राजस्थान शिक्षक भर्ती-2018: टीएसपी श्रेणी में नियुक्ति का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने सरकार की अपील खारिज की

राजस्थान शिक्षक भर्ती-2018: टीएसपी श्रेणी में नियुक्ति का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने सरकार की अपील खारिज की

राजस्थान हाईकोर्ट ने तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती-2018 लेवल-द्वितीय (विज्ञान और गणित) से जुड़े मामले में अभ्यर्थी शीतल अमेटा को राहत दी है। जोधपुर स्थित हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील खारिज करते हुए निर्देश दिया है कि शीतल अमेटा की उम्मीदवारी पर टीएसपी (जनजातीय उप-योजना) क्षेत्र की अभ्यर्थी के रूप में विचार किया जाए। अदालत ने कहा कि यदि वह योग्यता सूची में स्थान हासिल करती हैं तो उन्हें टीएसपी क्षेत्र में नियमानुसार नियुक्ति दी जाए। इस फैसले से वर्ष 2018 की भर्ती प्रक्रिया से प्रभावित अभ्यर्थियों को भी राहत मिलने का रास्ता खुला है।

2018 में जारी हुए थे भर्ती के दो विज्ञापन

प्राथमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने 31 जुलाई 2018 को विज्ञापन संख्या 5/2018 और 6/2018 जारी किए थे। इनके माध्यम से तृतीय श्रेणी अध्यापक लेवल-द्वितीय के विज्ञान और गणित विषयों के पदों पर गैर-टीएसपी और टीएसपी क्षेत्रों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। प्रार्थी शीतल अमेटा का विवाह टीएसपी क्षेत्र में रहने वाले व्यक्ति से हुआ था। हालांकि, आवेदन के समय लागू नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था, जिसके तहत टीएसपी क्षेत्र के निवासी से विवाह करने वाली गैर-टीएसपी महिला को टीएसपी क्षेत्र की अभ्यर्थी माना जा सके। इसी वजह से शीतल अमेटा ने खुद को गैर-टीएसपी क्षेत्र की अभ्यर्थी मानते हुए विज्ञापन संख्या 5/2018 के तहत आवेदन किया था। उन्होंने टीएसपी पदों के लिए जारी विज्ञापन संख्या 6/2018 के तहत अलग से आवेदन नहीं किया था।

2019 की अधिसूचना से बदले नियम, सरकार ने नहीं मानी मांग

राज्य सरकार ने 21 अक्तूबर 2019 को नई अधिसूचना जारी की। इसमें प्रावधान किया गया कि गैर-टीएसपी क्षेत्र की ऐसी महिला, जिसका विवाह टीएसपी क्षेत्र में रहने वाले व्यक्ति से हुआ है, उसे भी टीएसपी क्षेत्र की अभ्यर्थी माना जाएगा। सरकार ने इस अधिसूचना को 16 जून 2013 से प्रभावी घोषित किया था।

इसके बाद शीतल अमेटा ने अपनी उम्मीदवारी पर टीएसपी श्रेणी में विचार करने की मांग की, लेकिन राज्य सरकार ने उनका अनुरोध अस्वीकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राहत मांगी।

एकलपीठ ने 2023 में दिया था अभ्यर्थी के पक्ष में फैसला

शीतल अमेटा की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 23 जनवरी 2023 को उनके पक्ष में फैसला सुनाया था। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि उन्हें टीएसपी क्षेत्र की अभ्यर्थी मानते हुए तृतीय श्रेणी अध्यापक लेवल-द्वितीय (विज्ञान और गणित) पदों पर चयन के लिए नियमानुसार लाभ दिया जाए। इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने खंडपीठ में विशेष अपील दायर की थी। सरकार की ओर से दलील दी गई कि शीतल अमेटा ने विज्ञापन संख्या 6/2018 के तहत टीएसपी अभ्यर्थी के रूप में मूल आवेदन जमा नहीं किया था। इसके अलावा भर्ती प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है। ऐसे में इस स्तर पर उन्हें राहत देने से अतिरिक्त अधिसंख्य पद सृजित करने की आवश्यकता पड़ सकती है।

अभ्यर्थी की ओर से अधिवक्ता ने रखी ये दलीलें

शीतल अमेटा की ओर से अधिवक्ता वीएलएस राजपुरोहित ने पैरवी की। उन्होंने अदालत में तर्क दिया कि आवेदन जमा करते समय लागू नियमों के अनुसार अभ्यर्थी ने गैर-टीएसपी श्रेणी में आवेदन करके सही प्रक्रिया अपनाई थी। बाद में जारी अधिसूचना को पिछली तारीख से प्रभावी किया गया था। ऐसे में शीतल अमेटा की उम्मीदवारी पर टीएसपी श्रेणी में भी विचार किया जाना जरूरी है। अधिवक्ता ने अपने पक्ष में पहले दिए गए न्यायिक फैसलों का भी हवाला दिया।

मनीष कुमार नागदा मामले के फैसले का भी दिया हवाला

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पूर्व के न्यायिक फैसलों का अध्ययन करने के बाद खंडपीठ ने माना कि आवेदन के समय लागू नियमों के अनुसार शीतल अमेटा का गैर-टीएसपी श्रेणी में आवेदन करना सही था। अदालत ने मनीष कुमार नागदा और अन्य बनाम राजस्थान राज्य और अन्य मामले में दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया। इस मामले में समान परिस्थितियों में गैर-टीएसपी क्षेत्र से आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी पर टीएसपी श्रेणी में विचार करने का निर्देश दिया गया था। खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील में कोई आधार नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया। इसके साथ ही एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए शीतल अमेटा की उम्मीदवारी पर टीएसपी श्रेणी में विचार करने और योग्यता सूची में स्थान मिलने पर नियमानुसार नियुक्ति देने का निर्देश दिया।

Bureau Report

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