ड्राइविंग लाइसेंस से पहले लेनी होगी ‘रोड सेफ्टी की क्लास’, तेलंगाना का नया नियम बचा सकता है हजारों जानें

ड्राइविंग लाइसेंस से पहले लेनी होगी 'रोड सेफ्टी की क्लास', तेलंगाना का नया नियम बचा सकता है हजारों जानें

अगर आप तेलंगाना में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की तैयारी कर रहे हैं, तो इसके लिए अब सिर्फ ड्राइविंग टेस्ट पास करना ही काफी नहीं होगा. राज्य की रेड्डी सरकार जल्द ही एक नया नियम लागू करने जा रही है, जिसके तहत लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले हर व्यक्ति को पहले अनिवार्य ऑनलाइन रोड सेफ्टी कोर्स पूरा करना होगा. इस कोर्स में सुरक्षित ड्राइविंग, सड़क पर शिष्टाचार (रोड एटीकेट) और डिफेंसिव ड्राइविंग जैसी जरूरी बातें सिखाई जाएंगी.

फेसियल रिकग्निशन तकनीक


यह ऑनलाइन कोर्स पूरी तरह मुफ्त होगा. इसमें वीडियो लेक्चर, क्विज और चेहरे की पहचान (फेशियल रिकॉग्निशन) जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोर्स वास्तव में वही व्यक्ति कर रहा है जिसने आवेदन किया है.

हैदराबाद में चल रहा पायलट प्रोजेक्ट- हजारों लोग जुट चुके

फिलहाल यह ऑनलाइन रोड सेफ्टी कोर्स हैदराबाद के कुकटपल्ली रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस बतौर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाया जा रहा है. इसे सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद ही कोई आवेदक लर्नर लाइसेंस के लिए आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे. ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के. इलंबरिथि के मुताबिक, इस कोर्स को लोगों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. लोग क्वेरी करके पूछ रहे हैं. 

आगे उन्होंने ये भी कहा, ‘यह कोर्स अनिवार्य है. इसमें शिक्षाप्रद वीडियो और ट्रेनिंग मॉड्यूल शामिल हैं. अब तक 1,159 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें से 973 लोग कोर्स पूरा कर चुके हैं.’

कोर्स में क्या सिखाया जाएगा?

इस ऑनलाइन कार्यक्रम का मकसद नए ड्राइवरों को सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से वाहन चलाना सिखाना है. इसमें रोजमर्रा की ऐसी बातें बताई जाएंगी, जिनकी जानकारी अक्सर नए वाहन चालकों को नहीं होती.

उदाहरण के तौर पर, कोर्स में बताया जाएगा कि स्टीयरिंग व्हील को ‘9-3’ या ‘8-4′ पोजिशन में पकड़ना क्यों बेहतर माना जाता है, जबकि पहले लोग ’10-2’ पोजिशन में हाथ रखने की सलाह देते थे.

इसका कारण आधुनिक कारों में लगे एयरबैग हैं. दुर्घटना के समय एयरबैग बहुत तेज गति से खुलते हैं. यदि ड्राइवर स्टीयरिंग को सही तरीके से पकड़ता है, तो एयरबैग खुलने पर हाथों में फ्रैक्चर या गंभीर चोट लगने की संभावना काफी कम हो जाती है.

इन विषयों पर मिलेगी ट्रेनिंग

ऑनलाइन कोर्स में नीचे लिखे गए ये बेसिक चीजें पढाई जाएंगीं.

डिफेंसिव ड्राइविंग (रक्षात्मक ड्राइविंग).
रोड रेज (गुस्से में ड्राइविंग) से कैसे बचें.
स्टीयरिंग पकड़ने और मोड़ने का सही तरीका.
वाहन के कंट्रोल और उनके सही इस्तेमाल की जानकारी.
सड़क सुरक्षा से जुड़े जरूरी नियम.

