बिहार की सियासत में इस सप्ताह बड़ा फेरबदल होने वाला है. जानकारी के मुताबिक, गुरुवार (9 अप्रैल) सीएम नीतीश कुमार दिल्ली रवाना हो सकते हैं और 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य पद की शपथ ले सकते हैं. इसके बाद वे पटना वापस आकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे. इन संभावनाओं को देखते हुए नई सरकार और नए सीएम पर मंथन शुरू हो गया है. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बिहार की कमान किसके हाथों में जाएगी. सूत्रों के मुताबिक, 10 अप्रैल को दिल्ली में एक बहुत ही अहम बैठक बुलाई गई है. इस बैठक का मुख्य मकसद बिहार में नई सरकार के गठन और सबसे जरूरी, नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाना है.
बिहार की राजनीति के लिए 14 अप्रैल से लेकर 20 अप्रैल तक का समय बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि सूत्रों के अनुसार, भाजपा के थिंकटैंक ने नई सरकार के गठन के लिए 20 अप्रैल की तारीख फाइनल की है. हालांकि, 14 अप्रैल से लेकर 18 अप्रैल तक का समय बेहद महत्वपूर्ण होगा. बिहार की राजनीति 360 डिग्री घूमने जा रही है. स्पनिल सोनल के मुताबिक, बिहार भाजपा में हर नेता खुद को सीएम कैंडिडेट मान रहा है. वहां मंत्री ढूंढना मुश्किल हो गया है.
स्पनिल सोनल के अनुसार, भाजपा की ओर से सीएम कैंडिडेट के तौर पर सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है. उन्होंने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि सम्राट चौधरी वर्तमान सरकार में डिप्टी सीएम हैं. इससे पहले बीजेपी में प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं. इस तरह से अब उन पर कोई राजद कैडर से होने का ठप्पा नहीं लगा सकता है. इसके साथ ही वह नीतीश कुमार के विश्वासपात्र बन चुके हैं और जेडीयू विधायकों में भी उनकी स्वीकार्यता काफी ज्यादा है.
स्पनिल सोनल ने साफ कहा कि बिहार में बीजेपी बहुत ज्यादा प्रयोग की स्थिति में नहीं है. यहां वही होगा, जो नीतीश कुमार चाहेंगे. 70 फीसदी हालात सम्राट के पक्ष में हैं, जबकि 20 फीसदी में बीजेपी प्रयोग कर सकती है. वहीं 10 फीसदी में किसी महादलित वर्ग के नेता को सीएम बनाया जा सकता है. फिलहाल अब सभी की निगाहें पूरी तरह से 10 अप्रैल की इस मीटिंग पर टिकी हैं, क्योंकि इसी दिन बिहार को उसका नया ‘बॉस’ मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा.
Bureau Report
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