देश में तकनीकी और प्रोफेशनल शिक्षा का दायरा लगातार बढ़ रहा है. इसी क्रम में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) की सालाना रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार परिषद ने एकेडमिक सेशन 2024-25 के दौरान 5,099 नए संस्थानों को लेटर ऑफ अप्रूवल (LoA) जारी किए. इन संस्थानों में कुल 7,49,872 सीटों को मंजूरी दी गई. हालांकि, ये विस्तार भारत में हायर एजुकेशन की बढ़ती मांग और रोजगार आधारित पाठ्यक्रमों की लोकप्रियता को दर्शाता है. रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक ग्रोथ कंप्यूटर एप्लीकेशन और मैनेजमेंट कार्यक्रमों में दर्ज की गई.
AICTE के आंकड़ों के अनुसार कंप्यूटर एप्लीकेशन नए संस्थानों और सीटों के मामले में सबसे आगे रहा. इस श्रेणी में 3,959 संस्थानों को मंजूरी मिली और इनमें कुल 3,65,848 छात्रों के प्रवेश की स्वीकृति दी गई. डिजिटल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में बढ़ती मांग के कारण छात्रों का रुझान इस क्षेत्र की ओर तेजी से बढ़ा है. यही वजह है कि AICTE ने भी इस क्षेत्र में सबसे अधिक विस्तार को मंजूरी दी.
मैनेजमेंट कोर्स में इतनी बड़ी बढ़ोतरी कैसे हुई?
कंप्यूटर एप्लीकेशन के बाद मैनेजमेंट दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र रहा. AICTE की रिपोर्ट के मुताबिक 3,500 संस्थानों को मंजूरी मिली और इनमें 3,47,644 सीटों को स्वीकृति दी गई. एमबीए और अन्य मैनेजमेंट कार्यक्रमों की बढ़ती मांग, कॉरपोरेट सेक्टर में रोजगार के अवसर और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली नीतियों ने इस क्षेत्र को मजबूत बनाया है. कंप्यूटर एप्लीकेशन और मैनेजमेंट को मिलाकर 7.1 लाख से अधिक सीटें स्वीकृत हुईं, जो कुल नई सीटों का लगभग पूरा हिस्सा हैं.
इंजीनियरिंग की हिस्सेदारी इतनी कम क्यों रही?
जहां कंप्यूटर एप्लीकेशन और मैनेजमेंट में रिकॉर्ड विस्तार देखने को मिला, वहीं इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत काफी कम रही. इस श्रेणी में केवल 107 नए संस्थानों को मंजूरी मिली और 34,045 सीटों को स्वीकृति दी गई. यह संख्या कंप्यूटर एप्लीकेशन और मैनेजमेंट की तुलना में दसवें हिस्से से भी कम है. विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में पारंपरिक इंजीनियरिंग शाखाओं में घटती मांग और बदलते जॉब मार्केट के कारण यह बदलाव देखने को मिला है.
अन्य प्रोफेशनल कोर्स में कितनी सीटें मिलीं?
AICTE रिपोर्ट में छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया गया है. डिजाइन के लिए 17 संस्थानों को मंजूरी मिली, जिनमें 1,385 सीटें स्वीकृत की गईं. होटल मैनेजमेंट एवं कैटरिंग के 8 संस्थानों को 790 सीटें मिलीं. वहीं एप्लाइड आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स के लिए 1 संस्थान और 60 सीटें, जबकि प्लानिंग के लिए 3 संस्थानों में 100 सीटों को मंजूरी दी गई. इससे स्पष्ट है कि AICTE उभरते हुए विशेषीकृत क्षेत्रों को भी प्रोत्साहन दे रहा है.
अंडरग्रेजुएट सीटों का दबदबा क्यों रहा?
रिपोर्ट के अनुसार नए संस्थानों में स्वीकृत कुल 7,49,872 सीटों में से 7,05,408 सीटें स्नातक (Undergraduate) स्तर की हैं. यानी लगभग 94 प्रतिशत सीटें अंडरग्रेजुएट छात्रों के लिए हैं. इसके अलावा 29,974 सीटें पोस्टग्रेजुएट कार्यक्रमों के लिए और 14,490 सीटें डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए स्वीकृत की गई हैं. यह दर्शाता है कि AICTE फिलहाल सबसे अधिक ध्यान स्नातक स्तर की तकनीकी और प्रोफेशनल शिक्षा के विस्तार पर दे रहा है.
पिछले साल की तुलना में क्या बदलाव आया?
यदि 2023-24 के आंकड़ों से तुलना करें तो कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय बदलाव दिखाई देता है. पिछले वर्ष इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के तहत 90 नए संस्थान थे, जिनमें कुल 41,512 सीटें स्वीकृत थीं. इनमें डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रम शामिल थे. उस समय 51 संस्थानों को डिप्लोमा, 42 संस्थानों को अंडरग्रेजुएट और 4 संस्थानों को पोस्टग्रेजुएट कार्यक्रमों की मंजूरी मिली थी. इसके मुकाबले 2024-25 में संस्थानों की संख्या बढ़ी, लेकिन सीटों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही.
मैनेजमेंट और MCA में क्या अंतर दिखा?
2023-24 की रिपोर्ट में मैनेजमेंट के 105 नए संस्थानों को केवल 13,020 पोस्टग्रेजुएट सीटों की मंजूरी मिली थी. वहीं MCA के 53 संस्थानों में 4,890 सीटें स्वीकृत थीं. खास बात यह रही कि उस वर्ष AICTE ने Computer Applications को अलग श्रेणी के रूप में शामिल नहीं किया था. जबकि 2024-25 में इसे अलग कैटेगरी बनाकर बड़े स्तर पर विस्तार को दर्शाया गया है. इससे साफ संकेत मिलता है कि कंप्यूटर आधारित शिक्षा अब स्वतंत्र और प्राथमिक क्षेत्र के रूप में उभर चुकी है.
डिजाइन और अन्य क्षेत्रों में क्या बदलाव देखने को मिला?
2023-24 में डिजाइन के केवल 6 नए संस्थानों को 300 सीटों की मंजूरी मिली थी. एप्लाइड आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स के 4 संस्थानों में 440 सीटें, प्लानिंग के 2 संस्थानों में 58 सीटें तथा होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग के 1 संस्थान में 120 सीटें स्वीकृत थीं. इसके मुकाबले 2024-25 में इन क्षेत्रों में भी वृद्धि दर्ज की गई है, जो दर्शाती है कि तकनीकी शिक्षा अब पारंपरिक पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं रह गई है.
छात्रों के लिए इस रिपोर्ट का क्या मतलब है?
AICTE की यह रिपोर्ट बताती है कि भारत में तकनीकी और प्रोफेशनल शिक्षा का फोकस तेजी से बदल रहा है. आईटी, कंप्यूटर एप्लीकेशन और मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में नई सीटों की बढ़ोतरी छात्रों के लिए अधिक अवसर लेकर आएगी. वहीं इंजीनियरिंग में सीमित विस्तार यह संकेत देता है कि संस्थान अब उद्योग की मांग और रोजगार के बदलते स्वरूप के अनुसार नए पाठ्यक्रमों पर अधिक जोर दे रहे हैं. ऐसे में छात्रों को कोर्स चुनने से पहले रोजगार संभावनाओं, संस्थान की मान्यता और अपने करियर लक्ष्य का गंभीरता से मूल्यांकन करना चाहिए.
Bureau Report
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