छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के खमतराई थाना क्षेत्र (बजरंग नगर, उरकुरा) से साइबर क्राइम का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां साइबर ठगों ने एक 64 साल के दुकानदार को डेढ़ महीने तक लगातार डिजिटल अरेस्ट में रखकर उससे ₹8.50 लाख ठग लिए. ठगों ने CBI अधिकारी और सीनियर IPS अधिकारी बनकर पीड़ित को फोन किया और दावा किया कि ₹6.80 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उसका नाम सामने आया है. 18 अगस्त से 1 अक्टूबर के बीच अलग-अलग अकाउंट्स में पैसे ट्रांसफर किए गए. डिजिटल अरेस्ट के नाम पर किया गया यह घोटाला तब सामने आया जब पीड़ित ने अपने छोटे भाई को इस बारे में बताया.
अलग-अलग बैंक खातों में ऐंठे गए लाखों रुपये
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित को लगातार धमकी दी जा रही थी कि अगर उसने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो उसके पूरे परिवार को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. उन्हें इतना डराया-धमकाया गया कि ठगों ने पीड़ित को दिन-रात हर घंटे उनसे वीडियो कॉल करने पर मजबूर कर दिया और उसे किसी और से बात तक नहीं करने दी. इस भारी दबाव और डर के कारण पीड़ित ने 18 अगस्त से 1 अक्टूबर के बीच ठगों द्वारा बताए गए अलग-अलग बैंक अकाउंट्स में कुल ₹8.50 लाख ट्रांसफर कर दिए. यह रकम उसकी जीवन भर की बचत और सोने के गहने बेचकर जुटाई गई थी.
डेढ़ महीने बाद खुला राज
फर्जी डिजिटल अरेस्ट का सच तब सामने आया जब पीड़ित ने करीब डेढ़ महीने बाद अपने छोटे भाई को इस बारे में बताया. पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की जानकारी जुटाकर जांच शुरू कर दी है.
फर्जी कॉल से सतर्क रहें
रायपुर की यह घटना साइबर अपराधियों की बढ़ती हिम्मत को दिखाती है. किसी व्यक्ति को डेढ़ महीने तक लगातार डरा-धमकाकर अपने काबू में रखना एक गंभीर मामला है. पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है, साथ ही नागरिकों से भी अपील की जा रही है कि वे CBI, पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी के नाम पर आने वाली ऐसी धोखाधड़ी वाली कॉल और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के दावों को लेकर सतर्क रहें.
Bureau Report
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