और बुराड़ी क्षेत्र से गुजरते हुए दर्जनों कॉलोनियों और गांवों को आपस में जोड़ता है. मानसून बिल्कुल सिर पर है, लेकिन नाले में हर तरफ गाद, गंदगी और कचरे का अंबार लगा हुआ है, जिससे पानी का बहाव पूरी तरह से बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है.

बंगाली कॉलोनी के पास हालात सबसे ज्यादा खौफनाक
इस नाले की सबसे डरावनी तस्वीर बंगाली कॉलोनी के पास देखने को मिल रही है. यहां नाले के ऊपर सिल्ट (गाद) जमकर सख्त हो गई है और एक खतरनाक दलदल का रूप ले चुकी है. हैरानी और चिंता की बात यह है कि आस-पास के छोटे-छोटे मासूम बच्चे बेखौफ होकर इसी सिल्ट के ऊपर खेल रहे हैं. उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं है कि उनके पैरों के ठीक नीचे गहरा और जहरीला नाला बह रहा है. स्थानीय निवासियों के मुताबिक, अगर खेलते समय किसी भी बच्चे का पैर फिसला या गाद का हिस्सा धंस गया, तो एक बड़ा और जानलेवा हादसा होने में जरा भी देर नहीं लगेगी.

करोड़ों के टेंडर, लेकिन काम के नाम पर खानापूर्ति
स्थानीय लोगों में प्रशासन की इस लापरवाही को लेकर भारी रोष है. उनका सीधा आरोप है कि हर साल बारिश से पहले नालों की सफाई के लिए करोड़ों रुपये के टेंडर पास किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर केवल खानापूर्ति होती है. बुराड़ी के लोगों को अब यह डर सता रहा है कि अगर समय रहते इस नाले से गाद नहीं निकाली गई, तो पहली ही बारिश में दर्जनों कॉलोनियों और गांवों में भीषण जलभराव हो जाएगा, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से ठप पड़ सकता है.

प्रशासन की चुप्पी पर उठते तीखे सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों का बजट पास होने के बाद भी नाले की सफाई का काम अधूरा क्यों पड़ा है? क्या फ्लड विभाग और संबंधित अधिकारी नींद से तब जागेंगे जब कोई मासूम इस लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगा? फिलहाल, फाइलों में दर्ज सरकारी दावों और बुराड़ी की इस खौफनाक जमीनी हकीकत के बीच का अंतर साफ तौर पर देखा जा सकता है, जहां लोग मानसून से पहले ही खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं.

Bureau Report

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*