प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे. उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री ने इसे देश की सबसे महत्वपूर्ण हरित (ग्रीन) परियोजनाओं में से एक बताया. उन्होंने कहा कि यह एयरपोर्ट इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बढ़ती भीड़ को कम करेगा और भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई गति देगा.
दो चरणों में होगा विकास, 225 मिलियन यात्रियों की क्षमता
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास 2 चरणों में किया जाएगा. अंतिम चरण तक इसकी क्षमता 70 मिलियन से बढ़कर 225 मिलियन यात्रियों प्रति वर्ष तक पहुंच जाएगी. पहले चरण में चार उप चरण शामिल हैं, जिसमें शुरुआती क्षमता 12 मिलियन यात्रियों की होगी, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 70 मिलियन तक किया जाएगा. एयरपोर्ट का निर्माण 1334 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जा रहा है और इसमें दो रनवे होंगे.
इस परियोजना के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (NIAL) और यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (YIAPL) के बीच 40 साल का रियायत समझौता किया गया है. YIAPL, ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की 100% सहायक कंपनी है, जो इस परियोजना के विकास और संचालन में प्रमुख भूमिका निभा रही है.
मल्टी-मोडल कार्गो हब से लॉजिस्टिक्स को मिलेगा बढ़ावा
एयरपोर्ट को एक बड़े मल्टी-मोडल कार्गो हब के रूप में भी विकसित किया जा रहा है. इसके लिए 87 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जहां इंटीग्रेटेड कार्गो टर्मिनल, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स जोन बनाए जाएंगे. पहले चरण में करीब 800 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जिसे अंतिम चरण तक बढ़ाकर 3200 करोड़ रुपये किया जाएगा. कार्गो टर्मिनल की शुरुआती क्षमता 2.55 लाख मीट्रिक टन सालाना होगी, जिसे बढ़ाकर 18 लाख मीट्रिक टन तक किया जाएगा.
देश का पहला MRO सुविधा वाला एयरपोर्ट
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट होगा जहां मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) की सुविधा ऑन-साइट उपलब्ध होगी. इसके लिए 40 एकड़ भूमि आवंटित की गई है और Akasa Air की भागीदार कंपनी SNV एविएशन के साथ समझौता किया गया है. यह सुविधा करीब 60 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित की जाएगी. इस एयरपोर्ट को नेट-जीरो एमिशन कॉन्सेप्ट पर डिजाइन किया गया है. कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए कई उपाय किए गए हैं.
1. बारिश के पानी के संचयन के लिए दो बड़े तालाब
2. 3 MLD क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
3. 82.94 एकड़ में सौर ऊर्जा संयंत्र
औद्योगिक विकास का नया केंद्र बनेगा जेवर एयरपोर्ट
एयरपोर्ट के आसपास का क्षेत्र तेजी से औद्योगिक हब के रूप में विकसित हो रहा है. यहां परिधान पार्क, MSME पार्क, खिलौना पार्क, डेटा सेंटर और ODOP हस्तशिल्प पार्क विकसित किए जा रहे हैं. इसके अलावा, HCL और Foxconn के संयुक्त निवेश से 3700 करोड़ रुपये का सेमीकंडक्टर प्लांट भी स्थापित किया जा रहा है. 350 एकड़ में मेडिकल डिवाइस पार्क पर काम शुरू हो चुका है, जबकि 1500 करोड़ रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी की योजना भी बनाई गई है. कुल मिलाकर, इस क्षेत्र में लगभग 30000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जो इसे उत्तर भारत का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बना सकते हैं.
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर की हवाई यातायात समस्या को कम करेगा, बल्कि यह भारत के लॉजिस्टिक्स, व्यापार और औद्योगिक विकास के लिए भी गेम-चेंजर साबित हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन को मजबूत करने के साथ-साथ भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगी.
Bureau Report
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