राष्ट्रीय राजधानी में लगातार विरोध प्रदर्शन अब व्यापारियों से लिए त्योहारी सीजन में चुनौती बनते जा रहे हैं और इससे दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक कारोबार प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि व्यापार बंद होने के चलते व्यापारियों को ऑर्डर पूरे करने में मुश्किलें आ रही हैं.
त्योहारी सीजन में रुकावट
बेंगलुरु होलसेल क्लॉथ मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रकाश पिरगल ने कहा कि दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों का असर यहां बेंगलुरु में हमारे कारोबार पर भी पड़ा है. हमारा कारोबार बेंगलुरु से है, लेकिन हम अपना कपड़ा दिल्ली भेजते हैं. वहां के व्यापारियों का कहना कि अभी और कपड़ा न भेजें,क्योंकि दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं और हालात ऐसे हैं जैसे पूरा शहर ही बंद है. व्यापारियों में इस बात को लेकर अनिश्चितता है कि दशहरा और दीपावली के दौरान कारोबार सामान्य रूप से चल पाएगा या नहीं. उन्होंने आगे कहा कि प्रदर्शनों के चलते हम अपने पहले मिले ऑर्डर पूरे नहीं कर पा रहे हैं. अगर मेरे कारोबार पर इस तरह का असर पड़ा है, तो संभव है कि हजारों अन्य व्यापारी भी ऐसी ही मुश्किलों का सामना कर रहे हैं.
मुख्य न्यायाधीश को पत्र
विरोध-प्रदर्शनों से प्रभावित स्वरोजगार वाले व्यापारियों के लिए तत्काल कानूनी सुरक्षा की मांग की गई है. व्यापारी संगठनों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा है, जिसमें सड़क पर होने वाले व्यवधानकारी विरोध-प्रदर्शनों से प्रभावित स्वरोजगार वाले व्यापारियों के लिए तत्काल कानूनी सुरक्षा की मांग की गई है.
शहर के केंद्र से प्रदर्शन हटाने की गुजारिश
पिरगल ने कहा कि बेंगलुरु में ‘फ्रीडम पार्क’ है, जो विरोध-प्रदर्शनों के लिए तय जगह है. फिर भी यहां अलग-अलग समूहों के विरोध-प्रदर्शन इतनी बार होते हैं कि महीने में 15 से 20 दिनों तक ये चल सकते हैं. जब बेंगलुरु के बीचों-बीच इस तरह के विरोध-प्रदर्शन होते हैं और सड़कें जाम हो जाती हैं, तो सभी को परेशानी होती है. लोगों को समय पर अपने दफ्तर पहुंचने में दिक्कत होती है और यहां तक कि कोर्ट जाने वालों को भी देरी हो जाती है. हमारी गुजारिश है कि ऐसे विरोध-प्रदर्शन शहर के केंद्र से बाहर होने चाहिए. इसके अलावा, लोग तय की गई जगहों पर प्रदर्शन कर सकते हैं या फिर दफ्तरों में बातचीत करके अपनी समस्याओं को सुलझाने की दिशा में काम कर सकते हैं.
Bureau Report
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