इजरायल और ईरान के बीच पिछले 28 दिन से जारी जंग का असर दुनियाभर पर पड़ रहा है. जंग के बीच दुनिया को अपनी ताकत दिखाने के लिए ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को बंद कर दिया था. इसके बाद क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से चढ़कर दिन-रात में 122 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए. क्रूड के दाम बढ़ने और शिप की आवाजाही प्रभावित होने से अफवाह फैलने लगी कि देश में छह दिन की ही तेल सप्लाई बची है और कीमत में इजाफा होने वाला है. लेकिन सरकार बार-बार आश्वासन दे रही है कि देश में 60 दिन का ऑयल रिजर्व मौजूद है.
अब सरकार ने आम आदमी को राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी को 10-10 रुपये घटा दिया है. सरकार के इस कदम के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये लीटर और डीजल पर 0 हो गई है. अभी तक सरकार की तरफ से पेट्रोल पर 13 रुपये और डीजल पर 10 रुपये लीटर की एक्साइज ड्यूटी ली जा रही थी. एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर यह पूछना शुरू कर दिया कि पेट्रोल-डीजल के रेट में कितनी कटौती होगी? ऐलान के कुछ देर बार ही सरकार की तरफ से साफ किया गया कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती का सीधा फायदा तेल कंपनियों को दिया जाएगा.
सरकार ने क्यों घटाई एक्साइज ड्यूटी?
अमेरिका के साथ तनाव बढ़ने से बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी कर दी. इसका असर यह हुआ कि क्रूड ऑयल के दाम चढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल के पार चले गए. जिससे तेल कंपनियों की लागत बढ़ने लगी. लागत बढ़ने पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर अपना खर्च निकालती हैं. जिसका बोझ आम आदमी पर पड़ता और इसका असर देश में महंगाई दर बढ़ने के रूप में सामने आता. लेकिन सरकार ने आम आदमी को राहत देने के मकसद से पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर दी. इसका फायदा तेल कंपनियों को दिया जा रहा है.
आम आदमी को कैसे मिलेगा फायदा?
केंद्र की तरफ से यदि एक्साइज ड्यूटी में कटौती नहीं की जाती तो तेल कंपनियों को नुकसान की भरपाई के लिये कीमत में इजाफा करना पड़ता. यह इजाफा 30 प्रतिशत तक हो सकता था. साउथ-ईस्ट एशिया और बाकी देशों में तेल की कीमत में इजाफा किया गया है. लेकिन अब एक्साइज ड्यूटी में कमी से कंपनियों के घाटे की भरपाई की जा सकेगी. यानी पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमत में किसी तरह का इजाफा नहीं किया जाएगा, जो कि आम आदमी के लिए सबसे बड़ी राहत है.
क्या है एक्साइज ड्यूटी का खेल?
पेट्रोल और डीजल की अंतिम खुदरा कीमत को तय करने तक कई हिस्से होते हैं. इसमें कच्चे तेल की लागत के अलावा रिफाइनिंग खर्च, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, राज्य सरकार का VAT (वैल्यू एडेड टैक्स) और डीलर कमीशन आदि शामिल होता है. सरकार ने पेट्रोल और डीजल की एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये की कटौती करके तेल कंपनियों को राहत दी है. इससे कंपनियां दाम बढ़ाने जैसा कदम नहीं उठाएंगी. एक्साइज ड्यूटी केंद्र सरकार का टैक्स है. इसे घटाने से तेल कंपनियों की लागत कम होती है.
पेट्रोलियम मिनिस्टर ने क्या कहा?
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक X पोस्ट में लिखा, पिछले एक महीने में इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमत आसमान छू रही हैं. इसका असर यह हुआ कि पेट्रोल और डीजल के दाम दुनियाभर में बढ़ गई है. सरकार के पास इसके लिसे दो ऑप्शन थे, पहला या तो देश के नागरिकों के लिए कीमत बहुत ज्यादा बढ़ा दें जैसा दूसरे देशों ने किया है या खुद वित्तीय बोझ उठाकर देश के नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से बचाए.
Bureau Report
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