बालेंद्र शाह ने आज नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली. 35 वर्षीय नेता, जो राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के संसदीय दल के प्रमुख हैं, देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गए हैं. उन्हें रामचंद्र पौडेल ने शीतल निवास स्थित राष्ट्रपति कार्यालय में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. हाल ही में संपन्न संसदीय चुनावों में RSP ने लगभग दो-तिहाई बहुमत के साथ उल्लेखनीय जीत दर्ज की थी. इसके बाद पार्टी ने शाह को अपना संसदीय दल का नेता चुना, जिससे उनके नेपाल के 47वें प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हुआ था. उनकी नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 76(1) के तहत की गई.
इससे पहले चुनाव में भारी जीत के बाद उन्होंने अपने पहले सार्वजनिक संदेश में एकता, युवाओं की ताकत और बदलाव की जरूरत पर जोर दिया. जानकारी के अनुसार, बालेंद्र शाह ने गुरुवार को नवनिर्वाचित सांसद के रूप में शपथ ली और इसके कुछ ही घंटों बाद एक रैप गीत के जरिए जनता को अपना पहला संदेश दिया.
युवा नेतृत्व का प्रतीक बने बालेंद्र शाह
बालेंद्र शाह ने गीत में देश की एकता और राष्ट्रीय शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि एकता की शक्ति ही मेरी राष्ट्रीय शक्ति है. ये गीत रिलीज होते ही सोशल मीडिया और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो गया. बालेंद्र शाह ने अपने संदेश में युवाओं को देश के निर्माण में आगे आने का आह्वान किया. उन्होंने अपने गीत में कहा कि उनका दिल साहस से भरा है और इस बार देश में नया इतिहास लिखा जाएगा. उनकी यह अपील ऐसे समय में आई है जब देश के युवा लंबे समय से राजनीतिक बदलाव की मांग कर रहे थे.
हालांकि बालेंद्र शाह की जीत को बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है, लेकिन उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं. भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, आर्थिक अस्थिरता और राजनीतिक असंतुलन जैसे मुद्दों से निपटना उनकी प्राथमिकता मानी जा रही है. इसके अलावा, विद्रोह के दौरान हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा दिलाना भी नई सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी.
पूर्व प्रधानमंत्री को हराकर बनाई पहचान
बालेंद्र शाह ने चुनाव में नेपाल के दिग्गज नेता और 4 बार प्रधानमंत्री रह चुके केपी शर्मा ओली को उनके ही निर्वाचन क्षेत्र में हराकर बड़ी राजनीतिक जीत हासिल की. यह जीत न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि थी, बल्कि यह देश में बदलाव की जनता की इच्छा को भी दर्शाती है. नेपाल में हालिया चुनाव सितंबर 2025 में हुए एक बड़े विद्रोह के बाद कराए गए थे. इस आंदोलन में कम से कम 77 लोगों की मौत हुई थी और इसने तत्कालीन सरकार को गिरा दिया था. यह विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुआ था, लेकिन जल्द ही यह भ्रष्टाचार और आर्थिक समस्याओं के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन में बदल गया था.
हिंसा की जांच और बड़े नेताओं पर सवाल
विद्रोह के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए गठित आयोग की रिपोर्ट में कई गंभीर खुलासे हुए थे. रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर हुई गोलीबारी में बड़ी संख्या में युवाओं की मौत हुई, जिनमें कई नाबालिग भी शामिल थे. इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, पूर्व गृह मंत्री और पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे. हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया था, लेकिन यह जरूर कहा गया कि हिंसा को रोकने के पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए.
सुशीला कार्की ने भी देश की युवा सरकार पर जताया भरोसा
इस बीच, निवर्तमान अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने अपने विदाई संबोधन में देश की बागडोर युवाओं को सौंपने पर भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि नई सरकार से उम्मीद है कि वह भ्रष्टाचार खत्म करेगी, सुशासन लाएगी और रोजगार के अवसर बढ़ाएगी. कार्की ने यह भी कहा कि देश का भविष्य युवाओं की ईमानदारी और मेहनत पर निर्भर करेगा.
नेपाल एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां पुरानी राजनीति और नई सोच के बीच संतुलन बनाना जरूरी है. बालेंद्र शाह का उभार इस बात का संकेत है कि देश में युवा नेतृत्व को लेकर नई उम्मीदें जागी हैं. अब यह देखना होगा कि क्या वे इन उम्मीदों पर खरे उतरते हैं और नेपाल को स्थिरता, विकास और पारदर्शिता की दिशा में आगे बढ़ा पाते हैं.
Bureau Report
Leave a Reply