भारत में 5G सर्विस को लेकर टेलीकॉम कंपनियों और सरकार के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है. 5G नेटवर्क स्लाइसिंग से जुड़े नए सर्विस नियमों को लेकर Reliance Jio, एयरटेल और Vodafone Idea ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है. टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि प्रस्तावित नियमों से 5G नेटवर्क के इस्तेमाल और सर्विस के कारोबार पर असर पड़ सकता है. अब इस मामले पर टेलीकॉम कंपनियों और TRAI के बीच खींचतान बढ़ती नजर आ रही है.
जियो, एयरटेल और Vi ने भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण यानी TRAI के क्वालिटी ऑफ सर्विस से जुड़े ड्राफ्ट प्रस्तावों का एकसाथ विरोध किया है. मामला 5G नेटवर्क स्लाइसिंग से जुड़ा है. टेलिकॉम कंपनियों ने मांग की है कि रिसोर्स यूटिलाइजेशन से जुड़े प्रस्तावित बेंचमार्क को पूरी तरह से हटा दिया जाए. दूसरी तरफ, पब्लिक एडवोकेसी ग्रुप्स का कहना है कि इन नियमों को बनाए रखा जाना चाहिए.
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि बीते महीने अगस्त में TRAI ने 5G नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक को लेकर ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की थीं. इस तकनीक से टेलिकॉम कंपनियां कुछ खास सर्विसेस के लिए अलग से 5G नेटवर्क बैंडविड्थ यूजर्स को उपलब्ध करा सकती हैं. यानी यूजर्स को अलग से प्राइवेट इंटरनेट टेलीकॉम कंपनियां उपलब्ध करा सकती हैं. TRAI का उद्देश्य यह तय करना था कि इस सर्विस के कारण आम इंटरनेट यूजर्स की स्पीड और सर्विस क्वालिटी पर कोई बुरा असर न पड़े. इसके लिए TRAI ने प्रस्ताव रखा था कि जिन इलाकों में स्लाइसिंग एक्टिव है, वहां रेडियो रिसोर्स का इस्तेमाल 80 प्रतिशत से ज्यादा न हो. इससे सामान्य नेटवर्क के लिए पर्याप्त स्पेस बचा रहेगा.
टेलिकॉम कंपनियों ने क्यों उठाये सवाल?
भारत की तीनों बड़ी प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों ने TRAI के इस फैसले को व्यावहारिक रूप से गलत बताया है-
एयरटेल
ट्राई के इस फैसले को लेकर एयरटेल ने अपने लिखित जवाब में कहा है कि 80 प्रतिशत से ज्यादा यूटिलाइजेशन का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सर्विस क्वालिटी खराब है. इस तरह की लिमिट तय करने से स्पेक्ट्रम जैसे कीमती रिसोर्स का पूरा फायदा उठाने पर रोक लगेगी और कंपनियों को बेवजह नेटवर्क क्षमता बढ़ाने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा.
जियो
इस फैसले को लेकर जियो का कहना है कि 80 प्रतिशत की लिमिट के आधार पर नेटवर्क स्लाइसिंग को रोकना ऑपरेशनल रूप से संभव नहीं है. मॉडर्न 5G तकनीक को ज्यादा यूटिलाइजेशन पर भी बेहतर काम करने के लिए ही डिजाइन किया गया है. स्पेक्ट्रम पर इस तरह की पाबंदी लगाना उसकी नीलामी की शर्तों और टेक्नोलॉजी न्यूट्रैलिटी का उल्लंघन है.
Vi
वहीं Vodafone Idea का कहना है कि स्लाइसिंग एक ऐसा टूल है जिसका इस्तेमाल ही रिसोर्स की कमी होने पर किया जाता है. जब नेटवर्क में एक्स्ट्रा कैपेसिटी उपलब्ध होती है, तो सभी यूजर्स को हाई स्पीड मिलती है. ऐसे में सेल लेवल पर कोई फिक्स्ड थ्रेशोल्ड लगाना तकनीकी रूप से सही नहीं है.
ग्लोबल बॉडी और एक्सपर्ट्स की राय
ग्लोबल टेलिकॉम बॉडी का भी मानना है कि रिसोर्स यूटिलाइजेशन का इस्तेमाल सिर्फ अंदरूनी प्लानिंग के लिए होना चाहिए, न कि रेगुलेटरी नियम के रूप में. सिर्फ यूटिलाइजेशन ज्यादा होने से यह साबित नहीं होता कि यूजर्स को खराब सर्विस मिल रही है.
वहीं, द डायलॉग जैसे पब्लिक पॉलिसी थिंक टैंक ने TRAI का समर्थन करते हुए कहा है कि यह नियम आम यूजर्स के इंटरनेट को स्लो होने से बचाने के लिए एक जरूरी सेफ्टी गार्ड की तरह काम करेगा.
Bureau Report
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