राजधानी दिल्ली में हर साल उफान मारती यमुना नदी तटीय इलाकों में रहने वालों के लिए दहशत का कारण बन जाती है. हालांकि, इस बार हालात का सामना करने के लिए प्रशासन का रुख कुछ बदला हुआ नजर आ रहा है. उत्तरी दिल्ली के वजीराबाद से लेकर बुराड़ी तक यमुना पुस्ता (तटबंध) को मजबूत करने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है.
फ्लड विभाग कर रहा ‘स्टोन पिचिंग’
रिहायशी इलाकों को बाढ़ के संभावित खतरे से बचाने के लिए बाढ़ नियंत्रण (फ्लड) विभाग की टीमें दिन-रात मोर्चे पर डटी हैं. वर्तमान में यमुना खादर की तरफ ‘स्टोन पिचिंग’ (पत्थरों से बांध को पक्का करना) का काम तेजी से किया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य पानी के तेज बहाव के कारण होने वाले मिट्टी के कटाव को रोकना और बांध को मजबूती देना है. पिछले साल दिल्ली में आई भयंकर बाढ़ ने इस तटबंध की पोल खोल कर रख दी थी. उस दौरान बांध में कई जगह दरारें और कटाव सामने आए थे, जिससे आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल बन गया था. उसी खौफनाक मंजर को ध्यान में रखते हुए, इस बार दिल्ली सरकार ने बाढ़ का सीजन शुरू होने से पहले ही बचाव कार्यों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है.
झुके हुए है बिजली के खंभे
एक तरफ प्रशासन बांध को पक्का कर रहा है, तो दूसरी तरफ स्थानीय लोगों ने एक अलग ही खतरे की ओर ध्यान खींचा है. लोगों का कहना है कि पुश्ते पर लगे बिजली के कई खंभे (पोल) काफी खतरनाक तरीके से झुके हुए हैं. स्थानीय निवासियों के मुताबिक, “बांध तो बन रहा है, लेकिन ये टेढ़े खंभे कभी भी बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं. ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या सिर्फ पत्थरों की पिचिंग कर देने से सुरक्षा सुनिश्चित हो जाएगी, या इन जानलेवा खंभों को भी दुरुस्त किया जाएगा?
अभी बाकी है असली परीक्षा
फिलहाल प्रशासन यह दावा कर रहा है कि इस बार तैयारियों में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है. लेकिन, इन दावों और इंतजामों की असली परीक्षा तब होगी जब यमुना नदी मॉनसून में अपने उफान पर होगी। अब यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि क्या इस बार यमुना का कहर थमेगा या फिर दिल्ली के ये इलाके एक बार फिर जलमग्न होने को मजबूर होंगे। फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासन के इन मरम्मत कार्यों पर टिकी हैं.
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