इजरायल-ईरान जंग के कारण मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है और दुनियाभर की इकोनॉमी हिली हुई है. ब्रेंट क्रूड ऑयल का रेट चढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. क्रूड के दाम में तेजी का असर यह हो रहा है कि देश में पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ गए हैं. होर्मुज स्ट्रेट में आवागमन प्रभावित होने से एलपीजी (LPG) का संकट भी सामना करना पड़ रहा है. इस बीच रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर और फेमस इकोनॉमिस्ट रघुराम राजन ने चौंकाने वाला बयान दिया है. रघुराम राजन एक चैनल को दिये इंटरव्यू में गंभीर चेतावनी दी है.
रघुराम राजन ने कहा, जंग यदि एक महीने से ज्यादा चली तो क्रूड ऑयल के दाम 150 डॉलर प्रति बैरल से 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकते हैं. जंग के लंबा चलने से दुनियाभर में रिसेशन का खतरा मंडरा रहा है. आयात पर निर्भर रहने वाले भारत जैसे देशों पर इस युद्ध का भारी असर पड़ेगा. राजन ने कहा कि फिलहाल होर्मुज के जरिये आने वाली दुनिया की 15-20 प्रतिशत एनर्जी सप्लाई पहले ही बंद हो चुकी है. होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम रूट पर हमले और डर के कारण तेल के जहाज फंसे हुए हैं.
गंभीर संकट में पड़ जाएगी दुनिया की इकोनॉमी
उन्होंने कहा, यदि जंग लंबी चली तो सप्लाई में और कमी आएगी. इसे बैलेंस करने के लिए ‘ट्रेमेंडस डिमांड डिस्ट्रक्शन’ यानी मांग में कटौती करनी पड़ेगी. इसका असर तेल की कीमत पर देखा जाएगा और यह चढ़कर 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है. राजन ने कहा, यह ऐसा हालात जो मैंने पहले कभी नहीं देखा. पूर्व गर्वनर ने चेताया कि यदि इजरायल और ईरान की जंग एक महीने और चल गई तो पूरी दुनिया की इकोनॉमी गंभीर संकट में पड़ जाएगी.
एनर्जी हर सेक्टर की जान
राजन ने कहा, तेल और गैस के ऊंचे दाम इकोनॉमी को झटका देंगे, क्योंकि एनर्जी हर सेक्टर की जान है. इससे फैक्टरियां, ट्रांसपोर्ट, एयरलाइंस, मैन्युफैक्चरिंग सब पर असर पड़ेगा. राजन ने कहा कि यह ‘अनचार्टेड टेरिटरी’ है यानी ऐसे हालात जहां कोई पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता, लेकिन नतीजे बुरे होंगे. इससे ग्लोबल रिसेशन का भी खतरा बन रहा है.
भारत पर क्या होगा असर?
आपको बता दें भारत पर इस युद्ध का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा तेल आयात करता है. राजन ने बताया तेल के दाम कमें हर 10 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट में करीब 17 बिलियन डॉलर (करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये) का बोझ डालती है, यह जीडीपी का 0.5% होता है. क्रूड के मौजूदा रेट से भी भारत पर काफी दवाब पड़ रहा है. यदि रेट बढ़कर 150-200 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में पहुंचता है तो यह बोझ कई गुना बढ़ जाएगा. इससे रुपया कमजोर होगा, महंगाई बढ़ेगी और पेट्रोल-डीजल के दाम रॉकेट की तरह उछलेंगे.
Bureau Report
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