यूपी के अधिवक्ता की हत्या: 70 किमी और पांच थाने, फिर भी पुलिस नहीं भांप सकी; एसोसिएशन अध्यक्ष के कत्ल की कहानी

यूपी के अधिवक्ता की हत्या: 70 किमी और पांच थाने, फिर भी पुलिस नहीं भांप सकी; एसोसिएशन अध्यक्ष के कत्ल की कहानी

जालौन के कालपी बार संघ अध्यक्ष गयादीन अहिरवार के अपहरण और हत्या के मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर शिथिलता की बात सामने आ रही है। कालपी से करीब 70 किलोमीटर दूर कानपुर नगर के गुजैनी थाना क्षेत्र तक आरोपी कार से पहुंचे। इस दौरान उन्हें तीन जिलों के पांच थानों की सीमा पार करनी पड़ी लेकिन किसी स्तर पर उन्हें रोका नहीं जा सका। इधर, अपहरण की सूचना मिलने के बाद पुलिस कालपी क्षेत्र में ही तलाश करती रही और आरोपी घटना को अंजाम देकर निकल गए।

अधिवक्ता के पुत्र हर्ष ने शनिवार शाम करीब पांच बजे अन्य अधिवक्ताओं को जानकारी दी थी कि उनके पिता गयादीन को कार सवार लोग अपने साथ ले गए हैं। इसके बाद अधिवक्ताओं ने कालपी कोतवाली पुलिस को तहरीर दी। 

मामला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष के अपहरण से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने जांच शुरू की लेकिन शुरुआती तलाश कालपी और आसपास के क्षेत्रों तक ही सीमित रही। इसी बीच आरोपी उन्हें लेकर करीब 70 किलोमीटर दूर गुजैनी थाना क्षेत्र पहुंच गए।

कालपी से गुजैनी तक के रास्ते में ये थाने कालपी, भोगनीपुर, रनियां, सचेंडी व गुजैनी पड़ते हैं। इस तरह आरोपी तीन जिलों के पांच थानों की सीमा से होकर गुजरे। सवाल यह है कि अपहरण की सूचना मिलने के बाद क्या संबंधित थानों को तत्काल अलर्ट किया गया था और संदिग्ध कार की तलाश के लिए मार्गों पर घेराबंदी की गई थी या नहीं।

रविवार सुबह गुजैनी थाना क्षेत्र में गयादीन का रक्तरंजित शव मिलने के बाद अपहरण और हत्या की पुष्टि हुई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उनकी हत्या धारदार हथियार से बेरहमी से की गई। पुलिस ने तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया है और घटना में प्रयुक्त कार भी बरामद की है। फिलहाल पुलिस हत्या की वजह, वारदात में शामिल अन्य लोगों और अपहरण के बाद आरोपियों की आवाजाही की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

अपहरण की सूचना के बावजूद आरोपी इतनी दूर तक कैसे पहुंच गए और रास्ते में पड़ने वाले थानों की पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी, यह जांच का अहम सवाल है। पुलिस की घेराबंदी और सूचना तंत्र की प्रभावशीलता भी इस मामले में जांच के दायरे में है।

चार बार चुने गए थे बार एसोसिएशन के अध्यक्ष
गयादीन अहिरवार की अधिवक्ताओं के बीच अच्छी पकड़ थी। वह चार बार बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए थे। पिछले वर्ष फरवरी में हुए चुनाव में भी उन्होंने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की थी। उनकी हत्या की खबर से अधिवक्ताओं में आक्रोश फैल गया।

नगर में तनाव की आशंका को देखते हुए शनिवार रात से ही अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। रविवार को शव मिलने के बाद कालपी को छावनी में तब्दील कर दिया गया। कई थानों का पुलिस बल तैनात रहा और सीओ स्तर के अधिकारी कोतवाली में मौजूद रहकर स्थिति पर नजर रखते रहे।

एक साल पहले बेटे की मौत से टूट गया था
परिवार गयादीन अहिरवार के परिवार पर एक साल के भीतर दूसरी बड़ी विपत्ति आई है। 31 अक्तूबर 2025 को उनके बेटे गौरव ने पारिवारिक विवाद और पत्नी से अलगाव के चलते विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया था। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। बेटे की मौत के बाद से परिवार परेशान था। उनकी दो बेटियां हैं। एक बेटी की शादी झांसी में हुई है, जबकि दूसरी बेटी मीना उनके साथ रहकर वकालत करती थीं और पिता के चैंबर का काम संभालती थीं।

