पन्ना जिले में बीते 15 सितंबर से जिले के सभी प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में मध्यान भोजन का वितरण ठप्प पड़ा हुआ है. जिले में 1638 प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में लगभग डेढ़ लाख बच्चे पढ़ते हैं. जिनके लिए मध्यान भोजन की व्यवस्था हेतु करोड़ों रुपए का बजट सरकार के द्वारा दिया जाता है. पन्ना जिले खाद्यान्न और बजट प्राप्त हो चुका है, लेकिन बद इंतजामी के चलते 4 महीने से रसोइयों का वेतन नहीं दिया गया है. अनेक समूहों को खाद्यान्न न मिलने की शिकायत है. जिसके कारण रसोईया नाराज हैं और उन्होंने स्कूलों में भोजन बनाना बंद कर दिया है.
पन्ना जिले के शासकीय विद्यालयों में मध्यान भोजन बनाने वाले स्व सहायता समूह के रसोइयों ने बड़ी रैली निकालकर और ज्ञापन सौंपकर इस बात की शिकायत की थी कि उनके वेतन का भुगतान बीते 3-4 माह से नहीं किया गया है. साथ ही इस बात की भी शिकायत आई थी कि खाद्यान्न भी समय पर नहीं मिल रहा है. जिसके चलते विद्यालयों में मध्यान भोजन वितरित नहीं किया जा रहा है. इस ज्ञापन के बावजूद भी व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और ना ही मध्यान भोजन वितरण के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई, जिसके चलते बीते 8 दिनों से पन्ना जिले के डेढ़ लाख बच्चों को मध्यान भोजन से वंचित होना पड़ रहा है.
लगभग डेढ़ लाख बच्चे प्रभावित
पन्ना जिले में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को नियंत्रित करने वाली उप संचालक (जिला परियोजना समन्वयक) किरण कौशिक से जब बात की गई तो, उन्होंने बताया कि पन्ना जिले में 1638 माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालयों में मध्यान भोजन का वितरण किया जाता है, जिसमें लगभग डेढ़ लाख बच्चे प्रतिदिन मध्यान भोजन से लाभान्वित होते हैं. लेकिन रसोइयों की हड़ताल के कारण मध्यान भोजन वितरण व्यवस्था प्रभावित हुई है.
रसोइयों की हड़ताल का असर
मध्यान भोजन का वितरण पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से किया जाता है. जिसमें स्व सहायता समूहों को अलग-अलग विद्यालयों में जिम्मेदारी सौंपी गई है. इन समूहों के द्वारा मध्यान्ह भोजन बनाने के लिए रसोइयों को रखा गया है और इनका मासिक मानदेय 4 हजार प्रतिमाह की दर से उनके बैंक खातों में दिया जाता है. लेकिन जुलाई 2026 से मानदेय न मिलने के कारण रसोईया परेशान थी और उन्होंने मध्यान भोजन बनाना बंद कर दिया. इसके लिए उन्होंने जिला कलेक्ट्रेट में ज्ञापन दिया और यह शिकायत भी कि उनका समय पर खाद्यान्न नहीं मिल पा रहा है. लेकिन मध्यान भोजन सुचारू रूप से वितरित हो सके इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई. जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उमराव सिंह मरावी ने जानकारी देते हुए बताया की किसी भी विद्यालय में दर्ज छात्र संख्या का 60% ही भुगतान मध्यान्ह भोजन के लिए किया जाता है. पोर्टल में आई कुछ गड़बड़ियों के कारण भुगतान संभव नहीं हो सका है, और यह समस्या मध्य प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी चल रही है. भुगतान के लिए बजट हमें प्राप्त हो चुका है और जल्द ही भुगतान कराया जाएगा. यदि भुगतान में देरी होती है तो शिक्षा समितियों के द्वारा मध्यान भोजन बनाने की व्यवस्था कराई जाएगी.
Bureau Report
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