सुरक्षा पर खतरा? दिल्ली में 1.4 लाख चीनी CCTV कैमरे हटाने का फैसला

सुरक्षा पर खतरा? दिल्ली में 1.4 लाख चीनी CCTV कैमरे हटाने का फैसला

दिल्ली के PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने एक अहम फैसला सुनाते हुए राजधानी में केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में लगाए गए चीनी मूल के CCTV कैमरों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दे दिए हैं. फेज 1 में लगाए गए सभी 1,40,000 कैमरे चीनी कंपनी Hikvision के हैं, जिस पर वैश्विक स्तर पर सुरक्षा संबंधी चिंताएं उठ चुकी हैं. वहीं पहले चरण में राजधानी में 50,000 चीनी कैमरों को बदलने की मंजूरी दे दी गई है.

इतने कैमरे लगे हैं दिल्ली में

हाल ही में सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा कुल 2,74,389 कैमरे लगाए गए हैं. इनमें से करीब 1,40,000 कैमरे यानी लगभग 51 प्रतिशत चीन में बने हैं. ये कैमरे सितंबर 2020 से नवंबर 2022 के बीच पहले चरण में लगाए गए थे. वहीं, दूसरे चरण में जून 2025 से मार्च 2026 के बीच 1,34,389 नए कैमरे लगाए गए, जो चीनी मूल के नहीं हैं.

सुरक्षा को लेकर सवाल
मंत्री ने निगरानी व्यवस्था और डेटा सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. उनका कहना है कि पूरे शहर में विदेशी, खासकर चीनी कैमरे लगाने से लंबे समय में सुरक्षा से जुड़े खतरे पैदा हो सकते हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस फैसले को लेते समय राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया गया था या नहीं. 

मंत्री प्रवेश वर्मा ने आगे कहा कि निगरानी प्रणाली केवल सुरक्षा के लिए नहीं होती, बल्कि यह संवेदनशील डेटा के कंट्रोल से भी जुड़ी होती है. ऐसे में किसी भी देश विशेष के उपकरणों पर निर्भर रहना आगे के लिए जोखिम बढ़ा सकती है. उन्होंने इसे एक सामान्य खरीद प्रक्रिया नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अहम फैसला बताया.

AAP पर साधा निशाना-प्रवेश वर्मा 
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली भर में चीनी Hikvision कैमरे लगाते समय लंबे समय की सुरक्षा चिंताओं के बारे में बिल्कुल नहीं सोचा. निगरानी का ढांचा सिर्फ देखने-दिखाने के लिए नहीं होता, बल्कि यह संवेदनशील डेटा पर कंट्रोल ने के बारे में भी होता है. इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताते हुए उन्होंने आगे कहा कि यह कोई सामान्य खरीद का फैसला नहीं था. जब आप पूरे शहर में इस तरह के सिस्टम लगाते हैं, तो आप राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक अहम फैसला ले रहे होते हैं. दुर्भाग्य से, आम आदमी पार्टी इस बात को समझने में नाकाम रही.

Bureau Report

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