पहले भी हुआ था हमला थाने से लेकर एसपी तक लगाई थी गुहार
बेटे हर्ष ने बताया कि 13 जून 2026 को खेत से लौटते समय हांसा-बबीना मोड़ के पास आरोपियों ने पिता की बाइक रोक ली थी। उनके साथ बाइक पर साथी अखिलेश कुमार भी बैठे थे। आरोप है कि दोनों को गाली-गलौज के बाद लाठी, कुल्हाड़ी और डंडों से पीटा गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। गयादीन ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कदौरा थाने में तहरीर दी थी। सुनवाई ने होने पर तत्कालीन एसपी विनय कुमार को भी प्रार्थना पत्र दिया। कार्रवाई न होने पर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

बेटा बोला, पुलिस ने बताया था कि पिता को थप्पड़ मार छोड़ दिया
अधिवक्ता गयादीन अहिरवार के बेटे सौरभ के अनुसार, छोटे भाई हर्ष ने बताया कि कार सवार आरोपी पिता को उरई की ओर लेकर भागे। कुछ दूर तक तो उसने बाइक से पीछा किया लेकिन वह लोग भाग निकले। इस पर हर्ष ने पिता को कॉल की तो पहले बेल गई इसके बाद मोबाइल स्विच ऑफ हो गया।

संदेह होने पर उसने पुलिस को सूचना दी। इस पर सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू हुए। फुटेज में कार कानपुर की ओर निकल गई। देर रात करीब 3:10 बजे एसपी कोतवाली पहुंचे और प्राथमिकी दर्ज कराई। 

कालपी बार एसो. अध्यक्ष को अगवा कर मार डाला, कानपुर में मिला शव
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गयादीन अहिरवार (68) की जमीन के विवाद में कार से अपहरण के बाद हत्या कर दी गई। शक के दायरे में आए तीन आरोपियों की निशानदेही पर रविवार सुबह कानपुर में गुजैनी नहर से शव को बरामद किया।

देर रात कार की बरामदगी के लिए कालपी के जंगल ले जाए गए आरोपी भागने लगे और वहां पहले से छिपाए असलहों से फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में पैर में गोली लगने से आशीष विश्वकर्मा और सर्वेश शुक्ला घायल हो गए। पुलिस ने उनके तीसरे साथी केशव को भी पकड़ लिया। तीनों कानपुर के रहने वाले हैं। मुख्य आरोपी मोनू की पुलिस तलाश कर रही है।

कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कागजीपुरा निवासी गयादीन अहिरवार चौथी बार कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए थे। शनिवार को गयादीन उरई स्थित जिला न्यायालय में एक मुकदमे की पैरवी करने गए थे। 

शाम 3:30 बजे वह मुन्ना फुलपावर चौराहा पहुंचे और बेटे हर्ष को स्कूटी लेकर बुलाया। उन्होंने बेटे से कहा कि दुर्गा मंदिर चौराहे पर उनका एक मुवक्किल इंतजार कर रहा है। बेटा उन्हें स्कूटी से वहां ले गया। चौराहे पर कार में तीन लोग मौजूद थे।

बेटे के मुताबिक, कार से उतरे एक व्यक्ति ने गयादीन के पैर छुए और उन्हें कार में बैठाकर ले गया। बिना नंबर की कार देख बेटे को शक हुआ और उसने पिता को फोन किया लेकिन मोबाइल बंद मिला। उसने स्कूटी से कार का पीछा भी किया लेकिन पता नहीं चला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने अपहरण का मुकदमा दर्ज कर तीनों आरोपियों की निशानदेही पर रविवार सुबह कानपुर से शव बरामद किया।

जमीन की रंजिश में दी गई हत्या की सुपारी
एएसपी डॉ. ईशान सोनी ने बताया कि गयादीन और कानपुर निवासी इंद्रजीत यादव के बीच जमीन की मुकदमेबाजी चल रही है। इसी विवाद में इंद्रजीत ने हत्या के लिए मोनू यादव को सुपारी दी। मोनू और उसके तीन साथियों ने हत्याकांड को अंजाम दिया। मोनू की तलाश की जा रही है। प्राथमिकी में अन्य आरोपियों के नाम भी जोड़े जाएंगे।

Bureau Report

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