क्या बांकीपुर सीट से प्रशांत किशोर को वाक ओवर दे रही है बीजेपी, अगर ऐसा है तो इसके पीछे की क्या हो सकती है रणनीति?

क्या बांकीपुर सीट से प्रशांत किशोर को वाक ओवर दे रही है बीजेपी, अगर ऐसा है तो इसके पीछे की क्या हो सकती है रणनीति?

बांकीपुर सीट पर हो रहे उपचुनाव में बीजेपी ने जिस तरह से बचकाना रवैया अपनाया है, उससे विरोधी ही नहीं, समर्थक भी हतप्रभ हैं. राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से खाली हुई सीट से भारतीय जनता पार्टी ने सबसे पहले अभिषेक कुमार बंटी को चुनाव मैदान में उतारा था. उन्होंने नामांकन भी दाखिल कर दिया था, लेकिन कुछ घंटों में ही अपना नामांकन वापस ले लिया. अब नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा गया है. अभिषेक कुमार बंटी की उम्मीदवारी वापस लेने के बारे में कहा जा रहा है कि उनके घरवाले चारा घोटाले में अभियुक्त रह चुके हैं और प्रशांत किशोर इसी बात का खुलासा करने के लिए प्रेस कांफ्रेंस करने वाले थे. आनन-फानन नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया गया और आज नामांकन के ​अंतिम दिन वे परचा दाखिल करने वाले हैं. भरोसेमंद सूत्रों का यह भी कहना है कि बीजेपी ने अभिषेक कुमार बंटी के बाद ऋतुराज सिन्हा को मैदान में उतारने की सोची थी, लेकिन फर्स्ट चॉइस न होने के कारण उन्होंने मना कर दिया था. एक ऐसी सीट पर, जिसके बारे में कहा जाता है कि भाजपा यहां से कुत्ता और बिल्ली को भी खड़ा कर दे तो जीत जाएगी, वहां पर प्रत्याशी के चयन में बीजेपी की ओर से इतनी बड़ी चूक कैसे हो सकती है? और सबसे बड़ा सवाल, क्या यह चूक ही है या फिर राजनीति की वो चाल है, जो अभी किसी को समझ में नहीं आ रहा?

प्रशांत किशोर को वाक ओवर क्यों देगी भाजपा?

राजनीति में इस बात को कन्फर्म तरीके से नहीं कहा जा सकता है कि भारतीय जनता पार्टी प्रशांत किशोर को वाक ओवर दे रही है और वो भी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की खाली हुई सीट पर. भाजपा वैसे तो इस परंपरागत सीट को हाथ से नहीं जाने देना चाहेगी, लेकिन राजनीति में कई बार वो होता है, जो दिखता नहीं है और जो दिखता है, वो होता नहीं है. यह भी हो सकता है कि अगर प्रशांत किशोर को वाक ओवर देना ही था तो कोई और सीट इसके लिए मुफीद हो सकती थी. बांकीपुर ही क्यों? यह सबसे बड़ा सवाल है. वैसे, देखा जाए तो प्रशांत किशोर अगर विधानसभा पहुंच जाते हैं तो तेजस्वी यादव को विपक्ष में कड़ी टक्कर मिल सकती है. प्रशांत किशोर मुखर वक्ता हैं और वाकपटुता के धनी माने जाते हैं. इससे विपक्ष में तेजस्वी यादव के एकछत्र राज को चुनौती मिल सकती है. प्रशांत किशोर अगर विधानसभा पहुंच गए तो मुसलमान वोटों में सेंधमारी कर सकते हैं और इससे तेजस्वी यादव का वोटबैंक प्रभावित हो सकता है. अगर बीजेपी प्रशांत किशोर को वाक ओवर देती है तो यह एक बड़ा कारण हो सकता है.

विधानसभा चुनाव मैदान में नहीं उतरे, उपचुनाव में क्यों कूदे?

प्रशांत किशोर के बारे में एक बात सभी राजनीतिक पंडितों को असहज कर रही है कि विधानसभा चुनाव में वे उतरते-उतरते रह गए थे. राघोपुर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने का डंका पीट रहे थे, लेकिन जब चुनाव मैदान में कूदने की बारी आई तो प्रशांत किशोर पीछे हट गए थे. अब बांकीपुर सीट से उपचुनाव में कूद गए हैं. आज उनका नामांकन भी होना है. यह बात समझ से परे है कि मुख्य चुनाव में न उतरकर कोई नेता उपचुनाव में उतरे और वो भी भाजपा की परंपरागत सीट से. अगर बीजेपी ने प्रशांत किशोर को वाक ओवर नहीं दिया है तो क्या प्रशांत किशोर हारने के लिए चुनाव मैदान में उतरे हैं. इससे ऐसा लग रहा है कि प्रशांत किशोर का बांकीपुर सीट से उतरना किसी बड़ी प्लानिंग का हिस्सा हो सकता है.

गोरखपुर वाला रिजल्ट तो नहीं आ जाएगा बांकीपुर सीट से?

2017 में जब योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे तो गोरखपुर से लोकसभा सांसद के रूप में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था और वहां हुए उपचुनाव में बीजेपी की करारी हार हुई थी. गोरखपुर भाजपा की सबसे सेफ सीट मानी जाती थी, लेकिन भाजपा की हार ने राजनीतिक पंडितों को अचरज में डाल दिया था. बांकीपुर सीट पर हो रहे उपचुनाव में बीजेपी जिस तरह से असहज हो रही है या कार्यकर्ताओं को असहज कर रही है, उससे पार्टी नेताओं को डर है कि कहीं बांकीपुर का हाल गोरखपुर वाला न हो जाए. हालांकि कोई भी पार्टी नेता या कार्यकर्ता खुलेआम इस बारे में बात नहीं कर रहा, लेकिन पर्दे के पीछे अनऑफिसियल बातचीत में इस बाबत खुसुर-फुसुर हो रही है.

Bureau Report

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