अमेरिका और चीन के बीच इस बार फिर से टैरिफ का खेल शुरू हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के सामानों पर 7.5 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तैयारी कर ली है. हालांकि अभी ऐलान होना बाकी है. अगले महीने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग समिट के लिए अमेरिका पहुंचेंगे, जहां उनकी मुलाकात डोनाल्ड ट्रंप से होगी. इस मुलाकात से पहले अमेरिका की ओर से ट्रेड पर नया तनाव शुरू हो गया है.
अमेरिका का आरोप है कि चीन अपनी अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग कैपिसिटी के चलते सस्ते चाइनीज प्रोडक्ट्स को दुनियाभर के बाजार में बड़ी मात्रा में उतार देता है, जिससे लोकल मैन्युफैक्चर्स को भारी नुकसान होता है. चीन के इसी ‘ओवरकैपेसिटी’ पर अमेरिका टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है. अगर ट्रंप इसे लागू कर देते हैं, तो चीन पर अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 20% पर पहुंच जाएगा.
चीन की ‘ओवरकैपेसिटी’ और ट्रेड सरप्लस
चीन की मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर उसकी सबसे बड़ी ताकत है. एडवांस तकनीक, सस्ता कच्चा माल, सस्ते लेबर और विशाल इनवेंट्री की बदौलत चीन के प्रोडक्शन की ओवरकैपेसिटी है. जिसकी वजह से चीन के सामान बाकियों के मुकाबले सस्ते होते हैं. अमेरिका ने मार्च 2026 में ही चीन समेत 60 से अधिक देशों की Excess Manufacturing Capacity यानी जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता और जबरन मजदूरी को लेकर जांच शुरू की गई थी.
अमेरिका ने किस कानून का सहारा लिया
अमेरिका का ये कदम ट्रंप की संरक्षणवादी व्यापार नीति को फिर से आगे बढ़ाने की दिशा में नई कोशिश होगी. इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की ओर से चीन समेत दुनिया के अलग-अलग देशों पर लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया था. जिसके बाद ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका के ट्रेड एक्ट 1974 के Section 301 को हथियार बनाया है, जो उसे अधिकार देता है कि वो किसी भी व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ जांच शुरू कर सकता है. इस बात की जांच कर सकता है कि वो देश जबरन मजबूरी या अत्यधिक उत्पादन क्षमता (Excess Capacity) में उत्पादन तो नहीं कर रहा. ऐसा पाए जाने पर उसे टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाता है. ये टैरिफ ज्यादा टिकाऊ और लंबे समय तक लागू रहने वाले है.
चीन के सस्ते सामान से अमेरिका को नुकसान
अमेरिका ने इसी सेक्शन 301 के तहत चीन की कई इंडस्ट्रीज की जांच की, जिसमें जरूरत से ज्यादा उत्पादन हो रहा है. अमेरिका का आरोप है कि चीन की इस ओवरकैपिसिटी प्रोडक्शन के चलते वैश्किव बाजार में सस्ते सामानों की आपूर्ति बढ़ रही है. जिससे अमेरिकी मैन्युफैक्चर्स को नुकसान होता है. सिर्फ ओवरकैपिसिटी ही नहीं, बल्कि चीन का व्यापार सरप्लस रिकॉर्ड स्तर पर है, जिस पर अमेरिका की नजर है. चीन में घरेलू मांग धीमी होने के चलते चीनी कंपनियों विदेशी बाजारों में सस्ता सामान बेच रही है. जिससे चीन का निर्यात बढ़कर 1.2 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गया है, लेकिन ये अमेरिका की टेंशन बढ़ा रहे हैं.
शी जिनपिंग और ट्रंप की मुलाकात
अगर अमेरिका चीन पर टैरिफ लगाने का आधिकारिक ऐलान कर देता है, तो इसकी टाइमिंग बेहद अहम होगी, क्योंकि सितंबर में डोनाल्ड ट्रंप-शी जिनपिंग की मुलाकात होने वाली है. शी जिनपिंग अमेरिका में होंगे. हालांकि तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है. ट्रंप-शी मुलाकात से पहले टैरिफ का ये ऐलान ट्रेड वॉर को फिर भड़का सकता है.
Bureau Report
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