भारत में कई बड़े आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान का दोहरा चेहरा एक बार फिर बेनकाब हो गया है, जिस आतंकी के अफगानिस्तान भाग जाने का दावा पाकिस्तान पिछले कई सालों से करता आ रहा है, अब उसी मसूद अजहर को अपनी एजेंसी FIA की मोस्ट वांटेड ‘रेड बुक’ में डालकर उस पर 70 लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया है. पाकिस्तान 2021 से यह कहता रहा है कि अजहर देश छोड़कर अफगानिस्तान चला गया है.
मसूद अजहर को पाकिस्तान की जांच एजेंसी (FIA) ने अपने सबसे खतरनाक आतंकवादियों की सूची ‘रेड बुक’ में शामिल किया है. अजहर का नाम भगोड़े के रूप में दर्ज किया गया है. FIA अपनी काउंटर टेररिज्म विंग के जरिए मोस्ट वांटेड आतंकवादियों की रेड बुक तैयार करती है.
सिर पर इनाम बढ़ाकर किया 70 लाख
मसूद अजहर पर घोषित इनाम को 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया गया है. यानी पाकिस्तान ने उस आतंकी सरगना की गिरफ्तारी के लिए इनाम में 20 लाख रुपये की बढ़ोतरी की है, जिस पर भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों और आतंकी साजिशों से जुड़े गंभीर आरोप हैं. ये वही अजहर मसूद है, जिसे 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 के अपहरण के बाद यात्रियों की रिहाई के बदले उसे भारत की जेल से छोड़ा गया था.
भारत के पुराने रुख पर मुहर
भारत के नजरिए से यह घटनाक्रम पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को साफ दिखाता है, जहां उसके दावों और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का फर्क है. भारतीय खुफिया एजेंसियों के तकनीकी इनपुट बताते हैं कि मसूद अजहर पिछले 6 महीनों से पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह में ही छिपा हुआ है, जबकि पाकिस्तान अभी भी यह सफेद झूठ बोल रहा है कि यह आतंकी उसकी पकड़ और जानकारी से बाहर है.
क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव में चला दांव?
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अक्टूबर में FATF की प्लेनरी बैठक होनी है. हालांकि पाकिस्तान फिलहाल FATF की ग्रे लिस्ट में नहीं है. FATF ने अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान को अपनी बढ़ी हुई निगरानी यानी ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया था और जून 2026 की मौजूदा सूची में भी पाकिस्तान शामिल नहीं है. ऐसे में मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाने को सीधे तौर पर FATF की संभावित कार्रवाई से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई दिखाने की कोशिश के रूप में इस कदम पर सवाल जरूर उठ सकते हैं.
FATF क्या है, जिसकी अक्टूबर में बैठक होगी
FATF दुनिया भर में आतंकी फंडिंग और काले धन को रोकने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो देशों के नियमों की जांच कर ढिलाई मिलने पर उन्हें कड़ी निगरानी वाली ‘ग्रे लिस्ट’ में डाल देती है. पाकिस्तान 2018 में इस लिस्ट में आया था और सुधारों के बाद अक्टूबर 2022 में बाहर हुआ, जबकि अब अक्टूबर 2026 में FATF की अगली अहम बैठक होने जा रही है.
सख्त एक्शन या सिर्फ दुनिया को दिखाने के लिए नया पैंतरा?
पाकिस्तान का यह ड्रामा नया नहीं है. पिछले साल जब भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में 9 आतंकी ठिकाने तबाह किए थे, तब खुद मसूद अजहर ने बयान जारी कर कबूल किया था कि उसके परिवार के 9 लोग मारे गए हैं, इसके बावजूद अब पाकिस्तान यह झूठ बोल रहा है कि मसूद उसकी जमीन पर मौजूद ही नहीं है. अब उसके सिर पर 70 लाख का इनाम रखना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या पाकिस्तान सच में उसे पकड़ना चाहता है, या सिर्फ दुनिया के दबाव में कार्रवाई का नाटक कर रहा है.
Bureau Report
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