सालाना अमरनाथ यात्रा को शुरू हुए अभी पहला हफ्ता ही बीता है, लेकिन बाबा बर्फानी के भक्तों के लिए एक परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है. पवित्र अमरनाथ गुफा के अंदर प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग यात्रा के शुरुआती 5 दिनों में ही लगभग पूरी तरह से लुप्त यानी अंतर्ध्यान हो गया है.
जानकारों और पर्यावरणविदों का कहना है कि इसके पीछे बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग और पवित्र गुफा के आसपास इंसानों की अत्यधिक आवाजाही से पैदा हुई गर्मी जिम्मेदार है. पिछले तीन सालों से ये देखा जा रहा है कि पवित्र हिमलिंग एक हफ्ते से ज्यादा समय तक नहीं टिक पा रहा है.
मई महीने में 7 फीट का था पवित्र हिमलिंग
अगर सरकारी आंकड़ों और जमीनी रिपोर्ट की बात करें, तो स्थिति वाकई चिंताजनक है. मई महीने की शुरुआत में जब अमरनाथ गुफा की तस्वीरें सामने आई थीं, तब इस पवित्र शिवलिंग की ऊंचाई करीब 7 फीट थी.
लेकिन जुलाई का पहला हफ्ता आते-आते यह घटकर मात्र 1% ही रह गया है. यानी मौसम के बदलते मिजाज और बढ़ते तापमान के कारण पवित्र शिवलिंग 99% तक पिघल चुका है. हालांकि, इसके बावजूद भोलेनाथ के भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ है और 57 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा बिना किसी रुकावट के लगातार जारी है.
‘बाबा तो अंतर्ध्यान हो गए, पर हमारी आस्था अटूट है’
पवित्र गुफा से दर्शन करके लौटे श्रद्धालुओं के चेहरों पर बाबा के अंतर्ध्यान होने का थोड़ा मलाल जरूर है, लेकिन उनकी आस्था में कोई कमी नहीं आई है. लुधियाना से 52 लोगों के जत्थे के साथ आए भक्त जतिंदर दुल्लत और शशांक गुप्ता ने बताया कि प्रशासन की तरफ से सुरक्षा और रहने-खाने के इंतजाम बेहद शानदार हैं.
शशांक ने कहा कि बाबा जी अब अंतर्ध्यान हो चुके हैं और वहां सिर्फ उनके होने का थोड़ा सा ही निशान बचा है. लेकिन हमारा मुख्य मकसद बाबा के दरबार में आकर अपनी हाजिरी लगाना था, जो हमने बहुत अच्छे से पूरी की.
गर्मी और भारी भीड़ ने बढ़ाई गुफा की तपिश
यात्रा पर आए एक अन्य श्रद्धालु अमन चावला और दिव्यांशु खन्ना ने वहां के माहौल के बारे में विस्तार से बताया. अमन का कहना था कि इस बार गुफा के आसपास गर्मी थोड़ी ज्यादा है और भीड़ भी बहुत बढ़ गई है.
उनके अनुसार, अगर प्रशासन इस यात्रा को जून के शुरुआती हफ्ते में ही शुरू कर देता, तो ज्यादा से ज्यादा भक्तों को बाबा के पूर्ण रूप के दर्शन मिल पाते. वहीं दिव्यांशु ने बताया कि बालटाल मार्ग से नीचे आते समय भक्तों की 3 से 4 किलोमीटर लंबी लाइन लगी हुई थी. एक ही दिन में 13,000 से 20,000 लोगों के गुफा में प्रवेश करने से वहां बहुत ज्यादा बॉडी हीट पैदा हो रही है.
पर्यावरणविदों ने जताई गहरी चिंता, बताए मुख्य कारण
पर्यावरण विशेषज्ञों और जलवायु वैज्ञानिकों ने हिमलिंग के इतनी जल्दी पिघलने पर वैज्ञानिक कारण सामने रखे हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, कश्मीर के इस नाजुक पहाड़ी इलाके में गर्मियों के दौरान तापमान लगातार बढ़ रहा है और हीटवेव चल रही है.
इसके कारण गुफा के अंदर का तापमान शून्य डिग्री से नीचे नहीं रह पाता, जो बर्फ को बनाए रखने के लिए जरूरी है. इसके अलावा, सर्दियों में कम बर्फबारी होने की वजह से पहाड़ों से ठंडा पानी नहीं मिल रहा है.
साथ ही, इंसानी गतिविधियों से उड़ने वाली धूल और प्रदूषण जब आसपास के ग्लेशियरों पर जमते हैं, तो बर्फ काली पड़ जाती है और गर्मी को ज्यादा सोखकर तेजी से पिघलने लगती है.
Bureau Report
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