ईरान-अमेरिका युद्ध और होर्मुज पर नाकेबंदी की वजह से कच्चे तेल ने खूब तमाशा किय़ा. तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल का आंकड़ा छूने लगी. अब युद्धविराम और दोनों देशों के बीच बनती सहमति के चलते तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखी जा रही है. 6 जुलाई को कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर से नीचे खिसक गई.
ग्लोबल मार्केट में 6 जुलाई, सोमवार को कच्चे तेल के दाम में बड़ा उलटफेर दिखा. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई. दावा किया जा रहा है कि होर्मुज में हालात सामान्य है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग दिखी. होर्मुज से समुद्री यातायात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है.जिसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में मामूली तेजी फिर से लौटी, हालांकि ये तेजी बहुत सामान्य थी. ब्रेंट क्रूड में देखते ही देखते 0.10 डॉलर की तेजी आई और WTI में 0.16 डॉलर का बढ़त देखने को मिला. ब्रेंट क्रूड ऑयल 72.20 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. WTI ऑयल 68.92 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.
ओपेक के फैसले का क्या होगा तेल के बाजार पर असर
OPEC+ देशों के समूह में ऑयल प्रोडक्शन बढ़ाने का फैसला किया है. अगस्त से प्रोडक्शन टारगेट को 1,88,000 बैरल प्रति दिन (bpd) बढ़ाने पर इन देशों से सहमति जताई है. ओपेक प्लस देशों में शामिल सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, अल्जीरिया, कजाकिस्तान और ओमान ने ऑयल उत्पादन को लगभग 8,00,000 bpd बहाल कर दिया है. OPEC+ साल 2023 के तेल उत्पादन कटौती के फैसले को धीरे-धीरे समाप्त कर रहे हैं. अगस्त की बढ़ोतरी इस प्रक्रिया का दूसरा अंतिम चरण होगा. सितंबर 2026 में भी इस योजना के अंतिम चरण को पूरा किया जाएगा. तेल की सप्लाई बढ़ने से कीमतों पर असर दिखेगा. ऑयल प्रोडक्शन बढ़ने से मार्केट में तेल की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे कीमतों में और कमी आने की संभावना है.
Bureau Report
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