जब से ईरान ने तेल और गैस ले जाने वाले समुद्री रूट (होर्मुज) को ब्लॉक किया है, दुनियाभर के देश अलग तरह से प्लान-B पर सोचने लगे हैं. भविष्य के लिए आत्मनिर्भरता बढ़ाने के विकल्प खोजे जा रहे हैं. आप जानकर चौंक जाएंगे कि चीन ने 10-12 साल पहले ही इसका अंदाजा लगा लिया था. हां, चीन समझ चुका था कि भविष्य में होर्मुज जैसा संकट बन सकता है, वो भी हिंद महासागर में. अब आप भारत के दक्षिण में फैले विशाल हिंद महासागर क्षेत्र को देखिए. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की लोकेशन देखिए, आगे स्ट्रेट ऑफ मलक्का है. चीन के दुस्साहस पर अगर भारत यहां ‘नया होर्मुज’ बना दे तो बीजिंग तड़प उठेगा!
जी हां, चीन की अर्थव्यवस्था पर ब्रेक लग सकता था लेकिन अब नहीं. 12 साल पहले ही चीन ने इसका तोड़ निकाल लिया था. होर्मुज जलडमरूमध्य की तरह भारत के दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप और मलेशियाई प्रायद्वीप का यह रास्त वैश्विक व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण है. भारत की पोजीशन इसलिए अच्छी है क्योंकि वेस्ट एशिया और अफ्रीका से आ रहे चीनी जहाजों को भारत के अंडमान सागर से होकर वहां पहुंचना होता है. अब जरा सोचिए, अगर भारत चाहता तो एक झटके में चीन को घुटने पर ला सकता था, लेकिन अब ऐसा संभव नहीं है.
चीन ने एक दशक पहले ही निकाल लिया तोड़
आज हम चौंक सकते हैं लेकिन चीन ने 2015 से भी पहले अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए मलक्का स्ट्रेट का बाईपास रूट निकाल लिया था. चीन ने भारत के पड़ोसी देश म्यांमार का इसके लिए इस्तेमाल किया. उसने म्यांमार के गहरे पानी वाले एक पोर्ट से अपने मेनलैंड तक क्रूड ऑयल की पाइपलाइन बिछा दी. चीन ने बंगाल की खाड़ी में एक डीप वाटर पोर्ट विकसित किया. यहां से वह पश्चिम एशिया और अफ्रीका से लाया हुआ तेल 2402 किमी लंबी पाइपलाइन से अपने घर ले जाता है.
चीन की यह पाइपलाइन म्यांमार में 771 किमी और चीन में 1631 किमी फैली है. इस रूट को चीन-म्यांमार तेल और गैस पाइपलाइन कहा जाता है. 10 साल पहले ही वह म्यांमार के पोर्ट से युन्नान प्रांत तक के लिए रेल कॉरिडोर की प्लानिंग करने लगा था.
चीन पश्चिमी म्यांमार के क्याउकप्यू बंदरगाह पर जहाज से कच्चा तेल और गैस उतारता है. वहां से पाइपलाइन से युन्नान ले जाता है. दरअसल, चीन एक दशक पहले ही समझ चुका था कि भारत से टेंशन बढ़ी तो उसका 90 प्रतिशत से ज्यादा समुद्री मार्ग से आने वाले तेल की सप्लाई रुक सकती है. भारत या अमेरिका ने मलक्का वाला रूट ब्लॉक किया तो उसकी सांसें थम सकती हैं.
चीन को एक और फायदा
म्यांमार के रास्ते यह रूट मिलने से चीन के लिए समुद्री यात्रा की दूरी 3370 किमी कम हो जाती है. यह पाइपलाइन एक दशक से चालू है और हिंद महासागर तक चीन को सीधी पहुंच प्रदान करती है. ऐसे में आज हिंद महासागर में भारत की प्रभावशाली नौसैनिक ताकत के बाद भी चीन की निर्भरता मलक्का स्ट्रेट पर कम हो गई है.
Bureau Report
Leave a Reply