इस लर्निंग को ज्यादा व्यावहारिक बनाने के लिए इस कोर्स में करीब 120 वीडियो शामिल किए गए हैं, जिन्हें CCTVऔर डैशकैम फुटेज से लिया गया है. इन वीडियो के जरिए अच्छी और खराब ड्राइविंग के वास्तविक उदाहरण दिखाए जाएंगे. अधिकारियों ने साफ किया है कि इनमें कोई भी डरावना या विचलित करने वाला दृश्य नहीं होगा.

छह मॉड्यूल और हर चरण के बाद क्विज

पूरा ऑनलाइन कोर्स लगभग ढाई घंटे में पूरा किया जा सकेगा. यह अमेरिका जैसे देशों के ऑनलाइन ड्राइवर एजुकेशन प्रोग्राम की तुलना में काफी छोटा है, जहां ऐसे कोर्स आमतौर पर 5 से 7 घंटे तक चलते हैं.

कोर्स को छह अलग-अलग मॉड्यूल में बांटा गया है. हर मॉड्यूल खत्म होने के बाद एक अनिवार्य क्विज देना होगा. जब तक आवेदक क्विज पास नहीं करेगा, वह अगले मॉड्यूल में आगे नहीं बढ़ सकेगा.

इन मॉड्यूल में क्या सिखाया जाएगा

वाहन के कंट्रोल की जानकारी.
ड्राइविंग का सिद्धांत (ड्राइविंग थ्योरी).
मोटर वाहन (ड्राइविंग) नियम, 2017 के तहत ड्राइवरों की जिम्मेदारियां.
डिफेंसिव ड्राइविंग और सुरक्षित बचाव का रास्ता बनाए रखना.
‘पोजिशन, स्पीड और लुक’ सिद्धांत.
‘मिरर, सिग्नल और मूवमेंट’ तकनीक.
ट्रैफिक नियमों के इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन (ई-चालान और निगरानी प्रणाली) की जानकारी.

कोर्स पूरी तरह से मुफ्त, फेशियल रिकॉग्निशन से निगरानी

यह ऑनलाइन रोड सेफ्टी कोर्स सभी आवेदकों के लिए पूरी तरह मुफ्त होगा. इसे मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट या कैमरे वाले किसी भी डिवाइस पर कहीं से भी लॉगिन करके पूरा किया जा सकेगा. यानी आवेदक अपनी सुविधा के अनुसार घर बैठे भी यह कोर्स पूरा कर सकते हैं.

परिवहन आयुक्त के मुताबिक, इस कोर्स का एजुकेशनल कंटेट तैयार करने में आए खर्च का करीब 60% हिस्सा यूनिसेफ ने उठाया है. वहीं इसकी वेबसाइट TG Online ने डेवलप की है और वही साइट का संचालन भी कर रहा है.

कोर्स के नियम

यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोर्स वही व्यक्ति कर रहा है जिसने आवेदन किया है, इसमें फेशियल रिकॉग्निशन (चेहरे की पहचान) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा.

  • पूरे कोर्स के दौरान कैमरा ऑन रखना अनिवार्य होगा.
  • यदि कैमरा कुछ समय तक आवेदक का चेहरा नहीं पहचान पाएगा, तो वीडियो अपने आप रुक जाएगा.
  • जैसे ही आवेदक दोबारा कैमरे के सामने आएगा, कोर्स फिर से शुरू हो जाएगा.
  • वीडियो के दौरान बीच-बीच में अचानक फेशियल रिकॉग्निशन जांच भी होगी.
  • हर बार जांच से पहले स्क्रीन पर एक संदेश दिखाई देगा, जिससे आवेदक चेहरे की स्कैनिंग के लिए तैयार हो सके.

आवेदकों को बीच में ब्रेक लेने की सुविधा भी मिलेगी. वे कोर्स को पॉज कर सकेंगे और बाद में वहीं से दोबारा शुरू कर सकते हैं, जहां उन्होंने छोड़ा था. यानी उनकी प्रोग्रेस सुरक्षित रहेगी.

इस पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों के बाद तेलंगाना की सरकार अंतिम फैसला लेगी. आगे चलकर ये नियम देशभर में लागू हो जाए तो भारत में हर साल सड़क हादसों में होने वाली मौत के आंकड़े को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

Bureau Report

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